*गुरुदेव :* मंत्र को गुप्त रूप से फुसफुसा कर क्यों दिया जाता है ? यदि मंत्र खुले तरीके से दिया जा…
*गुरुदेव :* मंत्र को गुप्त रूप से फुसफुसा कर क्यों दिया जाता है ? यदि मंत्र खुले तरीके से दिया जाय तो क्या मंत्र की शक्ति कम हो जाती है ?
पता है मनोवैज्ञानिक क्या कहते हैं ? यदि आप के मस्तिष्क में कोई ऐसी बात है जो आपको परेशान कर रही है तो उसे कह डालें । उसे आप कह कर बाहर निकाल दें तब आप उससे मुक्त हो जाएंगे । हमें मंत्र को अपने अन्दर रखना है । उसे सबके सामने व्यक्त नहीं करना है । हमें उस मंत्र को अपने अन्दर स्थापित करके मन की गहराई में ले जाना है । अतः मंत्र को और गहराई में ले जाने के लिए ऐसे मंत्र की आवश्यकता होती है जो गुप्त हो । जिसे आप व्यक्त नहीं करना चाहते । इसलिए गुप्त तरीके से मंत्र दिया जाता है । गुप्त रूप से बताई बात आपकी अन्तरविवेक शीलता में रहती है। अतः मंत्र हमें अन्तरविवेकशीलता तक पहुँचाता है। इसलिए इसे गुप्त रूप से देने की आवश्यकता है। जो मंत्र दिया जाता है शायद वह एक ज्ञात मंत्र ही हो किन्तु जो मंत्र आपको दिया गया है उसे गुप्त रखें जिससे आप ध्यान की गहराई तक पहुँच सकें। यह बहुत वैज्ञानिक सत्य है, यह विचार पुरातन और वैज्ञानिक भी है। कुछ महामंत्र होते हैं जिनका सब लोग जोर से बोल कर उच्चारण कर सकते हैं ।
किन्तु व्यक्तिगत मंत्र को गुप्त रखना चाहिए। वही सहज मंत्र आपको " सहज समाधि ध्यान " कोर्स में दिया जाता है। उसे आपको अपने तक ही सीमित रखना होता है। उसे किसी दूसरे व्यक्ति को नहीं बताना होता। दूसरे मंत्र जैसे " ऊँ नमः शिवाय " और ओम का उच्चारण सबके साथ ऊँची आवाज में कर सकते हैं । उन मन्त्रों को जोर से सामुहिक रूप से बोलने से उनकी तरंगें सारे वातावरण को शुद्ध करती हैं । जयगुरूदे
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