*श्रीं ह्रीं चिकित्सा एक लघु परिचय
*श्रीं ह्रीं चिकित्सा एक लघु परिचय हमारे भीतर तीन शत्रु बैठे हैं ।काम , क्रोध और लोभ ।जिसमें से काम मुख्य है ।काम का सामान्य अर्थ कामना से है ।काम की पूर्ति होने पर लोभ बढ़ता है और कामना की पूर्ति न होने पर क्रोध बढ़ता है ।*
*जैसे जैसे हमारे अंदर में लोभ की वृत्ति प्रबल होती है वैसे वैसे हमारे अंदर की भक्ति कम होती चली जाती है ।मन मे काम उत्पन्न हो तो आपके किये हुए कर्म नष्ट हो जाते हैं ।*
*मन मे क्रोध उत्पन्न हो तो समझ लीजिए आप मे धीरे धीरे ज्ञान की कमी होती जा रही है ।क्रोध की शुरुवात मूर्खता से होती है और पश्चाताप पे जाकर विश्राम हो जाता है ।ज्ञान जब कम होने लगता है तो क्रोध सिर पर चढ़ने लगता है ।* इन समस्याओं के हल के लिए डा श्री गौरव शुक्ल जी ने अपने अध्ययन में पाया कि श्रीं बीज मंत्र के लेखन मात्र से व्यक्ति इन सभी समस्याओं से मुक्ति पा सकता है जो इसके बाद स्वयं यह चिकित्सा पद्धति से जुड़ना चाहता है वह पूरी शिक्षा नाममात्र के शुल्क पर करसकता है अधिक जानकारी के लिए सम्पर्क कर सकते हैं