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Fresh stories, announcements and offers about Astrologer, straight from our business.

🌄सुप्रभातम🌄

🗓आज का पञ्चाङ्ग🗓 🌻शुक्रवार, 25 सितंबर 2020🌻 सूर्योदय: 🌄 06:25 सूर्यास्त: 🌅 05:54 चन्द्रोदय: 🌝 14:20 चन्द्रास्त: 🌜00:44 अयन 🌕 दक्षिणायने (दक्षिणगोलीय) ऋतु: ❄️ शरद शक सम्वत: 👉 1942 (शर्वरी) विक्रम सम्वत: 👉 2077 (प्रमादी) मास 👉 आश्विन पक्ष 👉 शुक्ल तिथि👉 नवमी 18:43 तक नक्षत्र 👉 पूर्वाषाढ़ 18:31 तक योग 👉 शोभन 20:39 तक करण 👉 बालव 06:48 तक कौलव 18:43 तक 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰️〰️ ॥ गोचर ग्रहा: ॥ 🌖🌗🌖🌗 सूर्य 🌟 कन्या चंद्र 🌟 मकर (24:41 से) मंगल 🌟 मेष (उदित, पूर्व, वक्री) बुध 🌟 तुला (अस्त, पश्चिम, मार्गी) गुरु 🌟 धनु (उदित, पश्चिम, मार्गी) शुक्र 🌟 कर्क (उदित, पूर्व, मार्गी) शनि 🌟 मकर (उदय, पूर्व, वक्री) राहु 🌟 वृष केतु 🌟 वृश्चिक 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 शुभाशुभ मुहूर्त विचार ⏳⏲⏳⏲⏳⏲⏳ 〰〰〰〰〰〰〰 अभिजित मुहूर्त 👉 11:44 से 12:32 अमृत काल 👉 13:39 से 15:16 विजय मुहूर्त 👉 14:09 से 14:57 गोधूलि मुहूर्त 👉 17:57 से 18:21 निशिता मुहूर्तरात्रि 👉 11:44 से 12:32 राहुकाल 👉 10:38 से 12:08 राहुवास 👉 दक्षिण-पूर्व यमगण्ड 👉 15:09 से 16:39 दुर्मुहूर्त 👉 08:31 से 09:20 होमाहुति 👉 (शुक्र) 18:31 से शनि दिशाशूल 👉 पश्चिम नक्षत्र शूल 👉 ❌❌❌ अग्निवास 👉 पृथ्वी 18:43 तक चन्द्र वास 👉 पूर्व 12:43 से दक्षिण 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ ☄चौघड़िया विचार☄ 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ ॥ दिन का चौघड़िया ॥ १ - चर २ - लाभ ३ - अमृत ४ - काल ५ - शुभ ६ - रोग ७ - उद्वेग ८ - चर ॥रात्रि का चौघड़िया॥ १ - रोग २ - काल ३ - लाभ ४ - उद्वेग ५ - शुभ ६ - अमृत ७ - चर ८ - रोग नोट-- दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः स

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25 सितंबर 2020 : आपका जन्मदिन

जन्मदिन की शुभकामनाओं के साथ आपका स्वागत है vastu astro tech की विशेष प्रस्तुति में। यह कॉलम नियमित रूप से उन पाठकों के व्यक्तित्व और भविष्य के बारे में जानकारी देगा जिनका उस दिनांक को जन्मदिन होगा। पेश है दिनांक 25 को जन्मे व्यक्तियों के बारे में जानकारी : दिनांक 25 को जन्मे व्यक्ति का मूलांक 7 होगा। इस अंक से प्रभावित व्यक्ति अपने आप में कई विशेषता लिए होते हैं। यह अंक वरूण ग्रह से संचालित होता है। आप खुले दिल के व्यक्ति हैं। आपकी प्रवृत्ति जल की तरह होती है। जिस तरह जल अपनी राह स्वयं बना लेता है वैसे ही आप भी तमाम बाधाओं को पार कर अपनी मंजिल पाने में कामयाब होते हैं। आप पैनी नजर के होते हैं। किसी के मन की बात तुरंत समझने की आपमें दक्षता होती है। शुभ दिनांक : 7, 16, 25 शुभ अंक : 7, 16, 25, 34 शुभ वर्ष : 2023 ईष्टदेव : भगवान शिव तथा विष्णु शुभ रंग : सफेद, पिंक, जामुनी, मेहरून कैसा रहेगा यह वर्ष आपके कार्य में तेजी का वातावरण रहेगा। आपको प्रत्येक कार्य में जुटकर ही सफलता मिलेगी। व्यापार-व्यवसाय की स्थिति उत्तम रहेगी। अधिकारी वर्ग का सहयोग मिलेगा। नौकरीपेशा व्यक्तियों के लिए समय सुखकर रहेगा। नवीन कार्य-योजना शुरू करने से पहले केसर का लंबा तिलक लगाएं व मंदिर में पताका चढ़ाएं।

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*कष्ट निवारण के लिए

हमारे घर में ही कई ऐसी भाग्यवर्धक चीजें होती है, जिनका प्रयोग करने पर हम स्वयं अपने घर-ऑफिस आदि के नकारात्मक ऊर्जा को दूर करके सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि कर सकते हैं। ऐसे आसान उपाय जिससे हम सकारात्मक ऊर्जा का विकास कर अपने भाग्य को बदल सकते हैं, अपना भाग्य जागृत कर सकते हैं। *अगर बिना बात घर में कलह क्लेश हो,* हर काम बनते-बनते बिगड़ जाते हैं, शत्रु अकारण परेशान कर रहे हों, सेहत नहीं दे रही साथ, मान सम्मान का हो रहा हो नाश, बच्चे की बुद्धि का नहीं हो रहा विकास तो आप नवग्रह दोषों से ग्रस्त हैं. फिर तो आप जान लीजिए वो 9 उपाय जो खत्म करेगा 9 ग्रहों के दोष. ज्योतिषाचार्य ने हर ग्रह के बारे में विस्तार से बताया है. *गुरू दोष के लक्षण :* सोने की हानि, चोरी की आशंका उच्च शिक्षा की राह में बाधाएं झूठे आरोप के कारण मान-सम्मान में कमी पिता को हानि होने की आशंका उपाय: परमपिता ब्रह्मा की आराधना करें बहते पानी में बादाम, तेल, नारियल प्रवाहित करें माथे पर केसर का तिलक लगायें सोने की अंगूठी में सवा पांच रत्ती का पुखराज गुरूवार को दाएं हाथ की तर्जनी अंगुली में धारण करें पूजा स्थल की नियमित रूप से सफाई करें पीपल के पेड़ पर 7 बार पीला धागा लेपटकर जल दें 600 ग्राम पीले चने मंदिर में दान दें जुए-सट्टे की लत न पालें, मांसाहार-मद्यपान से परहेज करें कारोबार में भाई का साथ लाभकारी संबंध मधुर बनायें रखें क्रमश........ कार्य सिद्ध होगा आगे प्रभु इच्छा उपरोक्त उपाय विशेषज्ञ के निर्देश द्वारा करें, गलती होने पर आने भी हो सकती है !! क्रमश:....

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*अधिक मास की विस्तृत जानकारी*🙏🏽🌹🙏🏽🌹🙏🏽

प्र.1:-अधिक मास कब से प्रारम्भ हो रहा है? निर्णय सागर पंचांग के अनुसार, 18 सितंबर से 16 अक्टूबर तक अधिक मास रहेगा। इस माह को पुरूषोत्तम मास, अधिकमास, मलमास के नाम से भी जानते हैं। 19 वर्षों बाद इस वर्ष पितृ पक्ष और नवरात्र के बीच अधिक मास पड़ रहा है। प्र.2:-अधिक मास क्यों? और कब से प्रारम्भ हुआ,? जब हिरण्यकश्यपु नामक दैत्य ने तपस्या करने से ब्रह्मा जी से आशीर्वाद प्राप्त किया, कि मेरी मृत्यु 12 महीनों में से किसी माह में न हो, उसके बाद उसका दुष्कर्म बढ़ता चला गया और भक्त प्रहलाद को अनेकों प्रकार से प्रताड़ित कर रहा था, तब भगवान विष्णु ने 3 वर्ष के अंतराल में जाकर एक मास को बढ़ाया, तत्पश्चात हिरण्यकश्यपु का उद्धार किया, जब से ही यह अधिकमास प्रारम्भ हुआ था, और इसका महत्व बढ़ गया है, इसलिए इसमें भगवान विष्णु की पूजा विशेष महत्वपूर्ण मानी जाती है।

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*कष्ट निवारण के लिए -

हमारे घर में ही कई ऐसी भाग्यवर्धक चीजें होती है, जिनका प्रयोग करने पर हम स्वयं अपने घर-ऑफिस आदि के नकारात्मक ऊर्जा को दूर करके सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि कर सकते हैं। ऐसे आसान उपाय जिससे हम सकारात्मक ऊर्जा का विकास कर अपने भाग्य को बदल सकते हैं, अपना भाग्य जागृत कर सकते हैं। *अगर बिना बात घर में कलह क्लेश हो,* हर काम बनते-बनते बिगड़ जाते हैं, शत्रु अकारण परेशान कर रहे हों, सेहत नहीं दे रही साथ, मान सम्मान का हो रहा हो नाश, बच्चे की बुद्धि का नहीं हो रहा विकास तो आप नवग्रह दोषों से ग्रस्त हैं. फिर तो आप जान लीजिए वो 9 उपाय जो खत्म करेगा 9 ग्रहों के दोष. ज्योतिषाचार्य ने हर ग्रह के बारे में विस्तार से बताया है. *बुध दोष के लक्षण: स्वभाव में चिड़चिड़ापन जुए-सट्टे के कारण धन की बड़ी हानि दांत से जुड़े रोगों के कारण परेशानी सिर दर्द के कारण अधिक तनाव की स्थिति उपाय: मां दुर्गा की आराधना करें ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे मंत्र का 5 माला जाप करें देवी के सामने अखंड घी का दीया जलायें घर की पूर्व दिशा में लाल झंडा लगायें सोने के आभूषण धारण करें, हरे रंग से परहेज करें खाली बर्तनों को ढ़ककर न रखें चौड़े पत्ते वाले पौधे घर में लगायें, मुख्य द्वार पंचपल्लव का तोरण लगायें, 100 ग्राम चावल , चने की दाल बहते जल में प्रवाहित करें! क्रमश........ कार्य सिद्ध होगा आगे प्रभु इच्छा उपरोक्त उपाय विशेषज्ञ के निर्देश द्वारा करें, गलती होने पर आने भी हो सकती है !! क्रमश:.... कुंडली परीक्षण कराएं असली रुद्राक्ष/रत्नादि अभिमंत्रित करा कर,प्राप्त कर सकते हैं

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21 सितंबर 2020, सोमवार के शुभ मुहूर्त

आज आपका दिन मंगलमयी रहे, यही शुभकामना है। प्रस्तुत कर रही है खास आपके लिए आज के दिन के विशिष्ट मुहूर्त। अगर आप आज वाहन खरीदने का विचार कर रहे हैं या आज कोई नया व्यापार आरंभ करने जा रहे हैं तो आज के शुभ मुहूर्त में ही कार्य करें ताकि आपके कार्य सफलतापूर्वक संपन्न हो सकें। ज्योतिष एवं धर्म की दृष्टि से इन मुहूर्तों का विशेष महत्व है। मुहूर्त और चौघड़िए के आधार पर vastu astro tech आपके लिए प्रतिदिन के खास मुहूर्त की सौगात लेकर आई है। प्रस्तुत हैं आज के मुहूर्त शुभ विक्रम संवत्- 2077, हिजरी सन्- 1440-41, ईस्वी सन् -2020 अयन- दक्षिणायण मास-आश्विन (प्रथम) पक्ष- शुक्ल संवत्सर नाम- प्रमादी ऋतु-शरद वार-सोमवार तिथि (सूर्योदयकालीन)-पंचमी नक्षत्र (सूर्योदयकालीन)-विशाखा योग (सूर्योदयकालीन)-वैधृति करण (सूर्योदयकालीन)-बव लग्न (सूर्योदयकालीन)- कन्या शुभ समय- 6:00 से 7:30 तक, 9:00 से 10:30 तक, 3:31 से 6:41 तक राहु काल- प्रात: 7:30 से 9:00 बजे तक दिशा शूल-आग्नेय योगिनी वास- दक्षिण गुरु तारा-उदित शुक्र तारा-उदित चंद्र स्थिति-वृश्चिक व्रत/मुहूर्त-सर्वार्थ सिद्धि योग यात्रा शकुन- मीठा दूध पीकर यात्रा करें। आज का मंत्र-ॐ सौं सोमाय नम:। आज का उपाय-किसी विप्र को चांदी दान करें। वनस्पति तंत्र उपाय- पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं। (निवेदन-उपर्युक्त विवरण पंचांग आधारित है पंचांग भेद होने पर तिथि/मुहूर्त/समय में परिवर्तन होना संभव है।)

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18 सितंबर 2020 : आपका जन्मदिन

जन्मदिन की शुभकामनाओं के साथ आपका स्वागत है vastu astro tech की विशेष प्रस्तुति में। यह कॉलम नियमित रूप से उन पाठकों के व्यक्तित्व और भविष्य के बारे में जानकारी देगा जिनका उस दिनांक को जन्मदिन होगा। पेश है दिनांक 18 को जन्मे व्यक्तियों के बारे में जानकारी : अंक ज्योतिष का सबसे आखरी मूलांक है नौ। आपके जन्मदिन की संख्या भी नौ है। यह मूलांक भूमि पुत्र मंगल के अधिकार में रहता है। आप बेहद साहसी हैं। आपके स्वभाव में एक विशेष प्रकार की तीव्रता पाई जाती है। आप सही मायनों में उत्साह और साहस के प्रतीक हैं। मंगल ग्रहों में सेनापति माना जाता है। अत: आप में स्वाभाविक रूप से नेतृत्त्व की क्षमता पाई जाती है। लेकिन आपको बुद्धिमान नहीं माना जा सकता। मंगल के मूलांक वाले चालाक और चंचल भी होते हैं। आपको लड़ाई-झगड़ों में भी विशेष आनंद आता है। आपको विचित्र साहसिक व्यक्ति कहा जा सकता है। शुभ दिनांक : 9, 18, 27 शुभ अंक : 1, 2, 5, 9, 27, 72 शुभ वर्ष : 2025, 2036, 2045 ईष्टदेव : हनुमान जी, मां दुर्गा। शुभ रंग : लाल, केसरिया, पीला कैसा रहेगा यह वर्ष आप अपनी शक्ति का सदुपयोग कर प्रगति की और अग्रसर होंगे। पारिवारिक विवाद सुलझेंगे। महत्वपूर्ण कार्य योजनाओं में सफलता मिलेगी। अधिकार क्षेत्र में वृद्धि संभव है। नौकरी में आ रही बाधा दूर होगी। स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा। राजनैतिक व्यक्ति सफलता का स्वाद चख सकते हैं। मित्रों स्वजनों का सहयोग मिलने से प्रसन्नता रहेगी।

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*अगर नहाने के बाद बोला जाय ये मंत्र, तो दूर होती है यह 8 परेशानियां*

धर्म शास्त्रों में भगवान शिव को जगत पिता बताया गया हैं क्योंकि भगवान शिव सर्वव्यापी एवं पूर्ण ब्रह्म हैं। ‘शिव’ का अर्थ है – ‘कल्याणकारी’। ‘लिंग’ का अर्थ है – ‘सृजन’। सर्जनहार के रूप में उत्पादक शक्ति के चिन्ह के रूप में लिंग की पूजा होती है। लिंग के मूल में ब्रह्मा, मध्य में विष्णु और ऊपर प्रणवाख्य महादेव स्थित हैं। शिवपुराण में बहुत सारे मंत्रों का वर्णन किया गया है। जो मानव कल्याण के लिए बहुत प्रभावशाली हैं। मंत्र कामनापूर्ति का श्रेष्ठ साधन हैं। नहाने के बाद पश्चिम दिशा की ओर मुंह करके किया गया मंत्र जाप धन, वैभव व ऐश्वर्य की कामना को पूरी करता है। रूद्राक्ष की माला लेकर अपनी इच्छा अनुसार शिव मंत्र का जाप करें, महामृत्युंजय मंत्र के जाप से दूर होती हैं ये परेशानियां : – महामृत्युंजय मंत्र- ऊं त्रयम्बकं यजामहे, सुगन्धिं पुष्टिवर्धनं उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मोक्षिय मामृतात्। कुंडली के दोषों पर विराम लगता है जैसे मांगलिक दोष, नाड़ी दोष, कालसर्प दोष, बुरी नजर दोष, रोग, दुःस्वप्न, वैवाहिक जीवन की समस्याएं, संतान बाधा आदि। – ये मंत्र जीवन प्रदान करता है। अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है, उम्र बढ़ती है। – कठिन एवं असाध्य रोगों से मुक्ति मिलती है। यह मंत्र हर बीमारी को भगाने का बड़ा शस्त्र है। – त्वचा में गजब का आकर्षण पैदा होता है। धन-दौलत और वैभव संपन्न जीवन व्यतीत होता है। – समाज में रुतबा बढ़ता है। – निसंतान दंपत्ति को संतान की प्राप्ति होती है। – धन-हानि हो रही हो तो महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।

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सर्वपितृ अमावस्या के 5 शुभ मंत्र, पितृ होंगे प्रसन्न

सर्वपितृ अमावस्या के दिन श्राद्ध पक्ष का आखिरी दिन और पितरों का आशीष पाने का अंतिम अवसर है। हमारे धार्मिक कार्यों की पूर्णता बगैर मंत्र के नहीं होती है। श्राद्ध में भी इनका विशेष महत्व है। अत: आप भी अपने पितरों से खुशहाल जीवन का आशीर्वाद पाना चाह‍ते हैं तो निम्नलिखित मंत्रों के प्रयोग से आपकी हर मनोकामना पूर्ण हो सकती है। आइए पढ़ें सर्वपितृ अमावस्या के पांच शुभ मंत्र 1. ॐ कुलदेवतायै नम:- 21 बार 2. ॐ कुलदैव्यै नम:- 21 बार 3. ॐ नागदेवतायै नम:- 21 बार 4. ॐ पितृ देवतायै नम:- 108 बार 5. ॐ पितृ गणाय विद्महे जगतधारिणे धीमहि तन्नो पित्रो प्रचोदयात्।- 1 लाख बार। इन मंत्रों का प्रयोग कर पितरों को प्रसन्न किया जा सकता है।

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*For Happy Married Life*

Keep Matangi Yantra at place of worship and chant its Mantra 108 times daily in morning. Kreem Hreem Maatangi Hreem Kreem Swaha *सुखी वैवाहिक जीवन के लिए* श्री मातंगी यंत्र को पुजा घर मे रखो और रोज सुबह एक माला मंत्रजाप करो। क्रीं ह्रीं मातंगी ह्रीं क्रीं स्वाहा:

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*अधिक मास पर विशेष*

कालगणना अनुसार दो आश्विन मास एक शताब्दी में 19 - 19 वर्ष के अंतराल पर 5 बार होते हैं। फिर 83 वर्ष बाद दो अश्विन मास होते हैं। इस प्रकार *सन् 1880* में दो आश्विन अधिक मास हुए थे। इसके 83 वर्ष बाद *सन् 1963* में दो आश्विन अधिक मास हुए। फिर 19 वर्ष बाद *सन् 1982* में, फिर 19 वर्ष बाद *सन् 2001* में, फिर 19 वर्ष बाद *सन् 2020* में दो आश्विन मास हुए। अब 19 वर्ष बाद फिर *सन् 2039* में दो आश्विन मास होंगे। उसके 83 वर्ष बाद दो आश्विन मास होंगे। हमेशा 32 महीने 16 दिन बाद अधिक मास पुनः आता है। अधिक मास में चंद्रमास की दो अमावस्याओं के बीच मासिक सूर्य संक्रांति नहीं होती है। मात्र *9 माह* - माघ, फाल्गुन, चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद व आश्विन मास ही *अधिक मास* होते हैं। कार्तिक, मार्गशीर्ष, पौष माह कभी भी अधिक मास नहीं होते हैं। इस बार आश्विन अधिक मास *18 सितंबर* से शुरू हो रहा है, जो *16 अक्टूबर* तक रहेगा। अधिक मास को पुरुषोत्तम मास, मलमास भी कहा जाता है। इन 30 दिनों में उज्जैन स्थित सप्तसागर यात्रा का महत्व अधिक है। बृहन्नारदीय पुराण में इसका विस्तार से उल्लेख है। इस पुरुषोत्तम मास में श्रद्धा - भक्ति के साथ व्रत, उपवास, पूजा आदि शुभ कर्म करना चाहिए। यह 12 महीनों में सर्वश्रेष्ठ *पुरुषोत्तम मास* के नाम से विख्यात है।

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*घर में रखी चीजों का वास्तु के विपरीत होना बेहद अशुभ माना जाता है*

आपके घर में ऐसी कई चीजें हो सकती हैं, जो दिखने में बेहद मामूली हैं, लेकिन वास्तु के हिसाब से उसका बड़ा महत्व होता है अक्सर लोग शास्त्रों की जानकारी के अभाव में जाने-अनजाने में इन चीजों का घर में गलत जगह और गलत तरीके से इस्तेमाल करते हैं, आइए जानते हैं घर में वास्तु के हिसाब से एक छोटी सी गलती आपको कितनी भारी पड़ सकती है..... *१:-मुख्य द्वार:-* घर के मुख्य द्वार पर हमेशा अंधेरा रखना बेहद अशुभ माना जाता है, मुख्य द्वार का रंग रोगन ठीक न होना या आकर्षक न होना भी अशुभ होता है, इससे आपके जीवन में आने वाले सफलता के अवसर कम हो जाते हैं.! *२:- घर मे चित्र या पोस्टर:-* घर में किसी गलत चित्र का इस्तेमाल भी अशुभ होता है, चित्रों पर धूल जमा होना, एक साथ बहुत सारे चित्रों का लगा होना ठीक नहीं माना जाता है, इससे घर मे वाद विवाद ज्यादा होता है और रिश्ते खराब होते है.! *३:-घर मे जूते चप्पल ओर बस्त्र:-* घर मे कपड़ों और जूते चप्पलों को प्रयोग के बाद इधर-उधर फेंक देना भी अशुभ होता है, जूतों और कपड़ों की अलमारी को हमेशा अव्यस्थित रखने से धन की बर्बादी होती है, करियर में भी उतार-चढ़ाव आता रहता है.! *४:-पानी बर्बादी:-* घर में पानी की बर्बादी करना, घर की टंकियों से अनावश्यक पानी का बहना, जरूरत से ज्यादा पानी का प्रयोग भी सही नहीं है, इससे स्वास्थ्य की समस्याएं लगी रहती हैं, मानसिक रूप से कमजोरी आती है.! *५:-घर मे पुरानी बस्तुएं:-* घर मे पुराने कपड़े-जूते रखना या पुरानी अनुपयोगी चीजों को घर मे जमा करने से राहु खराब होता है, घर मे बीमारियां और चिंताएं बढ़ती हैं.! *६:-खराव बिजली की बस्तुएं:-* घर में सब जगह पर प्रकाश की व्यवस्था न होना

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