*इसलिए मनती है दो दिन तक अष्टमी*
वृंदावन के पंडित बनवारीलाल गौड़ बताते हैं कि सनातन धर्म में पुराणों के अनुसार दो मतों पर आधारित पर्व मनाए जाते हैं। स्मार्त और वैष्णव मत में पर्व मनाने की तिथि में अंतर होता है। स्मार्त मत में जन्माष्टमी 11 अगस्त को मनेगी। वैष्णव मत में 12 को। इसके पीछे कारण है कि ब्रह्म मुहूर्त में जो तिथि होती है, वैष्णव उसी दिन उत्सव मनाते हैं। 12 अगस्त को ब्रह्म मुहूर्त में अष्टमी तिथि होने के कारण वैष्णव श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 12 अगस्त को मनाएंगे। 12 अगस्त को बुधवार और रोहिणी नक्षत्र भी पड़ रहा है। इसी दिन अधिकतर स्थानों पर उत्सव मनेगा।
क्या है स्मार्त और वैष्णव मत
स्मार्त मत
जो स्मृतियों और वेदों को मानते हैं। पूर्ण रूप से संन्यासी हैं। स्मार्त मत से जुड़े लोग किसी भी पर्व की शुरुआत की तिथि को मानते हैं। एकादशी भी स्मार्त मत के लोग एक दिन पहले मनाते हैं।
वैष्णव मत
वह मत जिसे हमारे आचार्यों ने प्रारंभ किया है। वैष्णव मत के लोग किसी भी पर्व की सूर्योदय की तिथि को मानते हैं।
निशीथ बेला में हुआ था कृष्ण का जन्म
ज्योतिषाचार्य कामेश्वर चतुर्वेदी के मुताबिक द्वापर युग में भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि बुधवार को रात 12 बजे निशीथबेला में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। वैष्णव इस वर्ष 12 अगस्त को जन्माष्टमी महोत्सव मनाएंगे। सर्वार्थ सिद्धि योग व बुधवार भी है। उच्च राशि (वृषभ) के चंद्रमा हैं, निशीथ बेला में 11ः 43 बजे वृषभ लग्न भी आ जाएगी। मथुरा के पूर्व क्षितिज पर चंद्रमा का उदय रात 11ः40 बजे हो रहा है स्मार्त जन 11 अगस्त को जन्माष्टमी मनाएंगे।