गुरु खाना नंबर 6 पर कुछ लिखने की कोशिश करता हू . 6 वा घर बुध का है और केतु का भी इस घर पर प्रभा…
गुरु खाना नंबर 6 पर कुछ लिखने की कोशिश करता हू . 6 वा घर बुध का है और केतु का भी इस घर पर प्रभाव है, बुध बृहस्पति केतु इन तीनों का इस घर में मिलाजुला प्रभाव होगा यदि केतु (दरवेश मांगने वाला बृहस्पति साधु) दोनों उत्तम तो ऐसे व्यक्ति को जीवन में कई चीजें बिना मांगे या बिना मेहनत किए ही प्राप्त हो जाती है उसे अपने जीवन में धन कमाने के लिए विशेष मेहनत करने की जरूरत नहीं पड़ती मतलब कि ऐसे जातक की आई चलाई अपने आप चलती रहती है ऐसा जातक मुफ्त खोर साधु स्वभाव का होता है यदि छठे गूरू के समय केतु बारहवें घर में होगा तो गुरू को शुभ कर देगा ऐसे व्यक्ति के नानके खानदान के लोग आर्थिक स्थिति में अच्छे होंगे, गुरू छठे के समय यदि खाना नंबर 10 में शनि हो तो जातक अपनी आर्थिक स्थिति उत्तम होगी, गुरू के साथ सूर्य भी इस घर में हो तो दोनों का अपना अपना प्रभाव होगा परंतु बुढ़ापे में व्यक्ति को इन दोनों का शुभ फल प्राप्त होगा , ऐसे व्यक्ति को रोटी के लिए मेहनत करने की आवश्यकता ना होगी यदि उसके घर में हजारों मेहमान भी आ जाए तो भी उन को रोटी खिलाने की ताकत रखता होगा परंतु नगद माया के लिए मारा मारा फिरता होगा ,छठे घर में गुरू कुटिया में बैठे साधू की तरह है जिसके पास मन की शांति तो होगी लेकिन ठाठ बाठ नहीं होगा ,जब केतू उत्तम हो चाल चलन भी जातक का नेक होने पर मामा तरककी करते हैं, जातक की जन्म वक्त जो जो खुद पैसे मे आगे बड़े जो जो तो मामा खानदान तरक्की करें ,अब बात करते हैं गुरु मंदे की छठे घर को पताल माना गया है यहां बैठा गुरू अच्छा फल नहीं देता और यह पिता-पुत्र के लिए भी ठीक नहीं होता ,ऐसा व्यक्ति खुद भी जिस्मानी पहलू से कमजोर रहता है ,यह कमजोरी पाचन शक्ति के ऊपर विशेष प्रभाव रहता है