विदेश यात्रा
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कुंडली में अष्टम भाव नदी या समुद्र स्थान है। नवम भाव समुद्र पार पहुंचाने को प्रकट करता है। बारह भाव , नवम भाव भाव से चौथा होने से समुंदर पार के घरों (नगरों) से संबंधित है। आता नवम तथा द्वादश भाव में चर राशि हो और उनके स्वामी भी चर राशि में हो तो विदेश यात्रा के योग बनते हैं। इसके अलावा अन्य योगों को भी देखा जाना चाहिए। 1 नवमेश एवं लग्नेश अपने-अपने भाव में हो, अर्थात लग्नेश लग्न में तथा नवमेश नवा में ही हो। 2 नवमेश,लग्न में तथा लग्नेश नवम भाव में हो। 3 जिन भावों में नवमेश कथा दशमेश स्थित हो, उन भावों के स्वामी भी चर राशि में हो। 4 चंद्रमा चर राशि में हो तथा नवम एवं द्वादश भाव से संबंधित हो। 5 लग्न एवं लग्नेश चर राशि में हो तथा चर राशि में स्थित ग्रह से दृष्ट हो।