क्या 28 साल की उम्र के बाद मांगलिक दोष हो जाता है खत्म? जानें यहां ...
ज्योतिष शास्त्र अनुसार किसी भी जातक की कुंडली में मंगल का लग्न, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में स्थित होने से यह दोष बनता है।
कुंडली में मंगल दोष के होने से पति पत्नी के स्वास्थ्य और प्रेम संबंधों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
कुंडली में मंगल का लग्न, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में स्थित होने से यह दोष बनता है।
मांगलिक दोष के कारण कई लोगों की शादी काफी देरी से होती है। क्योंकि कहा जाता है कि एक मांगलिक सिर्फ दूसरे मांगलिक से ही शादी कर सकता है।
कुंडली में मांगलिक दोष होने पर व्यक्ति को शादीशुदा जीवन में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसलिए विवाह से पहले वर वधु की कुंडलियों का मिलान किया जाता है जिसमें कुंडली के मांगलिक दोष को जरूर देखा जाता है।
ज्योतिष शास्त्र अनुसार किसी भी जातक की कुंडली में मंगल का लग्न, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में स्थित होने से यह दोष बनता है।
कुंडली में मंगल दोष के होने से पति पत्नी के स्वास्थ्य और प्रेम संबंधों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसलिए मांगलिक दोष होने पर मांगलिक व्यक्ति से ही विवाह करना सबसे अच्छा माना जाता है।
ज्ञानी जन यह भी कहते हैं कि 28 साल की उम्र के बाद इस दोष से मुक्ति मिल जाती है। इसलिए कई लोग इस दोष के होने पर 28 साल की उम्र के बाद ही विवाह करते हैं।
इसके पीछे का कारण पुराने समय में कही गई कुछ बातें हैं जिनके अनुसार जीवन के हर चरण को 7 सालों के हिसाब से बांटा गया था जो उस समय के हिसाब से बिल्कुल सही था।
पहले चरण में किसी भी व्यक्ति के पैदा होने से 7 साल की उम्र तक का समय आता है। इस दौरान व्यक्ति के शरीर का पूरा विक