लाल किताब में करीब 14 हजार नियम कानून हैं।
लाल किताब में करीब 14 हजार नियम कानून हैं।
जिनमे लाल किताब की खास ग्रामर को देखे बिना लाल किताब विशेषज्ञ ना तो कुंडली विवेचना करता है।
और ना ही उपाय बताता है। आज आपको लाल किताब के कुछ नियम कानून बता रहा हूँ। जो मित्र अभी जियोतिष सीख रहे हैं उनको मेरी इस पोस्ट से अच्छी जानकारी मिलेगी।
इसलिये इस पोस्ट को save कर लें। आज हम बात करेंगे लाल किताब के कुछ खास नियमों की लाल किताब में कुछ खास ग्रहों के किसी खास खाना नंबर में होने होने पर किसी खास ग्रह के प्रभाव को शुभ अशुभ कर देते हैं।
कौन सा ग्रह किस खाना किस ग्रह के प्रभाव को शुभाशुभ करता है। आइए समझाने की कोशिश करता हूँ।
लाल किताब में फलित को स्पष्ट करने के लिए यह नियम भी बहुत महत्व रखता है।
1- खाना नंबर 1 में केतु बैठकर सूरज के फल उच्च करता है। खाना नंबर 1 में राहु बैठकर सूरज को ग्रहण लगा देता है। (जिस घर मे सूरज बैठा हो उस घर को )राहू जब लग्न में बैठ जाए तो सूरज चाहे किसी भी घर में बैठा हो सूरज ग्रहण होगा। पर अलग तरह का सिर्फ सूरज घर 5 में हो तो बचाव हो जाता है। 2-बुध अगर खाला नंबर 2 में बैठा हो तो बृहस्पति (पिता) बर्बाद होगा चाहे वो किसी भी घर में बैठा हो और अगर बुध खाना नंबर 4 में बैठा हो तो चंदर (माता) बर्बाद होगी चाहे वह किसी भी खाना नंबर में बैठा हो। 3-खाना नंबर 6 में अगर मंगल बैठा हो तो सूरज कुंडली के किसी भी खाना नंबर में बैठा हो हमेशा उच्च का होगा यानी कि मंगल खाना नंबर 6 में बैठ के सूरज को उच्च करेगा और अगर मंगल खाना नंबर 6 में बैठा हो तो केतु को बरबाद करेगा यानी औलाद परेशानी लेकर आएगी।