केतु ग्रह = [ KETU PLANET ]
🚩🚩🚩 👉 केतु की बात करे तो ये छाया ग्रह है इसका जन्म भगवान विष्णु के हाथ से हुआ है क्योंकि राहु ने अमृत पान किया था तब केतु धड़ कहलाया , वहीं आकाश मंडल में केतु का प्रभाव वायव्य कोण में माना गया है केतु की कुछ विशेष परिस्थितियों के कारण जातक यश के शिखर तक पहुंच सकता है। -
यह आध्यात्मिक ग्रह है वैसे क्रूर ग्रह है यह मंगल के समान ही है जैसे चोट लगनी ,एक्सीडेंट , आदि से कष्ट देता है इसकी महादशा 7 वर्ष की होती है जहां यह हो उस भाव से अलग करने की चेष्ठा करता है हमेसा हर भाव मे केतु क्या फल देगा यह देखते है 👉लग्न = जातक के लग्न में केतु होगा तो स्वभाव में थोड़ी गर्मी होगी , थोड़ा वैवाहिक सुख में भी कमी करेगा 👉 दूसरे = जातक झूठ बोलेगा , खट्टी चीजे अधिक पसन्द होगी , अपनी दशा में गुप्त रोग देगा 👉तीसरे = यह केतु के लिए सबसे अच्छी जगह है जातक बहुत ही साहसी होगा , अपनी दशा अंतर्दशा में केतु राजयोग देगा 👉चतुर्थ = इस भाव माता के सुख में कमी , माँ को स्वास्थ्य सम्बंधित दिक्कत , घर मे प्रेत पीड़ा , जातक का खुद का मन भी शांत नही रहेगा , 👉पंचम = इस भाव मे केतु यदि पंचमेश कमजोर हो गर्भपात करवा देता है बुद्धि में तर्क वितर्क की अच्छी शक्ती होगी , 👉ष्टम = इस भाव मे केतु अपनी दशा मे चोट आदि देता है और रोग की बात करे तो रोग होगा वो शरीर के अंदर कोई भी जख्म हो सकता है 👉 सप्तम = इस भाव मे केतु पत्नी ज्यादा समझदार नही मिलती , वैवाहिक सूख में कमी देगा ,क्योंकि लग्न में राहु भी होगा , 👉 अष्टम = इस भाव मे अपनी दशा आदि में चोट देगा , गुप्त रोग अष्टम केतु वालो को बवासीर एक बार जरूर होती है 👉नवम = इस भाव में केतु भाग्य में अड़चन डालेगा