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कुंवारे लड़के-लड़कियों के शीघ्र विवाह के लिए उपाय

नवरात्रि में शिव-पार्वती का एक चित्र अपने पूजास्थल में रखें और उनकी विधिवत पूजा-अर्चना करने के पश्चात निम्नलिखित मंत्र का 3, 5 अथवा 10 माला जप करें। जप के पश्चात भगवान शिव से विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करें। इस मंत्र के प्रभाव से जल्दी ही विवाह के आसार बन जाते हैं। मंत्र ऊँ शं शंकराय सकल-जन्मार्जित-पाप-विध्वंसनाय, पुरुषार्थ-चतुष्टय-लाभाय च पतिं मे देहि कुरु कुरु स्वाहा।।

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#कोरोना वायरस व ग्रहों की चाल।

#क्या है इसके वैदिक उपाय । #गोचर में जब गुरु ,शनि ग्रह, विशेष रूप से किसी बड़े ग्रहण के समय, पीड़ा में हों तब महामारी से आम जनता को कष्ट पहुंचता है। #वर्ष 2002-2003 में फैली सार्स महामारी के समय गोचर में शनि राहु से युत थे । #2009 में फैले स्वाइन फ्लू के समय राहु और गुरु की युति थी। #धनु राशि में पड़े ग्रहण के बाद चीन के वुहान शहर से फैले कोरोना वायरस ने अब वैश्विक महामारी का रूप ले लिया है। #ग्रहण के समय से लेकर अब तक जीव कारक ग्रह गुरु केतु के साथ धनु राशि में युति कर रहे हैं। #7 फरवरी से मंगल ने भी धनु राशि में डेरा जमा रखा है जिसके कारण कोरोना वायरस का प्रकोप दुनिया के 120 से अधिक देशों में बना हुआ है। #इस वैश्विक महामारी से तकरीबन 5000 लोग प्राण गवां चुके हैं। #22 मार्च की रात मंगल धनु राशि में केतु से आजाद होकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। #इसके कुछ दिन बाद ही 30 मार्च को गुरु भी केतु का साथ छोड़कर मकर राशि में प्रवेश कर जाएंगे। #इन दोनों बड़े ग्रहों का केतु की युति से मुक्त होकर मकर राशि में चले आना कोरोना वायरस के प्रकोप को कुछ कम करेगा। #भारत के लिए स्थिति विशेषरूप से राहत देने वाली होगी #लेकिन यूरोप, चीन और अमेरिका में कोरोना का असर केतु के आगामी सितंबर महीने में धनु राशि में गोचर करने तक बना रह सकता है। #कोरोना वायरस से बचाएंगे ये उपाय- #सरकार द्वारा जारी मेडिकल एडवाइजरी का पालन जरूर कीजिये । #ज्यादा से ज्यादा पानी पीएं। ठंडे पानी को एवॉइड करें, गर्म या गुनगुने पानी का सेवन करें। #महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें- 'ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिम् पुष्टिवर्धनम। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।' #प्रतिदि

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*ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जानिए किस दिन नाखून, दाढ़ी व बाल कटवाने से होता है क्या असर* . . . . ❌ *सोमवार* *सोम का संबंध चंद्रमा से है इसलिए सोमवार को बाल या नाखून काटना मानसिक स्वास्थ्य व संतान के स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं माना गया है।* ❌ *मंगलवार* *मंगलवार को बाल कटवाना व दाढ़ी बनाना उम्र कम करने वाला माना गया है।* ❌ *बुधवार* *बुधवार के दिन नाखून और बाल कटवाने से घर में बरकत रहती है व लक्ष्मी का आगमन होता है।* ❌. *गुरुवार* *गुरुवार को भगवान विष्णु का वार माना गया है। इस दिन बाल कटवाने से लक्ष्मी का नुकसान और मान-सम्मान की हानि होती है।* ❌. *शुक्रवार* *शुक्र ग्रह को ग्लैमर का प्रतीक माना गया है। इस दिन बाल और नाखून कटवाना शुभ होता है। इससे लाभ, धन और यश मिलता है।* ❌. *शनिवार* *शनिवार का दिन बाल कटवाने के लिए अशुभ होता है यह जल्दी मृत्यु का कारण माना जाता है।* ❌ *रविवार* *रविवार को बाल कटवाना अच्छा नहीं माना जाता है। महाभारत के अनुशासन पर्व में बताया गया है कि ये सूर्य का वार है इससे धन, बुद्धि और धर्म का नाश होता है।* . .

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पैसा चाहिए तो कुंडली को पहचानिए

साथियो कोई व्यक्ति अपने जीवन में कितना धनी हो पाएगा, यह उसकी कुंडली में लिखा होता है। आइए जानते हैं कुंडली में धन-योग को कैसे पहचानें? पेश है जन्म कुंडली के कुछ प्रमुख धन योग। इनमें से किसी एक योग के होने पर भी व्यक्ति को धन की प्राप्ति अवश्य होती है। * जब कुंडली के दूसरे भाव में शुभ ग्रह बैठा हो तो जातक के पास अपार पैसा रहता है। जन्म कुंडली के दूसरे भाव पर शुभ ग्रह की दृष्टि हो तब भी भरपूर धन के योग बनते हैं। * चूंकि दूसरे भाव का स्वामी यानी द्वितीयेश को धनेश माना जाता है अत: उस पर शुभ ग्रह की दृष्टि हो तब भी व्यक्ति को धन की कमी नहीं रहती। * दूसरे भाव का स्वामी यानी द्वितीयेश के साथ कोई शुभ ग्रह बैठा हो तब भी व्यक्ति के पास खूब पैसा रहता है। * जब बृहस्पति यानी गुरु कुंडली के केंद्र में स्थित हो। * बुध पर गुरु की पूर्ण दृष्टि हो। (5,7,9) * बृहस्पति लाभ भाव (ग्यारहवें भाव) में स्‍थित हो। * द्वितीयेश उच्च राशि का होकर केंद्र में बैठा हो। * लग्नेश लग्न स्थान का स्वामी जहां बैठा हो, उससे दूसरे भाव का स्वामी उच्च राशि का होकर केंद्र में बैठा हो। * धनेश व लाभेश उच्च राशिगत हों। * चंद्रमा व बृहस्पति की किसी शुभ भाव में यु‍ति हो। * बृहस्पति धनेश होकर मंगल के साथ हो। * चंद्र व मंगल दोनों एकसाथ केंद्र में हों। * चंद्र व मंगल दोनों एकसाथ त्रिकोण में हों। * चंद्र व मंगल दोनों एकसाथ लाभ भाव में हों। * लग्न से तीसरे, छठे, दसवें व ग्यारहवें भाव में शुभ ग्रह बैठे हों। * सप्तमेश दशम भाव में अपनी उच्च राशि में हो। * सप्तमेश दशम भाव में हो तथा दशमेश अपनी उच्च राशि में नवमेश के साथ हो। ज्योतिष्य उपाय एवं कुंडली की जानकारी के

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गोचर में शनि के अशुभ तथा कुंडली में पहले, चौथे, पांचवें व छठे भाव में स्थित होने की अवस्था को आर्…

गोचर में शनि के अशुभ तथा कुंडली में पहले, चौथे, पांचवें व छठे भाव में स्थित होने की अवस्था को आर्थिक हानि, कानूनी समस्या, गठिया रोग, पलकों के झड़ने, कन्या के विवाह में विलंब, आग लगने, मकान गिरने, नौकर के काम छोड़ने आदि घटनाओं का कारक माना गया है। लोहे का छल्ला अथवा कड़ा धारण करें। मछलियों को आटे की गोलियां खाने को दें। अपने भोजन का पहला कौर कौए को दें। सुनसान जगह के सतह पर सुरमा दबाएं।

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कोरोना वायरस को हराने 22 को जनता कर्फ्यू का ज्‍योतिषय पक्ष

● रविवार को राहू का नक्षत्र है। ●22 तारीख मतलब फिर से राहू। ●कोई भी वायरस इन्फेक्शन का कारक भी राहू है। तो राहू से बचने के लिए घर से न निकले। ● वास्तु में हम windchimes या मेटल को राहू का मानते है, मतलब, मेटल की आवाज राहू की है। ● 5 बजे मेटल, घंटी की आवाज होगी तो स्पेस में राहू मेनिफेस्ट हो जाएगााा ( जैसे हम डोनेशन से ग्रह की एनर्जी channelize करते है) तो उसके गलत प्रभाव से हमें तकलीफ कम होगी। ● 5 बजे का ही समय क्यों, क्योंकि उस समय राहू काल शुरू होगा। ★★★★★★★★★★★ कल २२.०३.२०२० को शतभिषा नक्षत्र रहेगा, जिसके *दशापति राहु होता* हैं सत्य है। हां कल *पांच बजे से साढ़े छः तक राहुकाल* रहेगा । २२ यानी इसका योग *४ हुआ यह राहु का मूलांक* है। ज्योतिष में राहु को जहरीला धुआं माना गया हैं। राहु सर्प हैं वह अग्नि बिशेष तौर से जिसमें हवन सामग्री ड़ली हो बर्दाश्त नहीं कर सकता। ध्वनि तंरग पर राहु का प्रभाव रहता है। महामारी का कारक है।शरीर में कान, जिह्वा, समस्त सिर तथा गले में राहु का विशेष प्रभाव रहता है। कुछ ध्वनियां है जो राहु के प्रभाव को कम कर देती हैं। वाकई कल का दिन राहु के प्रभाव को कम करने के लिए उपाय के रूप में उपयोग करना चाहिए।ध्वनि तंरग को बाधित करने के लिए प्रतिध्वनि की जा सकती है। यह एक वैज्ञानिक विधि होगी। हालांकि यह जो रहस्यमय विषाणु हैं। इसके विस्तार में केतु, मंगल एवं बृहस्पति की युति है। 🙏🙏

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#नीलम #Neelam

#मेष, वृष, तुला एवं वृश्चिक लग्न वालों को नीलम धारण करना फायदेमंद है, यह भाग्योदय करता है। #यदि जन्मकुंडली में शनि चौथे, पांचवें, दसवें या ग्यारहवें भाव में हो, तो नीलम धारण कर सकते हैं। #शनि मकर तथा कुंभ राशि का स्वामी है। अगर शनि की दोनों राशियां श्रेष्ठ भावों का प्रितिनिधत्व करती हों, तो नीलम धारण करना श्रेष्ठ होता है। #यदि जन्मकुंडली में शनि वक्री,अस्तगत या दुर्बल हो और शुभ भावों का प्रतिनिधित्व कर रहा हो तो नीलम धारण करना श्रेष्ठकर माना गया है। #जो शनि ग्रह प्रधान व्यक्ति हैं, उन्हें अवश्य ही नीलम पहनना चाहिए। #यथा सामर्थ्य कर्म करने वालों के लिए नीलम हर समय उपयोगी माना जाता है। #आप के लिए नीलम बना है कि नहीं। #आप इस महारत्न का उपयोग कर सकते हैं कि नही ।

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💢🏵#वर्तमान_आपातकालीन_परिवेश_में_ग्रहों_को_मजबूत_करने_के_तरीके🏵💢

#सूर्य को मजबूत करने के लिए सरकार के नियमों का पालन करें. #चंद्र को मजबूत करने के लिए एकांत में बैठकर ध्यान करें. #मंगल को मजबूत करने के लिए व्यायाम करें और खूब हंसे. #बुध को मजबूत करने के लिए मौन रहे और प्रोटीन युक्त सामान खाएं. #गुरु को मजबूत करने के लिए किताब पढें और भोजन शुद्ध करें. #शुक्र को मजबूत करने के लिए गंदगी दूर करके साफ सफाई से रहें. #शनि को मजबूत करने के लिए यथासम्भव लोगों को मदद करें. #राहू को मजबूत करने के लिए इंटरनेट का सदुपयोग करें, अफवाहें न फैलाएं #केतु को मजबूत करने के लिए व्यर्थ की राजनीति छोड़ आत्मचिंतन करें. फोटो जैसे ही निखारें आपका व्यक्तित्व। इन छोटे छोटे उपायों से चमत्कार तो नहीं होते, परन्तु जीवन में बेहतरी अवश्य आती है.. 🌹🙏🙏🙏🌹

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HUSBAND AND WIFE, WHO ARE MADE FOR EACH OTHER

Lagnathipathi indicates the native and the seventh lord indicates spouse. Compatibility between the couple is said to be there only when they are both physically and mentally happy in a relationship. When Lagnathipathi and seventh lord is place together in same rashi or they are placed in nearby rashis without having any planets in between, then exists good understanding and compatibility between the couples. Rules 1. Lagnathipathi and seventh lord in same sign, without any planets between them. 2. Lagnathipathi and seventh lord are placed in successive signs without any planets hemmed between them 3. When Lagnathipathi and seventh lord are placed in same rashi, if lagna lord is in lower degrees and seventh lord in higher degrees, then the native will love the spouse and after the spouse 4. When Lagnathipathi and seventh lord are placed in same rashi and lagna lord is in higher degrees and seventh lord in lower degrees, then spouse will be after him and show lot of care towards the native. 5. When Lagnathipathi and seventh lord are placed in successive signs and seventh lord is placed in succeeding sign to Lagnathipathi, then native is after spouse and then will show lot of care towards spouse. 6. When Lagnathipathi and seventh lord are placed in successive signs and seventh lord is in preceding sign to Lagnathipathi, then spouse is after the native and will take lot of care of the native.

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*कुंडली ओर इनकम* शुक्र और राहु किसी भी तरह के धन ,मोह , माया , आकर्षण का क्षेत्र होता है यह व्यक्ति की न सिर्फ भावना जबकि चाहत ओर दुनियादारी वाला रसिकता का जीवन देता है - ज्योतिष के अनुसार दक्षिण दिशा धन और पश्चिम दिशा इच्छा पूर्ति का सोर्स होता है वास्तु से देखे तो *दक्षिण ओर पश्चिम में आने वाला नैऋव्य कोंण यह राहु का होता है* जो अकेला कुंडली मे धन और इच्छापूर्ति का हब बनकर सामने आता है......राहु को बनाने वाला *शुक्र सोर्स ऑफ इनकम बताता है* यह धन कमाने की चाहत को बताता है । धन कमाने के लिए बढ़ते क्रम में बनाये जाने वाले कॉम्बो 3 , 6 , 10 & 11 यह किसी भी व्यक्ति के कमाई को बताता है 3 - स्मार्ट वर्क 6 - हार्ड वर्क 10 - कैरिअर (केंद्र भाव) 11 - इनकम (इच्छापूर्ति) Kp में जितना महत्व कारक भाव का होता है उतना ही महत्व नाड़ी में कारक ग्रह का होता है और 📗📔📕📒📘

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पैसा चाहिए तो कुंडली को पहचानिए

साथियो कोई व्यक्ति अपने जीवन में कितना धनी हो पाएगा, यह उसकी कुंडली में लिखा होता है। आइए जानते हैं कुंडली में धन-योग को कैसे पहचानें? पेश है जन्म कुंडली के कुछ प्रमुख धन योग। इनमें से किसी एक योग के होने पर भी व्यक्ति को धन की प्राप्ति अवश्य होती है। * जब कुंडली के दूसरे भाव में शुभ ग्रह बैठा हो तो जातक के पास अपार पैसा रहता है। जन्म कुंडली के दूसरे भाव पर शुभ ग्रह की दृष्टि हो तब भी भरपूर धन के योग बनते हैं। * चूंकि दूसरे भाव का स्वामी यानी द्वितीयेश को धनेश माना जाता है अत: उस पर शुभ ग्रह की दृष्टि हो तब भी व्यक्ति को धन की कमी नहीं रहती। * दूसरे भाव का स्वामी यानी द्वितीयेश के साथ कोई शुभ ग्रह बैठा हो तब भी व्यक्ति के पास खूब पैसा रहता है। * जब बृहस्पति यानी गुरु कुंडली के केंद्र में स्थित हो। * बुध पर गुरु की पूर्ण दृष्टि हो। (5,7,9) * बृहस्पति लाभ भाव (ग्यारहवें भाव) में स्‍थित हो। * द्वितीयेश उच्च राशि का होकर केंद्र में बैठा हो। * लग्नेश लग्न स्थान का स्वामी जहां बैठा हो, उससे दूसरे भाव का स्वामी उच्च राशि का होकर केंद्र में बैठा हो। * धनेश व लाभेश उच्च राशिगत हों। * चंद्रमा व बृहस्पति की किसी शुभ भाव में यु‍ति हो। * बृहस्पति धनेश होकर मंगल के साथ हो। * चंद्र व मंगल दोनों एकसाथ केंद्र में हों। * चंद्र व मंगल दोनों एकसाथ त्रिकोण में हों। * चंद्र व मंगल दोनों एकसाथ लाभ भाव में हों। * लग्न से तीसरे, छठे, दसवें व ग्यारहवें भाव में शुभ ग्रह बैठे हों। * सप्तमेश दशम भाव में अपनी उच्च राशि में हो। * सप्तमेश दशम भाव में हो तथा दशमेश अपनी उच्च राशि में नवमेश के साथ हो। ज्योतिष्य उपाय एवं कुंडली की जानकारी के

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गोचर में शनि के अशुभ तथा कुंडली में पहले, चौथे, पांचवें व छठे भाव में स्थित होने की अवस्था को आर्…

गोचर में शनि के अशुभ तथा कुंडली में पहले, चौथे, पांचवें व छठे भाव में स्थित होने की अवस्था को आर्थिक हानि, कानूनी समस्या, गठिया रोग, पलकों के झड़ने, कन्या के विवाह में विलंब, आग लगने, मकान गिरने, नौकर के काम छोड़ने आदि घटनाओं का कारक माना गया है। लोहे का छल्ला अथवा कड़ा धारण करें। मछलियों को आटे की गोलियां खाने को दें। अपने भोजन का पहला कौर कौए को दें। सुनसान जगह के सतह पर सुरमा दबाएं।

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