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Fresh stories, announcements and offers about Astrologer, straight from our business.

🚩श्री गणेशाय नम:🚩

☀ 08 - Sep - 2020 ☀ New Delhi, India ☀ पंचांग 🔅 तिथि षष्ठी 24:05:29 🔅 नक्षत्र भरणी 08:26:26 🔅 करण : गर 10:55:12 वणिज 24:05:29 🔅 पक्ष कृष्ण 🔅 योग व्याघात 17:32:25 🔅 वार मंगलवार ☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ 🔅 सूर्योदय 06:02:45 🔅 चन्द्रोदय 22:12:59 🔅 चन्द्र राशि मेष - 15:10:31 तक 🔅 सूर्यास्त 18:33:58 🔅 चन्द्रास्त 11:05:59 🔅 ऋतु शरद ☀ हिन्दू मास एवं वर्ष 🔅 शक सम्वत 1942 शार्वरी 🔅 कलि सम्वत 5122 🔅 दिन काल 12:31:13 🔅 विक्रम सम्वत 2077 🔅 मास अमांत भाद्रपद 🔅 मास पूर्णिमांत आश्विन 🔅 दिशा शूल उत्तर 🔅 राहु काल 15:26:09 - 17:00:03 *आज का राशिफल* *💥मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)💥आज भी दिन के अंतिम भाग को छोड़ शेष विपरीत फलदायी रहेगा। दिन भर भागदौड़ करने के बाद भी कुछ भी आपकी आशा के अनुरूप नही होगा। धन संबंधित कार्य भी अंत समय मे आकर उलझ जाएंगे फिर भी उधारी के व्यवहार यथासम्भव ना करे अन्यथा नई मुसीबत सर पड़ेगी। किसी से काम निकालने में भी अभिमान आड़े आएगा। समाज के वर्जित कार्यो की ओर मन भटकेगा यह भविष्य में मान हानि कराएगा। गृहस्थ में किसी बाहरी व्यक्ति के कारण मतभेद रहेगा। विद्यार्थी मन मर्जी करेंगे। सेहत को लेकर लापरवाही ना करें। धैर्य से सही समय की प्रतीक्षा करें रात्रि में शुभ समाचार मिल सकते है।* *💥वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)💥आज आप अपने अंदर एक नई ऊर्जा का संचार अनुभव करेंगे। कार्यो को लेकर थोड़े लापरवाह भी रहेंगे लेकिन किसी का सहयोग मिलने से कार्य निश्चित समय पर

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शिव प्रतिमा के सामने ही क्यों विराजित होते है नंदी?

🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸 आइए पढ़ते है भगवान शिव के वाहन नंदी से सम्बंधित एक कहानी जिससे हमें पता चलेगा की नंदी क्यों और कैसे महादेव की सवारी बनें? और शिव प्रतिमा के सामने ही क्यों विराजित होते है नंदी ? पौराणिक कथा 🔸🔸🔹🔸🔸 शिलाद मुनि के ब्रह्मचारी हो जाने के कारण वंश समाप्त होता देख उनके पितरों ने अपनी चिंता उनसे व्यक्त की। मुनि योग और तप आदि में व्यस्त रहने के कारण गृहस्थाश्रम नहीं अपनाना चाहते थे। शिलाद मुनि ने संतान की कामना से इंद्र देव को तप से प्रसन्न कर जन्म और मृत्यु से हीन पुत्र का वरदान माँगा। परन्तु इंद्र ने यह वरदान देने में असर्मथता प्रकट की और भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कहा। भगवान शंकर शिलाद मुनि के कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर स्वयं शिलाद के पुत्र रूप में प्रकट होने का वरदान दिया और नंदी के रूप में प्रकट हुए। शंकर के वरदान से नंदी मृत्यु से भय मुक्त, अजर-अमर और अदु:खी हो गया। भगवान शंकर ने उमा की सम्मति से संपूर्ण गणों, गणेशों व वेदों के समक्ष गणों के अधिपति के रूप में नंदी का अभिषेक करवाया। इस तरह नंदी नंदीश्वर हो गए। बाद में मरुतों की पुत्री सुयशा के साथ नंदी का विवाह हुआ। भगवान शंकर ने नंदी को वरदान दिया कि जहाँ पर नंदी का निवास होगा वहाँ उनका भी निवास होगा। तभी से हर शिव मंदिर में शिवजी के सामने नंदी की स्थापना की जाती है। नंदी के दर्शन और महत्व 🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸 नंदी के नेत्र सदैव अपने इष्ट को स्मरण रखने का प्रतीक हैं, क्योंकि नेत्रों से ही उनकी छवि मन में बसती है और यहीं से भक्ति की शुरुआत होती है। नंदी के नेत्र हमें ये बात सिखाते हैं कि अगर भक्ति के साथ मनुष्य में क्रोध, अहम व दुर्गुणों को

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*जानिए किन विशेष ग्रहयोग के कारण होता हैं वैवाहिक जीवन में संघर्ष*––

यदि कुंडली के सप्तम भाव में कोई पाप योग (गुरु–चांडाल योग, ग्रहण योग अंगारक योग आदि) बना हुआ हो तो वैवाहिक जीवन में तनाव और बाधाएं उपस्थित होती हैं। यदि सप्तम भाव में कोई पाप ग्रह नीच राशि में बैठा हो तो वैवाहिक जीवन में संघर्ष की स्थिति बनती है। राहु–केतु का सप्तम भाव में शत्रु राशि में होना भी वैवाहिक जीवन में तनाव का कारण बनता है। यदि सप्तम भाव के आगे और पीछे दोनों और और पाप ग्रह हो तो यह भी वैवाहिक जीवन में बाधायें उत्पन्न करता है। सप्तमेश का पाप भाव (6,8,12) में बैठना या नीच राशि में होना भी वैवाहिक जीवन में उतार चढ़ाव का कारण बनता है। पुरुष की कुंडली में शुक्र नीच राशि (कन्या) में हो, केतु के साथ हो, सूर्य से अस्त हो, अष्टम भाव में हो या अन्य किसी प्रकार पीड़ित हो तो वैवाहिक जीवन में तनाव और संघर्ष उत्पन्न होता है। स्त्री की कुंडली में मंगल नीच राशि (कर्क) में हो, राहु शनि से पीड़ित हो बृहस्पति नीचस्थ हो राहु से पीड़ित हो तो वैवाहिक जीवन में बाधायें और वाद विवाद उत्पन्न होते हैं। पाप भाव (6,8,12) के स्वामी यदि सप्तम भाव में हो तो भी वैवाहिक जीवन में विलम्ब और बाधाएं आती हैं। सप्तम में शत्रु राशि या नीच राशि (तुला) में बैठा सूर्य भी वैवाहिक जीवन में बाधायें और संघर्ष देता है। विशेष – यदि पीड़ित सप्तमेश, सप्तम भाव, शुक्र और मंगल पर बृहस्पति की शुभ दृष्टि पड़ रही हो तो ऐसे में वैवाहिक जीवन की समस्याएं अधिक बड़ा रूप नहीं ले

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🚩🌞 *सुप्रभातम्* 🌞🚩 📜««« *आज का पंचांग* »»»📜 कलियुगाब्द.......................5122 विक्रम संवत्......................2077 शक संवत्.........................1942 मास................................अश्विन पक्ष..................................कृष्ण तिथी..............................द्वितीया दोप 02.25 पर्यंत पश्चात तृतीया रवि............................दक्षिणायन सूर्योदय...........प्रातः 06.10.38 पर सूर्यास्त...........संध्या 06.41.43 पर सूर्य राशि.............................सिंह चन्द्र राशि............................मीन गुरु राशि..............................धनु नक्षत्र.......................उत्तराभाद्रपद रात्रि 11.18 पर्यंत पश्चात रेवती योग...................................शूल दोप 01.50 पर्यंत पश्चात गंड करण................................गरज दोप 02.25 पर्यंत पश्चात वणिज ऋतु...................................शरद दिन................................शुक्रवार 🇬🇧 *आंग्ल मतानुसार :-* 04 सितम्बर सन 2020 ईस्वी । ⚜ *तिथी विशेष -* *द्वितीया श्राद्ध -* ☸ शुभ अंक.......................4 🔯 शुभ रंग...............आसमानी ⚜ *अभिजीत मुहूर्त :-* प्रातः 12.00 से 12.50 तक । 👁‍🗨 *राहुकाल (अशुभ) :-* प्रात: 10.52 से 12.25 तक । 🚦 *दिशाशूल :-* पश्चिमदिशा - यदि आवश्यक हो तो जौ का सेवन कर यात्रा प्रारंभ करें। 🌞 *उदय लग्न मुहूर्त -* *सिंह* 04:54:06 07:05:55 *कन्या* 07:05:55 09:16:34 *तुला* 09:16:34 11:31:12 *वृश्चिक* 11:31:12 13:47:22 *धनु* 13:47:22 15:53:00 *मकर * 15:53:00 17:40:09 *कुम्भ* 17:40:09 19:13:42 *मीन* 19:13:42 20:44:5

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4 सितंबर 2020 : आपका जन्मदिन

जन्मदिन की शुभकामनाओं के साथ आपका स्वागत है vastu astro tech की विशेष प्रस्तुति में। यह कॉलम नियमित रूप से उन पाठकों के व्यक्तित्व और भविष्य के बारे में जानकारी देगा जिनका उस दिनांक को जन्मदिन होगा। पेश है दिनांक 4 को जन्मे व्यक्तियों के बारे में जानकारी : दिनांक 4 को जन्मे व्यक्ति का मूलांक 4 होगा। इस अंक से प्रभावित व्यक्ति जिद्दी, कुशाग्र बुद्धि वाले, साहसी होते हैं। ऐसे व्यक्ति को जीवन में अनेक परिवर्तनों का सामना करना पड़ता है। जैसे तेज स्पीड से आती गाड़ी को अचानक ब्रेक लग जाए ऐसा उनका भाग्य होगा। लेकिन यह भी निश्चित है कि इस अंक वाले अधिकांश लोग कुलदीपक होते हैं। आपका जीवन संघर्षशील होता है। इनमें अभिमान भी होता है। ये लोग दिल के कोमल होते हैं किन्तु बाहर से कठोर दिखाई पड़ते हैं। इनकी नेतृत्त्व क्षमता के लोग कायल होते हैं। शुभ दिनांक : 4, 8, 13, 22, 26, 31 शुभ अंक : 4, 8,18, 22, 45, 57 शुभ वर्ष : 2020, 2031, 2040, 2060 ईष्टदेव : श्री गणेश, श्री हनुमान शुभ रंग : नीला, काला, भूरा कैसा रहेगा यह वर्ष यह वर्ष पिछले वर्ष के दुष्प्रभावों को दूर करने में सक्षम है। आपको सजग रहकर कार्य करना होगा। परिवारिक मामलों में सहयोग के द्वारा सफलता मिलेगी। मान-सम्मान में वृद्धि होगी, वहीं मित्र वर्ग का सहयोग मिलेगा। नवीन व्यापार की योजना प्रभावी होने तक गुप्त ही रखें। शत्रु पक्ष पर प्रभावपूर्ण सफलता मिलेगी। नौकरीपेशा प्रयास करें तो उन्नति के चांस भी है। विवाह के मामलों में आश्चर्यजनक परिणाम आ सकते हैं।

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*ज्योतिष और उपाय*:-

यदि आप नया घर बनवाने के बाद से या नया घर या फ्लैट खरीदने के बाद से परेशान चल रहे हैं तो शनि ग्रह के उपाय कीजिए! यदि आपकी कुंडली है तो बेहतर है कि कुंडली के अनुसार उपाय करें! यहां मैं कुछ सामान्य उपाय दे रहा हूं जो किसी भी राशि/ लग्न वाला जातक कर सकता है:- 1) शनिवार को नॉनवेज मत खाइए! 2) पूर्व दिशा में शनि ग्रह से संबंधित वस्तु को मत रखिए! 3) प्रतिदिन नहीं तो कम से कम मंगलवार और शनिवार को तीन बार हनुमान चालीसा का पाठ कीजिए! 4) शनिवार के दिन सरसों तेल, बदाम और बैगन मत खाइए!

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पितृपक्ष और भ्रांतियां

1 भ्रांति -पितृपक्ष में कोई कार्य नहीं करना चाहिए। तथ्य- यह एक विशिष्ट अवसर है, जिसमें हमें अपने पितरों व gaya बुजुर्गों का आदर एवम हिन्दु धर्म में वर्णित तर्पण एवम श्राद्ध आदि करना चाहिए। इसका अर्थ यह कदापि नहीं है कि अन्य दैनिक कार्य भी न करें। जिस कार्य का जो शास्त्र अनुसार काल या मुहूर्त बताया गया हो, वो जरूर करें। 2 भ्रांति - पितृपक्ष उसके लिए है जिसके पिता व माता नहीं हैं। तथ्य- यह नित्य कर्म के अंतर्गत समाहित किया गया है। जिसके संकल्प में श्रुति स्मृति पुराणोक्त फल प्राप्तये इसकी कामना है। सभी को इस काल खण्ड में अपने पूर्वजों को स्मरण एवम उनके मृत तिथि को दानादि एवम तर्पण आदि अवश्य करनी चाहिए। 3 भ्रांति - गया श्राद्ध सम्पन्न होने के बाद पितृपक्ष में तर्पणादि नहीं होगा। तथ्य- ये विधि विरुद्ध है। आपको गया श्राद्ध के बाद भी तर्पणादि अवश्य करनी चाहिए। 4 भ्रांति - पितृपक्ष में आवश्यक नहीं है कि हम तर्पणादि करें। तथ्य- आपको अपनी धार्मिक ,पारम्परिक, सामाजिक तथा मानव जीवन की अभ्युन्नति के लिए जरूर इस पक्ष विशिष्ट में अवश्य तर्पणादि करनी चाहिए जिससे , आधिदैविक, आधिभौतिक एवम आध्यात्मिक ताप- त्रय से निवृति एवम अभीष्ट की सिद्धि हो सके। जब भी अनुकूल श्रम करने के बाद भी जीवन में सफलता बाधित दिखे तो अपने पितरों को जरूर याद कर तर्पणादि करें। 5 भ्रांति- वर्तमान वर्ष में पिता या माता दिवंगत हो गए तो उसी वर्ष पड़ने वाले पितृपक्ष में तर्पणादि नहीं होगा। तथ्य- उस वर्ष भी तर्पणादि। किया जाएगा परन्तु पिंडदान आदि कार्य नहीं होंगे। 6 भ्रांति- भैया करते हैं तर्पणादि तो हम क्यों करें। तथ्य - यह कार्य प्रत्येक भाई के लिए है ,वे अवश्य करें।

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*इन 5 में से कोई 1 भी बीमारी हो, तो व्रत रखने से करें परहेज*

चाहे आपकी भगवान में कितनी भी आस्था क्यों न हो, अपनी सेहत को नजरअंदाज करके व्रत-उपवास रखना, सेहत के साथ खिलवाड़ करने जैसा है। अगर आपको बताई गई इन 5 में से कोई 1 भी सेहत समस्या हो, तो व्रत रखने से परहेज करना चाहिए - 1 अगर आपके शरीर में शर्करा का स्तर असंतुलित है या आप डायबिटीज के मरीज हैं, तो आपको उपवास बिल्कुल नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह शर्करा के स्तर को असंतुलित कर आपकी सेहत को काफी हद तक बिगाड़ सकता है। 2 अगर हाल ही में आपका कोई ऑपरेशन या सर्जरी हुई है, तो आपको उपवास करने से बचना चाहिए क्योंकि उसके पुन: संरक्षण में आपको पर्याप्त पोषण और ऊर्जा की आवश्यकता होगी। 3 अगर आपके शरीर में खून की कमी है, तो व्रत-उपवास करने से बचें और आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करें। खून की कमी होने पर उपवास करना सेहत से खिलवाड़ हो सकता है। 4 अगर आप हार्ट, किडनी, फेफड़े या लिवर संबंधित बीमारी से ग्रस्त हैं, तो उपवास करने से बचें, क्योंकि इससे आपकी आंतरिक शारीरिक व्यवस्थाएं गड़बड़ा जाएंगी और सेहत को इसका खामियाजा चुकाना होगा। 5 गर्भावस्था या मां बनने पर भी आापका व्रत-उपवास रखना न केवल आपकी सेहत को, बल्कि शिशु की सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। अगर इस समय व्रत करना ही पड़े, तो भरपूर पोषण युक्त आहार लें।

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🚩श्री गणेशाय नम:🚩

*ज्योतिषाचार्य कीर्तिगुप्ता* *8510879261* ☀ 02 - Sep - 2020 ☀ New Delhi, India ☀ पंचांग 🔅 तिथि पूर्णिमा 10:53:42 🔅 नक्षत्र शतभिषा 18:33:57 🔅 करण : बव 10:53:42 बालव 23:38:32 🔅 पक्ष शुक्ल 🔅 योग सुकर्मा 13:02:12 🔅 वार बुधवार ☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ 🔅 सूर्योदय 05:59:47 🔅 चन्द्रोदय 19:07:00 🔅 चन्द्र राशि कुम्भ 🔅 सूर्यास्त 18:40:58 🔅 चन्द्रास्त चन्द्रास्त नहीं 🔅 ऋतु शरद ☀ हिन्दू मास एवं वर्ष 🔅 शक सम्वत 1942 शार्वरी 🔅 कलि सम्वत 5122 🔅 दिन काल 12:41:11 🔅 विक्रम सम्वत 2077 🔅 मास अमांत भाद्रपद 🔅 मास पूर्णिमांत भाद्रपद 🔅 दिशा शूल उत्तर 🔅 राहु काल 12:20:22 - 13:55:31 *☀️💁🏻‍♂आज का राशिफल👇🏾👇🏾_~* *🌟मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)🌟आज दिन के पूर्वार्ध में आप दुविधा में फंसे रहेंगे। किसी भीं कार्य में स्थिति स्पष्ट ना होने के कारण कार्य रुके रह सकते है केवल मन ही मन कार्यो की रूपरेखा बनाएंगे। धीरे-धीरे स्थिति स्पष्ट होती जाएगी। किसी भी प्रकार का आर्थिक आयोजन करने के लिए आज का दिन शुभ रहेगा परन्तु धन की आमद सुनिश्चित नहीं रहने से बीच-बीच में व्यवधान भी आएंगे फिर भी इनसे पार पाकर सफल रहेंगे। पारिवारिक वातावरण आरम्भ में मनमुटाव वाला रहेगा बाद में आपसी भावनाओ की समझ होने लगेगी।* *🌟वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)🌟आपका आज का दिन मिला-जुला रहेगा। भावुकता अधिक रहने के कारण छोटी-छोटी बातों को दिल पर लेंगे। घर एवं बाहर का वातावरण इसी कारण दूषित हो सकता है। आर्थिक आयोजनों को पूर्ण करने में पहले बाधाएं आएगी बाद में स्थिति आपके पक्ष में

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रुद्राक्ष के महत्व, लाभ और धारण विधि

🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔹🔸🔸🔹🔹🔹 एक मुखी रुद्राक्ष 〰️〰️〰️〰️〰️ इसके मुख्य ग्रह सूर्य होते हैं। इसे धारण करने से हृदय रोग, नेत्र रोग, सिर दर्द का कष्ट दूर होता है। चेतना का द्वार खुलता है, मन विकार रहित होता है और भय मुक्त रहता है। लक्ष्मी की कृपा होती है।* दो मुखी रुद्राक्ष 〰️〰️〰️〰️ मुख्य ग्रह चन्द्र हैं यह शिव और शक्ति का प्रतीक है मनुष्य इसे धारण कर फेफड़े, गुर्दे, वायु और आंख के रोग को बचाता है। यह माता-पिता के लिए भी शुभ होता है। तीन मुखी रुद्राक्ष 🔸🔸🔹🔸🔸 मुख्य ग्रह मंगल, भगवान शिव त्रिनेत्र हैं। भगवती महाकाली भी त्रिनेत्रा है। यह तीन मुखी रुद्राक्ष धारण करना साक्षात भगवान शिव और शक्ति को धारण करना है। यह अग्रि स्वरूप है इसका धारण करना रक्तविकार, रक्तचाप, कमजोरी, मासिक धर्म, अल्सर में लाभप्रद है। आज्ञा चक्र जागरण (थर्ड आई) में इसका विशेष महत्व है। चार मुखी रुद्राक्ष 🔸🔸🔹🔸🔸 चार मुखी रुद्राक्ष के मुख्य देवता ब्रह्मा हैं और यह बुधग्रह का प्रतिनिधित्व करता है इसे वैज्ञानिक, शोधकर्त्ता और चिकित्सक यदि पहनें तो उन्हें विशेष प्रगति का फल देता है। यह मानसिक रोग, बुखार, पक्षाघात, नाक की बीमारी में भी लाभप्रद है। पांच मुखी रुद्राक्ष 🔸🔸🔹🔸🔸 यह साक्षात भगवान शिव का प्रसाद एवं सुलभ भी है। यह सर्व रोग हरण करता है। मधुमेह, ब्लडप्रैशर, नाक, कान, गुर्दा की बीमारी में धारण करना लाभप्रद है। यह बृहस्पति ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है। छ: मुखी रुद्राक्ष 🔸🔸🔹🔸🔸 शिवजी के पुत्र कार्तिकेय का प्रतिनिधित्व करता है। इस पर शुक्रग्रह सत्तारूढ़ है। शरीर के समस्त विकारों को दूर करता है, उत्तम सोच-विचार को जन्म देता है, राजदरबार में सम्मान विजय प्राप्त कराता

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THE MISSION OF A CAT 🐈 ♥️😽

"Most people think that cats do nothing, are lazy and do nothing but eat and sleep ... It is not so! Do you know what a cat's mission is? All cats have the power, every day, to remove the negative energy accumulated in our body ... as soon as we fall asleep, they absorb that energy. If there is more than one person in the family, and only one cat, it can accumulate an excessive amount of negativity by absorbing energy from so many people ... When they sleep, the cat's body releases the negativity it takes away from us. If we are too stressed, they may not have enough time to release all that negative energy, and so, as a result, it accumulates as fat, until they can release it. So, they get fat and you think it was the food you were feeding them ... or because they don't move enough ... and the truth is, they don't. It is nice to have more than one cat in the house, so that the weight is divided between them. They also protect us during the night, so that no unwanted spirits enter our house or our room while we sleep ... That's why they like to sleep in our bed. And if they think we're fine, they won't sleep with us. If there was something strange around us, they jump into our bed and protect us ... If a person comes to our house, and the cats feel that that person is there to harm us or that he is bad, the cats surround us to "protect" us ... If you don't have cats, and a stray cat comes into your house and adopts it as a home.

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आज जिनका जन्मदिन है (31.8.2020)

जन्मदिन की शुभकामनाओं के साथ आपका स्वागत है vastu astro tech की विशेष प्रस्तुति में। यह कॉलम नियमित रूप से उन पाठकों के व्यक्तित्व और भविष्य के बारे में जानकारी देगा जिनका उस दिनांक को जन्मदिन होगा। पेश है दिनांक 31 को जन्मे व्यक्तियों के बारे में जानकारी : दिनांक 31 को जन्मे व्यक्ति का मूलांक 4 होगा। इस अंक से प्रभावित व्यक्ति जिद्दी, कुशाग्र बुद्धि वाले, साहसी होते हैं। ऐसे व्यक्ति को जीवन में अनेक परिवर्तनों का सामना करना पड़ता है। जैसे तेज स्पीड से आती गाड़ी को अचानक ब्रेक लग जाए ऐसा उनका भाग्य होगा। लेकिन यह भी निश्चित है कि इस अंक वाले अधिकांश लोग कुलदीपक होते हैं। आपका जीवन संघर्षशील होता है। इनमें अभिमान भी होता है। ये लोग दिल के कोमल होते हैं किन्तु बाहर से कठोर दिखाई पड़ते हैं। इनकी नेतृत्व क्षमता के लोग कायल होते हैं। शुभ दिनांक : 4, 8, 13, 22, 26, 31, शुभ अंक : 4, 8,18, 22, 45, 57, शुभ वर्ष : 2020, 2031, 2040 2060, ईष्टदेव : श्री गणेश, श्री हनुमान, शुभ रंग : नीला, काला, भूरा, भविष्यफल : यह वर्ष पिछले वर्ष के दुष्प्रभावों को दूर करने में सक्षम है। आपको सजग रहकर कार्य करना होगा। विवाह के मामलों में आश्चर्यजनक परिणाम आ सकते हैं। परिवारिक मामलों में सहयोग के द्वारा सफलता मिलेगी। मान-सम्मान में वृद्धि होगी, वहीं मित्र वर्ग का सहयोग मिलेगा। नवीन व्यापार की योजना प्रभावी होने तक गुप्त ही रखें। शत्रु पक्ष पर प्रभावपूर्ण सफलता मिलेगी। नौकरीपेशा प्रयास करें तो उन्नति के चांस भी है।

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