शनि केतु
कर्म में रुकावट ,आध्यात्मिक योग शिव योग कई नाम से आपको ये मिलेगा
,सन्यासी योग भी इसे कहा गया है क्योकि शनि विरक्ति एवम अकेलापन देता है तो केतु मोह माया छोड़कर सांसारिक जीवन से अलग करता है लेकिन सन्यासी में चन्द्र का होना बहुत जरूरी होता है ,इस योग वाले शिव भक्त होते है,या उनका जन्म अधिकतर शिव मंदिर के पास होता है ,लंबे बाल भी अधिकतर देखे गए है, बड़े भाई के सुख में कमी देखी गई है या तो बड़ा भाई होता ही नही अगर है तो सुख में कमी रहेगी,मतलब मतभेद रह सकते है
परंतु यदि शनि के डिग्री ज्यादा हो केतु से तब भाई का सूख ठीक रहता है
मतलब इस युति वाले जातकों को अधिकतर जॉब या नॉकरी में समश्या रहती है
अधिकतर आपको आध्यात्मिक लोग मिलेंगे, जैसे पंडित, ज्योतिषी,शिक्षक पुजारी मौलवी, डॉक्टर,ज्ञान एवम उपदेश देने वाले,
शनि देवो में शिव का प्रतिनिधित्व करते है मतलब शिव जी के समान ही इनके गुण धर्म है, इसलिए शनि केतु योग को शिव योग भी कहा गया है
शनि शिव केतु जटा लंबे बाल
जटा इसलिए क्योकि संसार मे जितनी भी पतली या लम्बी वस्तुये है उनका कारक केतु ही है,जटा मतलब लंबे बाल
सारांश ये निकला कि ये योग प्रोफेसनल लाइफ के लिए अच्छा नही है,दुख तकलीफ ज्यादा है
Note:- ये योग बुरा ही नही अच्छा भी होता है
शनि केतु के त्रिकोण में गुरु हो तो सब कुछ बढ़िया
या शनि केतु के त्रिकोण या सप्तम में जब भी गुरु गोचर में आएगा वो समय जातक के लिए अच्छा होगा,