*राहु ग्रह की धारणायें*
राहु का नाम सुनते ही लोगों के मन में तरह-तरह का डर और आशंकाएं घर कर जाती हैं। ज्योतिष में 9 ग्रहों की प्रमुखता रहती है। इन्ही 9 ग्रहों में राहु को पापी ग्रह माना जाता है। राहु अशुभ फल देने वाला ग्रह माना जाता है लेकिन यह जरूरी नहीं कि यह हर समय यह अशुभ फल ही देता है बल्कि कुछ परिस्थितियों में यह शुभ फल भी देता है। राहु के शुभ फल से व्यक्ति धनवान और राजयोग का सुख भी प्राप्त करता है। सभ और अशुभ दोनो के बारे में जानते हैं * अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि, शुक्र और बुध लग्न भाव के स्वामी हैं तो राहु शुभ फल दे सकता है। राहु शुक्र, शनि और बुध का मित्र माना जाता है। * वहीं अगर कुंडली में सूर्य, चंद्र, मंगल या चंद्रमा लग्न भाव के स्वामी हैं तो राहु से अशुभ फल मिल सकते हैं। क्योंकि राहु इन ग्रहों का शत्रु है। * कुंडली के तीसरे, छठे और ग्यारहवें भाव में राहु शुभ फल देता है। * कुंडली में राहु शुभ होने पर उस व्यक्ति का स्वभाव कठोर और तेज बुद्धि वाला व्यक्ति होता है। * जिन व्यक्तियों की कुंडली में राहु शुभ जगह पर आता है वह व्यक्ति धार्मिक स्वभाव का होता है। * राहु के सकारात्मक प्रभाव से व्यक्ति अध्यात्म के क्षेत्र में आगे बढ़ने लगता है। * राहु का शुभ प्रभाव यश और सम्मान के साथ-साथ धनवान भी बना देता है। * यह राहु का ही अशुभ प्रभाव हैं कि व्यक्ति झूठ, धोखा, छल और कपट जैसी बुरी आदतों का शिकार हो जाता है। * व्यक्ति राहु के अशुभ प्रभाव से षडयंत्र और दूसरों को परेशान करने लगता है। यह ग्रह भौतिक पिंड नही है, छायावादी ग्रह है, शनि की तरह स्वभाव, शुभ ग्रहों के साथ शुभ तथा अशुभ ग्रहों के साथ अशुभ फल। मिथुन राशि में उच्च तथा धनु राशि में नीच।