#कुंडली_अनुसार_बाधक_ग्रह-
कुंडली में बाधक ग्रह वो होते हैं जो किसी भी कार्य को बिना बाधा के पूरा नही होने देते चाहे वह कुंडली अनुसार सुभ ही क्यों न हों । सुभ ग्रह बाधक होने पर सफलता तो मिलती है लेकिन काफी संघर्ष के बाद ,और असुभ् ग्रह साथ में बाधक भी हों तो सफलता में काफी रुकावटें आती हैं। कुंडली अनुसार #चर लग्न में 11भाव का स्वामी , #स्थिर लग्न में 9 भाव का स्वामी, #द्विस्वभाव् लग्न में 7 भाव का स्वामी ग्रह बाधक ग्रह होते हैं कोई भी थोड़ी जानकारी से कुंडली में बाधक ग्रह की पहचान कर सकता है। मेष कर्क तुला और मकर लग्न वालों के लिए 11 घर का स्वामी वृषभ सिंह वऋषिक और कुम्भ लग्न वालों के लिए 9 भाव का स्वामी मिथुन कन्या धनु और मीन लग्न वालों के लिए 7 भाव का स्वामी
किसी भी लग्न के लिए जो भाव बाधक होते है यदि वहा भाव के स्वामी के अलावा। कोई दूसरा ग्रह बैठा हो तो वो ही बाधक बनेगा ।
यदि बाधक भाव खाली है तो उस भाव का स्वामी बाधक होगा ।
विरोधाभाष ये की वृष्चिक लग्न में भाग्य का स्वामी चंद्र ही बाधक । उपाय मोती पहने ।