*उपचय भाव ओर कैरिअर*
उपचय भाव :- 3,6,10&11 भाव को हम ज्योतिष में उपचय भाव बोलते है.......
उपचय का शाब्दिक अर्थ होता है वृद्धि भाव , यह वो भाव है जिनसे हम लगातार वृद्धि करते है......
वृद्धि मतलब अपने मेहनत, पराक्रम ,बाहुबल, जोश, होश , लगन, साहस , *इच्छा शक्ति , के साथ किया गया काम ही वृद्धि भाव होता है*..........किसी भी संकट को फेस करने वाला, हिम्मत नही हारने वाला , लगातार पराक्रम करते रहना ही उपचय भाव है...........!!
ऋषि पाराशर जी के सूत्र के अनुसार 3,6,10&11 भाव मे क्रूर ग्रह अच्छे फल देते है यहां उनके कहने का सीधा मतलब ये था कि व्यक्ति को साहस, पराक्रम, प्रतियोगिता, हिम्मत नही छोड़ना, किसी भी काम ओर घटनाओ को फेस करने में हमेशा क्रूर और पाप ग्रह ही ताकत देते है *शनि, मङ्गल राहु ,केतु, सूर्य* ये ग्रह इन उपचय भाव से सम्बन्ध रखते है तो डेफिनेटली बढ़िया फल देगा,क्योकि ये सभी हिम्मत जोश, क्रूर और पाप प्रकृति के है ओर भाव 3,6,10&11 भाव भी इसी तरह के जो डटकर स्थितियों का सामना करवाने में माहिर है.............इसीलिए उपचय भाव मे क्रूर ओर पाप ग्रह शुभ फल दायक हो गया................!!