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Fresh stories, announcements and offers about Astrologer, straight from our business.

*आज का पंचांग और राशिफल*

*22-जुलाई - 2020 , बुधवार* ➖➖➖➖➖➖➖➖➖🙏 *22-जुलाई-2020* *वार:- बुधवार* *माह:-श्रावण* *पक्ष :-शुक्लपक्ष* *तिथी :-द्वितीया-7:37 पी एम* *नक्षत्र:- अश्लेशा -7:31 पी एम*  *योग:- सिद्धि - 03:11 पी एम* *प्रथम करण:-बालव- 8:40 ए एम तक* *द्वितीय करण-कौलव* *चन्द्रमा:- कर्क* *सूर्योदय:-05:21* *सूर्यास्त:- 18:59* *दिशाशूल:- उत्तर* *ऋतु :-वर्षा ऋतु* *गुलीक काल:- 10:28 ए एम से 12:10 पी एम* *राहू काल:- 12:10 पी एम से 1:52 पी एम* *अभीजित:- कोई नहीं* *विक्रम सम्वत ........2077* *शक सम्वत .......... 1942* *संवत्सर नाम .........प्रमादी* =================== *🌞दिन का चौघड़िया🌞* ➖➖➖➖➖➖➖➖➖ *लाभ - 05:21 ए एम से 07:04 ए एम* *अमृत - 07:04 ए एम से 08:46 ए एम* *शुभ - 10:28 ए एम से 12:10 पी एम* *चंचल- 03:34 पी एम से 05:17 पी एम* *🌙रात्रि का चौघड़िया* ➖➖➖➖➖➖➖➖➖ *शुभ:- 08:17 पी एम से 09:34 पी एम* *अमृत: - 09:34 पी एम से 10:52 पी एम* चंचल:- 10:52 पी *एम से 12:10 ए एम,जुलाई 23* *लाभ:- 02:46 ए एम से 04:04 ए एम,जुलाई 23* 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ *१-मेष:* *आकस्मिक धन हानि के योग बन रहे हैं। लोग आपकी बुद्धिमत्ता और कार्यकुशलता पर सन्देह करेंगे। परिवार का माहौल अच्छा रहेगा। आपका जिद्दी स्वभाव सम्बन्धों को कमजोर कर सकता है। शाम के बाद स्थिति कुछ अच्छी होगी।* *२-वृषभ:* *एक साथ कई सारे काम करने से एकाग्रता प्रभावित होगी। महत्वपूर्ण कारोबारी योजना बना सकते हैं। बच्चों के साथ मनोरंजन भरा समय व्यतीत होगा। अचल सम्पत्ति की प्राप्ति हो सकती है। व्यवसायिक यात्रा होने के योग बन रहे हैं।* *३-मिथुन:* *आपकी सेहत काफी अच्छी रहेगी। शाम को कोई बेहतरीन सूचना मिल सकती है। किसी परिजन की आर्थिक सहायता करनी

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*आज का पंचांग और राशिफल*

*23-जुलाई -2020 , गुरुवार* 🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🙏 *23-जुलाई-2020* *वार:- गुरुवार* *माह:-श्रावण* *पक्ष :-शुक्लपक्ष* *तिथी :-तृतीया-5:18 पी एम तक तत्पश्चात-चतुर्थी* *नक्षत्र:- मघा - 05:59 पी एम तक* *योग:- व्यतीपात - 12:18 पी एम* *प्रथम करण:-तैतिल -06:29 ए एम तक* *द्वितीय करण-गर* *चन्द्रमा:- सिंह* *सूर्योदय:-05:22* *सूर्यास्त:- 18:58* *दिशाशूल:- दक्षिण* *ऋतु :-वर्षा ऋतु* *गुलीक काल:8:46 ए एम से 10:28 ए एम* *राहू काल:- 01:52 पी एम से 03:34 पी एम* *अभीजित:- 11:43 ए एम से 12:37 पी एम* *विक्रम सम्वत ........2077* *शक सम्वत .......... 1942* *संवत्सर नाम .........प्रमादी* =================== *🌞दिन का चौघड़िया🌞* ➖➖➖➖➖➖➖➖ *शुभ - 05:22 ए एम से 07:04 ए एम* *चंचल- 10:28 ए एम से 12:10 पी एम* *लाभ - 12:10 पी एम से 01:52 पी एम* *अमृत - 01:52 पी एम से 03:34 पी एम* *🌙रात्रि का चौघड़िया* ➖➖➖➖➖➖➖➖ *अमृत: - 06:58 पी एम से 08:16 पी एम* *चंचल:- 08:16 पी एम से 09:34 पी एम* *लाभ:- 12:10 ए एम से 01:28 ए एम,जुलाई 24* *शुभ:- 02:46 ए एम से 04:05 ए एम,जुलाई 24* 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ *१-मेष:* *अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करेंगे। निःसन्तान दम्पत्तियों को आज गर्भधारण में सफलता मिल सकती है। परिवार का माहौल बहुत ही अच्छा रहेगा। आपकी योजना सफल होगी। कार्यक्षेत्र में कोई आपको प्रपोज कर सकता है।* *२-वृषभ:* *पारिवारिक तनाव समाप्त होगा। कानूनी मामले आपकी समस्या बढ़ा सकते हैं। दूसरों पर अपनी बातों को थोपने के बजाय उनके विचारों को भी महत्व दें। भीड़-भाड़ वाली जगह या सामाजिक समारोह में जाने से बचें। महँगी वस्तुओं की खरीदी कर सकते हैं।*

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*पढ़ाई और वास्तु*:-

यदि आपका बच्चा पढ़ाई में कमजोर है या पढ़ाई पर ध्यान नहीं देता है तो आप अपने घर के *वेस्ट साउथ वेस्ट*(WSW) दिशा में उसका स्टडी रूम बना दे! वहां बैठकर पढ़ने से धीरे-धीरे बच्चे का मन पढ़ाई में लगने लगेगा और बच्चा पढ़ाई में तेज भी हो जाएगा!

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जन्म कुंडली में कालसर्प दोष का बहुत बुरा असर होता है और जीवन बर्बाद हो जाता है ...

सामान्य प्रचलित धारणा के अनुसार यदि कुंडली में सात ग्रह (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि) जब राहू-केतु के बीच स्थित हो जाते हैं तो कालसर्प योग माना जाता है या बनता है। सामान्यत: यदि किसी जातक (व्यक्ति) की जन्मकुंडली में कालसर्प योग होता है तो उसे जिंदगी भर संघर्ष और कठिनाई से गुजरना पड़ता है। व्यक्ति को जिंदगी भर काम काज, स्वास्थ्य, नौकरी, व्यवसाय से संबंधित परेशानी का सामना करना पड़ता है और ऐसी परिस्थिति में उसे ज्योर्तिविद कालसर्प योग/दोष पूजा की सलाह देते हैं लेकिन 90 प्रतिशत जातक कहते हैं कि पूजा से लाभ नहीं हुआ और जीवन में संघर्ष बरकरार है और वे इसका कारण समझ नहीं पाते हैं। इसका प्रमुख कारण होता है व्यक्ति की जन्मकुंडली में कालसर्प योग होने की वजह से उत्पन्न हुआ उसके घर में वास्तु दोष। कालसर्प योग की वजह से घर में निम्नलिखित वास्तु दोष पाए जाते हैं- घर का मुख्य द्वार दक्षिण या दक्षिण पूर्व के बीच होना, उत्तर पूर्व के बीच होना, पश्चिम-उत्तर में होना। घर के नार्थ ईस्ट में शौचालय, किचन, सीढ़िया या उत्तर पूर्व का कटा होना। दक्षिण-पश्चिम में शौचालय का होना और साऊथ का नीचा होना या पूजा घर गलत जगह पर होना। साथ-साथ ही ब्रह्म स्थान में भी वास्तुदोष होना। जब कोई व्यक्ति घर खरीदता है या किराए पर घर लेता है तो उस व्यक्ति को घर उसके ग्रहों के अनुसार ही मिलते हैं यानी अगर जन्म कुंडली में ग्रह की स्थिति खराब है तो उसके घर में वास्तुदोष निश्चित ही पाए जाते हैं।

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*आज का नक्षत्र*

*पुनर्वसु नक्षत्र* बुध की राशि मिथुन और चंद्रमा की राशि कर्क में आने वाला गुरु के स्वामित्व का नक्षत्र पुनर्वसु, इस नक्षत्र की इष्ट देवता है अदिति और चिन्ह है तीर और धनुष। नई शुरुआत , स्वच्छता और अच्छाई का नक्षत्र पुनर्वसु। धनुष और बाण का मतलब है बुराई के साथ एक युद्ध और अच्छाई की शुरुआत, पुनर्वसु नक्षत्र अध्यात्म के ज्ञान का दिव्य प्रकाश कहलाता है जिससे अज्ञान का अंधेरा समाप्त होता है, ज्ञान , सत्य और धर्म का शांति प्रदान करता है पुनर्वसु , जो इस नक्षत्र में जन्म लेते हैं। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले लोग अपने नैतिक मूल्य, सिद्धांतों और संस्कारों से बंधे होते है। परिस्थिति विशेष के चलते अगर अपनी राह से ऐसे लोग भटक भी जाते हैं पुनः अपने मार्ग पर लौट आते हैं, इस नक्षत्र की इष्ट देवी अदिति जातकों को रचनात्मक ज्ञान का भंडार प्रदान करती है। अदिति पृथ्वी तत्व की देवी है जो सब कुछ बहुतायत में देती है, अतः इस नक्षत्र में जन्मे लोगो में धन की कभी कमी नहीं होती। ये लोग आजादी और तरक्की पसंद करते है तथा अपने धन कमाना इनके नैसर्गिक गुणों में शामिल होता है। गुरु और बुध के स्वामित्व की वजह से इस नक्षत्र के जातक वाक पटू हो कर संवाद कला में निपुण होते है, अपनी वाणी के दम पर ये किसी को भी आकर्षित करने की काबिलियत रखते है। धनुष पर चढ़े बाण का एक अर्थ ये भी होता की अपनी बुद्धि बल से सफल परियोजनाओं की शुरुआत करना। भगवान श्री रामचंद्र जी का जन्म नक्षत्र भी पुनर्वसु ही था, किस प्रकार से वो न सिर्फ अज्ञान के अंधेरे को बल्कि अधर्म को भी समाप्त करने की लड़ाई लड़ते रहे। रामेश्वरम में शिवलिंग की स्थापना भी भगवान राम ने अपने जन्म नक्षत्र पुनर्वसु के दिन ही की थी।

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*कष्ट निवारण के लिए

हमारे घर में ही कई ऐसी भाग्यवर्धक चीजें होती है, जिनका प्रयोग करने पर हम स्वयं अपने घर-ऑफिस आदि के नकारात्मक ऊर्जा को दूर करके सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि कर सकते हैं। ऐसे आसान उपाय जिससे हम सकारात्मक ऊर्जा का विकास कर अपने भाग्य को बदल सकते हैं, अपना भाग्य जागृत कर सकते हैं। *बदन दर्द हो* तो मंगलवार को हनुमान जी के चरणों में सिक्का चढ़ाकर उसमें लगी सिंदूर का तिलक करें। • पानी पीते समय यदि गिलास में पानी बच जाए, तो उसे अनादर के साथ फेंकें नहीं, गिलास में ही रहने दें। फेंकने से मानसिक अशांति होगी क्योंकि पानी चंद्रमा का कारक है। कार्य सिद्ध होगा। आगे प्रभु इच्छा! उपरोक्त उपाय विशेषज्ञ के निर्देश द्वारा करें, गलती होने पर हानि भी हो सकती है! !

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*आज का पंचांग और राशिफल*

*21-जुलाई - 2020 , मंगलवार* ➖➖➖➖➖➖➖➖➖🙏 *21-जुलाई-2020* *वार:- मंगलवार* *माह:-श्रावण* *पक्ष :-शुक्लपक्ष* *तिथी :-प्रतिपदा-9:39 पी एम* *नक्षत्र:-पुष्य -08:45 पी एम* *योग:-वज्र -5:50 पी एम* *प्रथम करण:- किंस्तुघ्न -* *10:31 ए एम तक* *द्वितीय करण-बव-* *चन्द्रमा:- कर्क* *सूर्योदय:-05:21* *सूर्यास्त:- 18:59* *दिशाशूल:- उत्तर* *ऋतु :-वर्षा ऋतु* *गुलीक काल:-12:10 पी एम से 1:52 पी एम* *राहू काल:-03:35 पी एम से 05:17 पी एम* *अभीजित:-11:42 ए एम से 12:37 पी एम* *विक्रम सम्वत ........2077* *शक सम्वत .......... 1942* *संवत्सर नाम .......प्रमादी* =================== *🌞दिन का चौघड़िया🌞* ➖➖➖➖➖➖➖➖➖ *चंचल- 08:46 ए एम से 10:28 ए एम* *लाभ - 10:28 ए एम से 12:10 पी एम* *अमृत - 12:10 पी एम से 01:52 पी एम* *शुभ - 03:35 पी एम से 05:17 पी एम* *🌙रात्रि का चौघड़िया* ➖➖➖➖➖➖➖➖➖ *लाभ:- 08:17 पी एम से 09:35 पी एम* *शुभ:- 10:53 पी एम से 12:10 ए एम,जुलाई 22* *अमृत: -12:10 ए एम से 1:28 ए एम,जुलाई 22* *चंचल:- 01:28 ए एम से 2:46 ए एम,जुलाई 22* 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ *१-मेष:* *आज सुबह से ही किसी नई सोच को लेकर आपके अन्दर नई शक्ति और उर्जा का संचार होगा। सितारे आप परमेहरबान रहेंगे। दिन के महत्व को समझें और लाभ के अवसर हाथ से ना जाने दें भाग्य 98 प्रतिशत साथ देगा।* *२-वृषभ:* *दिन आपका व्यस्ततापूर्वक बीतेगा। प्रयास कीजिए आज अधूरे कार्य पूर्ण करने में सफल होंगे। व्यवसाय में लाभ मिलेगा और नौकरी में आपका प्रभाव और महत्व बढ़ेगा। सामाजिक क्षेत्र में प्रतिष्ठा प्राप्त कर सकेंगे। भाग्य 82 प्रतिशत तक साथ देगा।*

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#_बांस_की_लकड़ी_को_क्यों_नहीं_जलाया_जाता_है।

इसके पीछे धार्मिक कारण है या वैज्ञानिक कारण ? हम अक्सर शुभ(जैसे हवन अथवा पूजन) और अशुभ(दाह संस्कार) कामों के लिए विभिन्न प्रकार के लकड़ियों को जलाने में प्रयोग करते है लेकिन क्या आपने कभी किसी काम के दौरान बांस की लकड़ी को जलता हुआ देखा है। नहीं ना?भारतीय संस्कृति, परंपरा और धार्मिक महत्व के अनुसार, 'हमारे शास्त्रों में बांस की लकड़ी को जलाना वर्जित माना गया है। । अगरबत्ती के जलने से उतपन्न हुई सुगन्ध के प्रसार के लिए फेथलेट नाम के विशिष्ट केमिकल का प्रयोग किया जाता है। यह एक फेथलिक एसिड का ईस्टर होता है जो कि श्वांस के साथ शरीर में प्रवेश करता है, इस प्रकार अगरबत्ती की तथाकथित सुगन्ध न्यूरोटॉक्सिक एवम हेप्टोटोक्सिक को भी स्वांस के साथ शरीर मे पहुंचाती है।इसकी लेश मात्र उपस्थिति केन्सर अथवा मष्तिष्क आघात का कारण बन सकती है। हेप्टो टॉक्सिक की थोड़ी सी मात्रा लीवर को नष्ट करने के लिए पर्याप्त है।शास्त्रो में पूजन विधान में कही भी अगरबत्ती का उल्लेख नही मिलता सब जगह धूप ही लिखा है, 🎯हर स्थान पर धूप,दीप,नैवेद्य का ही वर्णन है।अगरबत्ती का प्रयोग भारतवर्ष में इस्लाम के आगमन के साथ ही शुरू हुआ है। मुस्लिम लोग अगरबत्ती मज़ारों में जलाते है, हम हमेशा अंधानुकरण ही करते है, जब कि हमारे धर्म की हर एक बातें वैज्ञानिक दृष्टिकोण के अनुसार मानवमात्र के कल्याण के लिए ही बनी है। 🙏🏻अतः कृपया अगरबत्ती की जगह धूप का ही उपयोग करें।

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शीघ्र विवाह हेतु मंत्र

पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणिम्। तारिणीं दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम।। यह मंत्र दुर्गा सप्तशती से उद्घृत है। शादी की कामना करने वाले पुरुष जातकों को स्नान के बाद 11 बार इस मंत्र का जाप करना चाहिए। इससे उनकी कामना पूर्ण होगी। यह शीघ्र विवाह का अचूक उपाय है। “ॐ गं गणपतै नमः” इस मंत्र को जपने से पहले बुधवार के दिन पीतल से बनी गणेश जी की प्रतिमा को पंचामृत से स्नान करवाकर पंचोपचार विधि से पूजन करें। उसके बाद 21 बार इस मंत्र का जाप करें और जाप के बाद पंचामृत को पीपल के पेड़ में चढ़ाएँ। यह जल्दी शादी होने का अहम उपाय है। “ॐ सृष्टिकर्ता मम विवाह कुरु कुरु स्वाहा” मंगलवार के दिन लक्ष्मी-नारायण की प्रतिमा को घर में स्थापित करें उसके बाद पंचोपचार विधि से पूजन के उपरांत इस मंत्र का 21 बार जाप करें। “ॐ श्रीं वर प्रदाय श्री नामः” सोमवार को शिव मंदिर में पाँच नारियल चढ़ाएँ और इस मंत्र की 5 बार माला फेरें। ध्यान रखें, यह मंत्र विशेष रूप से कन्याओं के लिए है। “क्लीं कृष्णाय गोविंदाय गोपीजनवल्लभाय स्वाहा” उक्त मंत्र का 108 बार जाप करने से अविवाहित कन्या अथवा वर का शीघ्र विवाह संपन्न हो जाता है। इस मंत्र का जाप करने से भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त होता है। “ॐ ग्रां ग्रीं ग्रों स: गुरूवे नम:” प्रत्येक गुरुवार के दिन इस मंत्र को उच्चारित करते हुए पाँच बार माला फेरें। इससे अविवाहित जातकों का विवाह शीघ्र होता है।

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*राहु बनाता है चतुर राजनेता*

राजनीति एक ऐसा क्षेत्र बनता जा रहा है, जहाँ कम परिश्रम में भरपूर पैसा व प्रसिद्ध‍ि दोनों ही प्राप्त होते हैं। ढेरों सुख-सुविधाएँ अलग से मिलती ही है। और मजा ये कि इसमें प्रवेश के लिए किसी विशेष शैक्षणिक योग्यता की भी जरूरत नहीं होती। राजनीति में जाने के लिए भी कुंडली में कुछ विशेष ग्रहों का प्रबल होना जरूरी है। राहु को राजनीति का ग्रह माना जाता है। यदि इसका दशम भाव से संबंध हो या यह स्वयं दशम में हो तो व्यक्ति धूर्त राजनीति करता है। अनेक तिकड़मों और विवादों में फँसकर भी अपना वर्चस्व कायम रखता है। राहु यदि उच्च का होकर लग्न से संबंध रखता हो तब भी व्यक्ति चालाक होता है। राजनीति के लिए दूसरा ग्रह है गुरु- गुरु यदि उच्च का होकर दशम से संबंध करें, या दशम को देखें तो व्यक्ति बुद्धि के बल पर अपना स्थान बनाता है। ये व्यक्ति जन साधारण के मन में अपना स्थान बनाते हैं। चालाकी की नहीं वरन् तर्कशील, सत्य प्रधान राजनीति करते हैं। बुध के प्रबल होने पर दशम से संबंध रखने पर व्यक्ति अच्छा वक्ता होता है। बुध गुरु दोनों प्रबल होने पर वाणी में ओज व विद्वत्ता का समन्वय होता है। ऐसे व्यक्तियों की भाषण कला लोकप्रिय होती है। उसी के बल पर वे जनमानस में अपना स्थान बनाते हैं। हमेशा की तरह राजनीति में भी चमकने के लिए सूर्य का प्रबल होना जरूरी है। सूर्य लग्न, चतुर्थ, नवम या दशम में हो तो व्यक्ति उच्च पद को आसीन होता है, राजनीतिक पटल पर उभरता है और लोगों के मन पर राज करता है। यदि कुंडली में कारक ग्रह शनि हो (वृषभ, तुला लग्न में) तो शनि का मजबूत होना जरूरी है। शनि स्थायित्व, स्थिरता देता है। शनि प्रधान ऐसे व्यक्तियों को धर्म व न्याय का साथ देना चाहिए, सत्य की राजनीति कर

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मोरपंख के रोचक तथ्य एवं चमत्कार:-

1. जो व्यक्ति अपने घर में दो मोरपंख रखता हैं, उस परिवार में कभी फूट पैदा नहीं होती हैं. घर में दो मोरपंख रखने से घर में लड़ाई झगड़े नहीं होते हैं और परिवार साथ मिल ख़ुशी ख़ुशी रहता हैं. 2. जो ब्यक्ति अपने साथ हमेशा मोरपंख रखता हैं उसके साथ कभी कोई दुर्घटना नहीं होती हैं. मोरपंख सदैव अपने पास रखने से आपका भाग्य प्रबल हो जाता हैं और किसी भी दुर्घटना का भाग नहीं बनते हो. 3. मोरपंख को घर में रखने से नकारात्मक उर्जा घर से बाहर निकल जाती हैं और सकारात्मक उर्जा घर के अन्दर आ जाती है. आप तो जानते ही हैं जिस घर में सकारात्मक उर्जा रहती हैं वहां लक्ष्मी जी जल्दी आती हैं. 4. यदि आपका बच्चा पढ़ाई में कमजोर हैं या उसका पढ़ाई लिखाई में मन नहीं लगता हैं तो आप उसके स्कूल बेग में एक मोरपंख रख दे. ऐसा करने से आपके बच्चे का पढ़ाई में मन लगेगा और वो परीक्षा में अच्छे अंको से पास होगा. 5. जिन लोगो की राशि में राहू दोष होता हैं उन्हें अपनी जेब या डायरी में मोरपंख रखना चाहिए. ऐसा करने से राहू दोष चला जाता हैं और आपके कार्यों में कोई बाधा उत्पन्न नहीं होती हैं. 6. घर का मुख्यद्वार यदि वास्तु के अनुसार नहीं बना या लगा हैं तो उस द्वार पर तीन मोरपंख लगा दे. ऐसा करने से वास्तु दोष दूर हो जाता हैं और घर परिवार पर कोई भी मुसीबत या तकलीफ नहीं आती हैं. 7. यदि आपके जीवन में एक साथ दुखो का पहाड़ टूट पड़े और आप बहुत बड़ी मुसीबत में फंस जाए तो घर के कमरे या बेडरूम में मोरपंख लगाना चाहिए. इस बात का ध्यान रखे कि यह मोरपंख आपको कमरे के अग्नि कोण में ही लगाना होगा. ऐसा करने से सारी मुसीबतें धीरे धीरे दूर चली जाती हैं.

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आज जिनका जन्मदिन है (17.7.2020)

जन्मदिन की शुभकामनाओं के साथ आपका स्वागत है व्यक्तित्व और भविष्य के बारे में जानकारी देगा जिनका उस दिनांक को जन्मदिन होगा। पेश है दिनांक 17 को जन्मे व्यक्तियों के बारे में जानकारी : दिनांक 17 को जन्मे व्यक्ति का मूलांक 8 होगा। यह ग्रह सूर्यपुत्र शनि से संचालित होता है। इस दिन जन्मे व्यक्ति धीर गंभीर, परोपकारी, कर्मठ होते हैं। आपकी वाणी कठोर तथा स्वर उग्र है। आप भौतिकतावादी है। आप अदभुत शक्तियों के मालिक हैं। आप अपने जीवन में जो कुछ भी करते हैं उसका एक मतलब होता है। आपके मन की थाह पाना मुश्किल है। आपको सफलता अत्यंत संघर्ष के बाद हासिल होती है। कई बार आपके कार्यों का श्रेय दूसरे ले जाते हैं। शुभ दिनांक : 8, 17, 26 शुभ अंक : 8, 17, 26, 35, 44 vastu astro tech शुभ वर्ष : 2024, 2042 ईष्टदेव : हनुमानजी, शनि देवता शुभ रंग : काला, गहरा नीला, जामुनी कैसा रहेगा यह वर्ष सभी कार्यों में सफलता मिलेगी। जो अभी तक बाधित रहे है वे भी सफल होंगे। व्यापार-व्यवसाय की स्थिति उत्तम रहेगी। नौकरीपेशा व्यक्ति प्रगति पाएंगे। बेरोजगार प्रयास करें, तो रोजगार पाने में सफल होंगे। शत्रु वर्ग प्रभावहीन होंगे, स्वास्थ्य की दृष्टि से समय अनुकूल ही रहेगा। राजनैतिक व्यक्ति भी समय का सदुपयोग कर लाभान्वित होंगे।

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