*आज चंद्रमा धनिष्ठा नक्षत्र में है*
💠💠💠💠💠💠 आठ वसु देवता जो कि प्रकाश ,ऊर्जा ,वायु ,जल ,पृथ्वी, चंद्र ,सूर्य, ध्रुव और आकाश के देवता है तथा जीवन को सभी मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति प्रचुरता और बहुतायत में करते हैं, ये धनिष्ठा नक्षत्र के स्वामी है। यह पृथ्वी तत्व के भी देव है अतः सब कुछ प्रचुरता में स्थायित्व के साथ प्रदान करते हैं सभी भौतिक सुविधाएं और प्रसिद्धि भी। धनिष्ठा नक्षत्र को इनसे ऊर्जा भी बहुतायत में प्राप्त होती है इसलिए धनिष्ठा नक्षत्र के लोग धनी भी होते हैं अर्थात वह अपनी ऊर्जा और शक्तियों को ज्ञान , धन ,शक्ति और प्रसिद्धि प्राप्त करने में लगाते हैं। *धनिष्ठा नक्षत्र, शनि के स्वामित्व की मकर और कुंभ राशि में आता है* और इसका स्वामी मंगल है, अतः इस नक्षत्र में जन्मे लोगो में धैर्य और हिम्मत दोनों बहुतायत में होती है। इस नक्षत्र का चिन्ह है मृदंग, इस नक्षत्र से जुड़े लोगों में संगीत और नृत्य में गहरी रुचि होती है और उसकी समझ भी। शक्ति और ज्ञान का संगम होने की वजह से इस नक्षत्र के जातक खेल के क्षेत्र में भी आगे रहते है या रुचि रखते है। जीवन में सफलता के लिए इस नक्षत्र में जन्मे लोगो ने हमेशा अपने स्वभाव में ज्ञान, शक्ति और संयम का संतुलन रखना चाहिए। मुहूर्त शास्त्र के अनुसार *ये नक्षत्र भूमि, भवन संबंधित कार्य और यात्रा की शुरुआत के लिए उत्तम होता है*, इसके अलावा नृत्य, संगीत या खेल की प्रतिस्पर्धा आयोजित करने के लिए भी उत्तम होता है।इस नक्षत्र के दिन किसी भी प्रकार का धार्मिक आयोजन ,धन का आदान-प्रदान ,ध्यान साधना या व्यायाम ,चिकित्सकीय कार्य , गहने खरीदने का कार्य भी किया जाना चाहिए परन्तु विवाह कार्य और साझेदारी की शुरुआत लिए ये नक्षत्र बिल्कुल उत्तम नहीं