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चोरी का सामान किस दिशा में गया है

* प्रश्न कुण्डली के केन्द्र में सूर्य स्थित है तो चोरी का सामान पूर्व दिशा में होगा. * प्रश्न कुण्डली के केन्द्र में चन्द्रमा स्थित हो तो चोरी का सामान वायव्य कोण में होगा. * प्रश्न कुण्डली के केन्द्र स्थान में मंगल स्थित हो तो चोरी का सामान दक्षिण दिशा में होगा. * प्रश्न कुण्डली के केन्द्र स्थान में बुध हो तो चोरी का सामान उत्तर दिशा में होगा. * प्रश्न कुण्डली के केन्द्र स्थान में गुरु हो तो चोरी का सामान ईशान कोण में होता है. * प्रश्न कुण्डली के केन्द्र स्थान में शुक्र हो तो चोरी का सामान अग्नि कोण में होता है. * प्रश्न कुण्डली के केन्द्र स्थान में शनि हो तो चोरी का सामान पश्चिम दिशा में होता है. * प्रश्न कुण्डली के केन्द्र स्थान में राहु हो तो चोरी का सामान नैऋत्य कोण में होता है. उपरोक्त योगों में ग्रहों का जिक्र किया गया है परन्तु कई बार प्रश्न कुण्डली के केन्द्र स्थान में कोई भी ग्रह मौजूद नहीं होता है. ऎसी स्थिति में लग्न में स्थित राशि के आधार पर चोरी हुई वस्तु किस दिशा में है, का पता लगाया जाता है. * प्रश्न लग्न में अग्नि तत्व राशि(मेष, सिंह, या धनु) हो तो चोरी का सामान पूर्व दिशा में होता है. * प्रश्न लग्न में पृथ्वी तत्व राशि(वृष, कन्या या मकर) हो तो चोरी की वस्तु दक्षिण दिशा में होती है. * प्रश्न लग्न में वायु तत्व(मिथुन, तुला या कुम्भ) राशि हो तो चोरी की वस्तु पश्चिम दिशा में होती है. * प्रश्न लग्न में जल तत्व राशि(कर्क, वृश्चिक या मीन) हो तो चोरी का सामान उत्तर दिशा में होता है.

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ज्योतिष के कोने से----

ज्योतिष में राहु नाना को सूचित करता है, ज्योतिष में केतु दादा को सूचित करता है! ज्योतिष सिद्धांत के अनुसार राहु- केतु जिस ग्रह के साथ होते हैं या जिस ग्रह द्वारा देखे जाते हैं या जिस राशि में स्थित होते हैं उनके स्वामी द्वारा सूचित फलों को देते हैं। या यह कहा जाये उनके स्वामी के गुण गाते हैं। अत: यह निष्कर्ष निकलता है कि राहु --केतु के शुभ फल प्राप्त करने के लिए नाना -- दादा से प्यार ज्योतिष के कोने से---- ज्योतिष में राहु नाना को सूचित करता है, ज्योतिष में केतु दादा को सूचित करता है! ज्योतिष सिद्धांत के अनुसार राहु- केतु जिस ग्रह के साथ होते हैं या जिस ग्रह द्वारा देखे जाते हैं या जिस राशि में स्थित होते हैं उनके स्वामी द्वारा सूचित फलों को देते हैं। या यह कहा जाये उनके स्वामी के गुण गाते हैं। अत: यह निष्कर्ष निकलता है कि राहु --केतु के शुभ फल प्राप्त करने के लिए नाना -- दादा से प्यार करें, उनको सम्मान दें, उनकी सेवा करें! या यह कहा जाये नाना--दादा की सेवा करने से राहु--केतु अपने अशुभ स्वभाव को छोड़कर शुभ फल देने लगते हैं!! !! जय श्रीकृष्णकरें, उनको सम्मान दें, उनकी सेवा करें! या यह कहा जाये नाना--दादा की सेवा करने से

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#Vastu

🌹 घर में राधा-कृष्ण की तस्वीर लगाने से वैवाहिक जीवन में बनी रहती है सकारात्मकता~ 🌹 उत्तर-पश्चिम दिशा में राधा-कृष्ण और रासलीला का चित्र लगाएं. आनंद भरने वाला यह रूप समस्त चिंताओं को मिटाता है. 🌹 कोमल भावनाओं को बढ़ाता है. 🌹 विवाह योग्य को सुन्दर प्रस्ताव प्राप्त भी होते हैं 🌹 और वैवाहिक जीवन में सकारात्मकता बढ़ती है।

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#VastuTip 🏠

▪︎किसे कहते हैं ईशान दिशा और क्यों? ~ वास्तु अनुसार घर में पूर्व और उत्तर दिशाएं जहां पर मिलती हैं उस स्थान को ईशान दिशा कहते हैं भगवान शिव का एक नाम ईशान भी है. चूंकि भगवान शिव का आधिपत्य उत्तर-पूर्व दिशा में होता है इसीलिए इस दिशा को ईशान कोण कहा जाता है. इस दिशा के स्वामी ग्रह बृहस्पति और केतु माने गए हैं. ▪︎क्या होना चाहिए ईशान में? ~ घर, शहर और शरीर का ईशान हिस्सा सबसे पवित्र होता है इसलिए इसे साफ-स्वच्छ और खाली रखा जाना चाहिए. यहां जल की स्थापना की जाती है जैसे कुआं, बोरिंग, मटका या फिर पीने के पानी का स्थान. इसके अलावा इस स्थान को पूजा का स्थान भी बनाया जा सकता है. घर के मुख्य द्वार का इस दिशा में होना वास्तु की दृष्टि से बेहद शुभ माना जाता है. ▪︎ क्या नहीं होना चाहिए ईशान में? ~ इस स्थान पर कूड़ा-करकट रखना, स्टोर, टॉयलेट, किचन वगैरह बनाना, लोहे का कोई भारी सामान रखना वर्जित है. इससे धन-संपत्ति का नाश और दुर्भाग्य का निर्माण होता है. ऐसा करने से आप बर्बादी के द्वारा खोल देंगे.

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📿पांच मुखी रुद्राक्ष पहनने वाले को यह सुनिश्चित हो जाता है कि उसे कभी भी असमय मृत्यु का सामना नही…

📿पांच मुखी रुद्राक्ष पहनने वाले को यह सुनिश्चित हो जाता है कि उसे कभी भी असमय मृत्यु का सामना नहीं करना पड़ेगा। 📿5 मुखी रुद्राक्ष उन लोगों के लिए उत्कृष्ट है जो आध्यात्मिकता, अच्छे स्वास्थ्य और मानसिक शांति की तलाश में हैं। 📿इसके उपयोग से जीवन के सभी क्षेत्रों में भगवान शिव का आशीर्वाद मिलता है और मोक्ष को दर्शाता है, 📿ये सभी इच्छाओं की पूर्ति करता है और keeIt kaal-agni है और इसके प्रशंसक पंच ब्रह्मा,(गणेश, शिव, दुर्गा , विष्णु और सूर्य देवता) या पंच तत्त्व के रूप में सामने आते हैं।

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☆☆☆ मंगलवार को घर में पारद से निर्मित हनुमानजी की प्रतिमा स्थापित करें , पारद को रसराज कहा जाता ह…

☆☆☆ मंगलवार को घर में पारद से निर्मित हनुमानजी की प्रतिमा स्थापित करें , पारद को रसराज कहा जाता है। तंत्र शास्त्र के अनुसार पारद से बनी हनुमान प्रतिमा की पूजा करने से बिगड़े काम भी बन जाते हैं। पारद से निर्मित हनुमान प्रतिमा को घर में रखने से सभी प्रकार के वास्तु दोष स्वतः ही दूर हो जाते हैं साथ ही जल का एक पात्र पारद निर्मित हनुमान प्रतिमा के सामने रखे ओर हनुमान बाहुक का 21 दिनो तक पाठ करे मंत्र- नमो भगवते आंजनेयाय महाबलाय स्वाहा। फिर आरती, स्तुति करके अपने इच्छा बताएं और प्रार्थना करके इस मूर्ति को विसर्जित कर दें। इन उपायों को करने से शीघ्र ही आपकी मनोकामना पूरी होगी सभी प्रकार के कष्टो ओर विघ्नो का नाश होता है

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🪐 जब शनिदेव मंदिर में जाएं, तो कभी भी मूर्ति के सामने खड़े न हों. हो सके तो शनि देव के उस मंदिर…

🪐 जब शनिदेव मंदिर में जाएं, तो कभी भी मूर्ति के सामने खड़े न हों. हो सके तो शनि देव के उस मंदिर में जाएं, जहां शनि शिला के रूप में हों. शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए पीपल और शमी के पेड़ की पूजा करें. शनि देव को धर्म व न्याय का प्रतीक और सुख-संपत्ति, वैभव और मोक्ष देने वाला ग्रह माना जाता है. मान्यता है कि धर्मराज होने की वजह से प्राय: शनि पापी व्यक्तियों के लिए दुख और कष्टकारक होते हैं, लेकिन ईमानदारों के लिए यह यश, धन, पद और सम्मान का ग्रह है 🍂🍂

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EKADASHI REMINDER 🔔🎊

षटतिला एकादशी तिथि 27 जनवरी को रात 02 बजकर 16 मिनट से प्रारंभ होगी, जो कि 28 जनवरी की रात 11 बजकर 35 मिनट पर समाप्त होगी. एकादशी व्रत 28 जनवरी को रखा जाएगा.🕙 षटतिला पर तिल मिश्रित जल से स्नान करना, तिल का उबटन लगाना भी शुभ माना गया है. इसके साथ ही षटतिला एकादशी पर तिल से भगवान विष्णु की पूजा करना चाहिए. इस दिन तिल मिश्रित जल का सेवन करना उत्तम माना गया है. फलाहार के समय तिल का मिष्ठान ग्रहण, तिल से हवन और तिल का दान करना भी विशेष पुण्य प्रदान करने वाला माना गया है. इस दिन व्रत रखने से व्यक्ति के जीवन में व्याप्त सभी प्रकार की परेशानियां दूर हो जाती हैं. साथ ही, घर में सुख, समृद्धि और शांति का आगमन होता है. शास्त्रों में उल्लेख है कि एकादशी की रात को जागरण कर नारायण का सुमरन करने से व्यक्ति को वैकुंठ की प्राप्ति होती है. इस दिन मनोकामना पूर्ति के लिए भगवान विष्णु की स्तुति और मंत्रों का जाप अवश्य करें. 🌼🥀 षटतिला एकादशी मंत्र : 🌿 ॐ नमो भगवते वासुदेवाय श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे। हे नाथ नारायण वासुदेवाय।। ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।। ॐ विष्णवे नम:

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#Astrotip_for_Mars ~

अगर किसी जातक का मंगल खराब हो, तो उसे रक्त संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। उन्हें रक्तचाप फोड़े-फुन्सी जैसी समस्याएं होने लगती हैं। इसके अलावा व्यक्ति को गुर्दे में पथरी गठिया और आंखों से संबंधित परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है, इन लोगों को कई बार अपने क्रोध के कारण कोर्ट-कचेहरी संबंधी मामलों में भी फंसना पड़ जाता है। उपाय : हनुमान जी ओर मंगल देव की नित्य पूजा अराधना करनी चाहिए l 🌹🌱

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*लग्नास्थ मंगल*

जब लग्न में मंगल हो 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 लग्न का मंगल कई दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। यह लग्न में बैठकर चतुर्थ और सप्तम स्थान को दृष्टि देता है और पूर्ण मांगलिक योग बनाता है। आचार्य आनन्द जालान के अनुसार लग्नस्थ मंगल स्वगृही, मित्र क्षेत्री या उच्च का हो तो जातक पुष्ट देह का, अच्छी कद-काठी का, निरोगी व अच्छे कार्य करके समाज में पद-यश पाने वाला होता है। पाप प्रभाव में आया मंगल जातक को क्रोधी, झगड़ालू, व्यर्थ प्रलाप करने वाला बनाता है। ऐसे लोगों को दाँतों के रोग व उदर रोग होने की आशंका रहती है। रक्तचाप की शिकायत भी रहती लग्नस्‍थ मंगल जातक की कई व्यवसायों की तरफ आकृष्ट करता है मगर सफलता कम ही मिलती है। यह मंगल अहंकार भी बढ़ाता है। मिथुन व तुला का मंगल मिलनसार, व्यवहार कुशल बनाता है। सिंह राशि का मंगल धन व उन्नतिदायक होता है। वृषभ, कन्या, व मकर का मंगल कंजूस व संकुचित विचारों का बनाता है। कर्क, वृश्चिक, कुंभ व मीन का मंगल यश तो देता है, मगर धन की कमी बनाता है। मेष का मंगल सुखकारक होता है। मंगल पर पाप प्रभाव होने की स्थिति में हनुमान जी की उपासना, मंगलवार का व्रत व लाल वस्तु का दान उपयोगी होता है।

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