Skip to content
Ahmedabad, Gujarat, 380006

Business hours

Astrologer Rajeev patel

Monday
9am-5pm
Tuesday
9am-5pm
Wednesday
9am-5pm
Thursday
9am-5pm
Friday
9am-5pm
Saturday
9am-5pm
Sunday
9am-5pm

You can anytime during the day with your query.

9898745868

*शुभ कार्य करने के लिये अशुभ योगों का त्याग (भाग 2)*

🌼🍂🌼🍂🌼🍂🌼🍂🌼🍂🌼🍂🌼🍂🌼 शुभाशुभ कर्मो अथवा दैनिक कार्यो में भी मुहूर्त साधना प्राचीन परंपरा रही है इससे मनुष्य भविष्य में होने वाली अशुभ घटनाओं से बच सकता है। कुछ प्रमुख अशुभ योग का विवरण दिया जा रहा है यह आपके लिए अवश्य लाभदायक रहेगा।

कुयोग👉 (अशुभ) वार, तिथि एवं नक्षत्रों के संयोग से अथवा केवल नक्षत्र के आधार पर कुछ ऐसे अशुभ योग बनते हैं जिन्हें, कुयोग कहा जा सकता है। इन कुयोगों में कोई शुभ कार्य प्रारंभ किया जाए तो वह सफल नहीं होता अपितु उसमें हानि, कष्ट एवं भारी संकट का सामना करना पड़ता है। कुयोग-सुयोग: यदि किन्हीं कारणों से एक कुयोग तथा एक सुयोग एक ही दिन पड़ जाए तो भी उस दिन को त्याग देना चाहिये ।

दग्ध नक्षत्र👉 रविवार को भरणी, सोमवार को चित्रा, मंगलवार को उत्तराषाढ़ा, बुधवार को धनिष्ठा, गुरुवार को उत्तरा फाल्गुनी, शुक्रवार को ज्येष्ठा, शनिवार को रेवती नक्षत्र दग्ध नक्षत्र कहलाते हैं। इनमें कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाना चाहिए।

मास-शून्य नक्षत्र👉 चैत्र में अश्विनी और रोहिणी, वैशाख में चित्रा और स्वाति, ज्येष्ठ में उत्तराषाढ़ा और पुष्य, आषाढ़ में पूर्वा फाल्गुनी और धनिष्ठा, श्रवण में उत्तराषाढा़ और श्रवण, भाद्रपद में शतभिषा और रेवती, अश्विनी में पूर्वा भाद्रपद, कार्तिक में कृतिका और मघा, मार्गशीर्ष में चित्रा और विशाखा, पौष में आर्द्रा और अश्विनी, माघ में श्रवण और मूल तथा फाल्गुन में भरणी और ज्येष्ठा मास-शून्य नक्षत्र होते हैं। इनमें शुभ कार्य करने से धन नाश होता है।

Next posts