साधारण फलित, सूर्य व शनि युति का
साधारण फलित, सूर्य व शनि युति का
सूर्य,, आत्मा सूर्य,, तेज, मान संमान सूर्य,,, सरकार सूर्य,,, हड्डी सूर्य,,,, हृदय
शनि,,,, अंधकार शनि,,,, परिक्षम शनि,,, सेबक शनि,,,,, वायु बिकार शनि,,,,,, बूढा शनि,,,,,, चमडा
सूर्य शनि की युती का फल
पिता बहुत मेहनत करने वाला होगा
पिता को, वायु जनित रोग होंगे लगडा पन आदि
सूर्य शनि,,,,, मान संमान मे कमी
सूर्य शनि,,, सरकार व पिता से मतभेद
सूर्य शनि,,, ह्रदय रोग
सूर्य शनि,,,, पिता चमडे का कार्य करने वाला
सूर्य शनि,,,,,, छलकपट करने वाला
सूर्य शनि,, ,,सरकारी सेवक या मुखिया
सूर्य शनि,,, अंतरआत्मा मे छल
सूर्य शनि,,,, हड्डियो का रोगी
सूर्य शनि,,,,, घंमडी दुराचारी पांखडी
सूर्य अगर कुंडली के 6/8/12 भाव मे हो तो जातक ह्रदय से कमजोर होता है
अब यह कुंडली मे कोन किस भाव का स्वामी है वह देखकर बाकी का फलित करना चाहिए *मृत्यु योग* *बाईसवॉ द्रेशकॉण* *बाईसवॉ द्रेशकॉण यदि मेष का पहला द्रेकाण हो तो ओर पाप ग्रह से युत या दृष्टी हो तो जल अग्नि बिष या पित्त के प्रकोप से*
*मेष के दुसरे द्रेशकॉण मे जल शीत ओले वन्य जीवों से*
*मेष के तीसरे द्रेशकॉण मे पोखर कुऑ आदि मे गिरकर मृत्यु होती है*