RAMAYANA JYOTISH -- रामायण ज्योतिष सिर्फ ज्योतिष सीखने की कला ही नही अपने आप को जानने का एक बेहतर…
RAMAYANA JYOTISH -- रामायण ज्योतिष सिर्फ ज्योतिष सीखने की कला ही नही अपने आप को जानने का एक बेहतरीन हुनर है आइये रामायण से ज्योतिष का आनंद और अनुभव लेवे.............*
*केतु (हनुमान) -* केतु क्या है केतु अलगाव देना , मोक्ष देना , एक सेवा भाव रखना , दुनियादारी से बिल्कुल बाहर , सबसे बड़ा विस्फोटक ग्रह जो किसी के भी साथ रहे उस की ताकत में 4 गुना इजाफा हो जाये केतु के पास कही रहस्य है लेकिन वह रहस्य वही जान पाता है जो दुनियादारी से विछोह कर लेता है किसी तरह का कोई मोह नही भोतिक जीवन से वह सिर्फ अंदर ही अंदर चलता जाए किसी तरह का दिखावा पसन्द नही जिसका विस्तार दुनियादारी से बाहर है जो राहु का बिल्कुल विपरीत है भोतिक जीवन के बाहर एक उच्च स्तरीय विस्तार और जीवन की महत्वपूर्ण सच्चाई पंचतत्व के बाद का रहस्य , *जो भोतिक जीवन समाप्त होने के बाद शुरु होता है वही केतु कहलाता है* वास्तव में केतु के पाया कोई माया नही है माया पति को केतु अपने अन्दर हृदय में रखता है जो समस्त प्रकार की माया का निर्माता है वह केतु के ह्रदय में वास करता है राहु माया का प्रयोग छल बल से करने वाला विद्वान था और केतु मायापति को दिल मे बसाने वाला एक सामान्य जीवन जीने वाला सच्चा हृदय का मासूम एक भक्त कहलाता है जो अपने स्वामी के लिए आग की नदी है , जोश है , विस्फ़ोट है कुछ भी रूप ले सकता है वही केतु की शक्तियां है *जिसको कोई माया मात न दे सके वह ओर कोई भी नही हनुमान है जिनके ह्रदय में सियाराम की जोड़ी बैठी है जो मायापति को दिल मे बसाकर को चल रहे है यह केतु कोई और दूसरा नही है हनुमान का साक्षात स्वरूप है* जो मायापति जिनसे माया बनी है रावण में उस माया को प्राप्त करके अभिमान किया था केतु ने भी ठीक वही किया था