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ज्योतिष अनुसार साधना चयन

🔹🔹🔸🔹🔸🔹🔸🔹🔹 जन्म कुंडली द्वारा लग्न पंचम, नवम स्थान में जिन ग्रहों का प्रभाव हो उन ग्रहों के बल अनुसार साधक को उन देवताओं की साधना करना चाहिए- 1. सूर्य- विष्णु, शिव, दुर्गा, ज्वालादेवी, ज्वालामालिनी, गायत्री, आदित्य, स्वर्णाकर्षण, भैरव की उपासना करें। 2. सूर्य शनि, सूर्य राहु- महाकाली, तारा, शरभराज, नीलकंठ, यम, उग्रभैरव, कालभैरव, श्मशान भैरव की पूजा करें। 3. सूर्य बुध, सूर्य मंगल- गायत्री, सरस्वती, दुर्गा उपासना। 4. सूर्य शुक्र- वासुदेव, मातडंगी, तारा, कुबेर, भैरवी, श्रीविद्या की उपासना करें। 5. सूर्य केतु- छिन्नमस्ता, आशुतोष शिव, अघोर शिव। 6. सूर्य शनि राहु- पशुपतास्त्र तंत्र, मंत्र मरणादि षट्कर्म से व्यक्ति अधिकतर पीड़ित होगा। रक्षा के लिए काली, तारा, प्रत्यंगिरा, जातवेद दुर्गा की उपासना करें। 7. सूर्य, गुरु, राहु- बगलामुखी, बगलाचामुंडा, उचिष्ट गणपति, वीरभद्र। केवल बगलामुखी उपासना से सिद्धि मिले, परंतु या तो सिद्धि दूसरों के लिए नष्ट होगी या देवी नाराज होकर वापस ले लेंगी। 8. चन्द्रमा- लक्ष्मी, श्रीविद्या षोडशी, यक्षिणी, वशीकरणादि प्रयोग शिव, कामेश्वर उपासना शुभ रहे। 9. चन्द्र, मंगल- हनुमान उच्छिष्ट चांडालिनी, मातंगी, शबरी, नरसिंह, वनदुर्गा, भैरवी उपासना शुभ रहे। 10. चन्द्र, बुध- बगला, कर्णपिशाची, उच्छिष्ट चांडालिनी नरसिंह, सरस्वती, वैष्णवी, वाराही, हयग्रीव, दुर्गा उपासना शुभ रहे।

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बिजली समान दुकान कौन कर सकते है?

🌹🌹🌹🌹🌹🌹 आज अब बात करते है व्यापार में बिजली के समान की दुकान कौन कर सकते है और किन को अच्छी कामयाबी देगा बिजली समान दुकान। आचार्य आनन्द जालान के अनुसार कुंडली जैसे कि दसवाँ भाव व्यापार का तो 7वा भाव दुकानदारी व्यापार का मुख्य भाव है तो बुध बिजनेस कारक ग्रह है तो शनि मंगल बिजली के समान के कारक है हर तरह के तार व बिजली के सामानों में लोहे से बने चीजो का कारक शनि तो अन्य बिजली के उपकरणों के समान का कारक मंगल है इस कारण शनि और मंगल दोनो का ही बलवान होना कुंडली मे जरूरी है। अब दसवें भाव स्वामी बलवान होकर कुंडली मे बैठा है साथ ही कही न कही दसवें भाव स्वामी ग्रह का सम्बंध मंगल या शनि से है और धनलाभ भाव(दूसरा+ग्यारहवा भाव और इनके स्वामी)बलवान स्थिति में है तब बिजली के समान की दुकान कर सकते है बड़े स्तर पर इसके अलावा या फिर 7वे भाव स्वामी मंगल या शनि सहित ग्यारहवे या दूसरे भाव स्वामियो से सम्बंध में है तब भी बिजली के उपकरणों, बिजली के समान तार,बिजली फिटिंग समानआदि की दुकान खोल सकते है अच्छी चलेगी। #उदाहरणअनुसारकुम्भलग्न1:- कुम्भ लग्न में दसवे भाव स्वामी मंगल बलवान होकर सूर्य से सम्बंध बनाकर बैठे है और शनि दसवें भाव मे बैठा है साथ ही व्यापार कारक बुध और धनलाभ कमाई स्वामी बृहस्पति+दूसरे/ग्यारहवें भाव बलवान स्थिति में है तब बिजली के उपकरणों, बिजली के समान, इलेक्ट्रॉनिक के सभी तरह के सामानों की दुकान खोल सकते है।।

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संघर्ष कब कैसे खत्म होगा जीवन से?

🌹🌹🌹🌹🌹🌹 संघर्ष एक ऐसा रास्ता जहाँ कोशिश होती रहती है लेकिन कुछ खास फल नही मिलता।आज इसी विषय पर बात करते है कि यदि हर चीज को लेकर, जीवन से जुड़े हर पहलू को लेकर जीवन में संघर्ष ही रहा है या है तो कब खत्म होगा और कैसे खत्म हो सकता है आदि इसी पर बात करते है।जन्मकुंडली में शुभ और कुछ अच्छे योग या राजयोग है और लग्न लग्नेश अच्छी स्थिति में है साथ ही भविष्य में जल्द आने वाली ग्रह दशा अनुकूल है तब संघर्ष खत्म हो जायेगा, क्योंकि यह सब स्थितियां संघर्ष को खत्म करेगी साथ ही वर्तमान भविष्य में आने वाली ग्रहदशाओ का समय अनुकूल है लाभ देने की स्थिति में है तब संघर्ष खत्म हो जायेगा , वरना संघर्ष करने वाले शुभ योग ग्रहो के है तब उपाय करके ही शुभ समय के लिए संघर्ष से मुक्ति मिलकर सफलता प्राप्ति और भाग्योदय के रास्ते खुल जाएंगे।अब उदाहरणों से समझते है कैसे? #उदाहरणअनुसारसिंहलग्न1:- सिंह लग्न में लग्नेश सूर्य बलवान और अच्छी स्थिति में है साथ ही शुभ और सफलता प्राप्ति योग ग्रहो के द्वारा बने है और शुभ समय ग्रहो का आ रहा है या चल रहा है तब संघर्षकारी जीवन से मुक्ति मिल जायेगी, अच्छी सफलता मिलकर भाग्योदय होगा।। #उदाहरणआचार्य आनन्द जालान के अनुसारकन्यालग्न2:- कन्या लग्न में लग्नेश बुध है दसवे भाव का स्वामी भी है अब यहाँ किसी एक या दो चीजो के लिए संघर्ष हो रहा है या हर तरह से संघर्ष है तब यहाँ कुंडली में शुभ योग बने है ,ग्रह शुभ स्थिति में बैठे है और वर्तमान चल रही अंतरदशा भी सामान्य ठीक है और जल्द भविष्य में

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विवाह में परेशानी या अधिक प्रयास के बाद विवाह ना होना और कब तक हो जाएगा जाने निश्चिंत समय .....

वैवाहिक जीवन के लिए मुख्य रूप से सप्तम भाव एवं द्वितीय भाव को भी देखा जाता है। विवाह के कारक शुक्र को देखा जाता है । इस कुंडली में सप्तम भाव के स्वामी मंगल स्वयं से द्वादश भाव में एवं रोग तथा शत्रु के भाव षष्ठ भाव में विराजमान है। पहला कारण हो गया । सप्तम भाव में राहु की दृष्टि है ऐसे योग में विवाह में बहुत ज्यादा विलंब होता है एवं वैवाहिक जीवन में मतभेद बना रहता है। द्वितीय भाव के स्वामी बुध अष्टम भाव में विराजमान है । रोजगार के लिए मुख्य रूप से दशम भाव को देखा जाता है और इस कुंडली में शनि राजयोग कारक ग्रह हैं.... शनि यहां अष्टम भाव में और बिल्कुल कमजोर स्थिति में मात्र एक अंश के हैं जिसके कारण रोजगार में पूर्ण रूप से सफलता प्राप्त नहीं हो रही है । आमदनी भाव का स्वामी गुरु स्वराशि में विराजमान हैं परंतु अंशबल में कमजोर है। राहु के साथ विराजमान हो कर चांडाल योग का निर्माण कर रहे हैं जिसके कारण आमदनी ठीक से नहीं हो पाती है .. उपाय - मंगल बुध एवं शनि का मंत्र जाप करें। राहु से संबंधित दान तथा उपाय करें ।

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Bhrighu Nandi Nadi derived yogas by a colleague. One cant test it obviously.

predictions on Moksha Yoga have been derived as mentioned below. • Jupiter + Ketu Moksha in this birth to male native. • Saturn + Ketu Moksha in this birth to male/female. • Venus + Ketu Moksha in this birth to female native. • Jupiter + Sun Native will go to Kailasa after his death. • Jupiter + Moon Native will go to Kailasa after his death. • Jupiter + Mars Native will take birth immediately after his death. • Jupiter + Mercury • Native will go to Baikuntha after his death. • Jupiter + Saturn Native will go to Yamaloka after his death. • Jupiter +Rahu Native will go to Naraka after his death.

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Sun is natural significator of teeth that is gover growth.

Moon is functional significator of teeth that is gover action like cutting chewing crushing weapon to bite enemies etc. When sun is badly affected it can result into dead or removal of teeth. Might be moon also as inside the teeth, the shop tissue and other material may not be signified by Mars alone. Purpose of root canal treatment is to make dead the teeth to save the structure only. By this way, tooth remain functional as Mars to cut chew crush etc as weapon. Rahul rolls to make dead the tooth and also if possible to get removed the teeth from root that is to get cured or have a effective solution. RCT is the process to save the tooth structure.

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शनि अगर छठे भाव में हो तो यह जानवरों को रिप्रेजेंट करता है छठे भाव का स्वामी अगर लग्न का मित्र हो…

शनि अगर छठे भाव में हो तो यह जानवरों को रिप्रेजेंट करता है छठे भाव का स्वामी अगर लग्न का मित्र हो तो खास तौर पर उस जानवर से इंसान को अच्छा फायदा होता है उदाहरण के लिए कर्क लग्न में गुरु बैठा है छठे भाव में धनु राशि में शनि बैठा है गुरु घोड़े को दर्शाता है ऐसा जातक घोड़े की रेस में अच्छा पैसा प्राप्त कर सकता है।

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𝙎𝘼𝙏𝙐𝙍𝙉 - 𝙏𝙃𝙀 𝙎𝙏𝙍𝙐𝘾𝙏𝙐𝙍𝙀

Saturn is all about giving Structure in our life. He gives us lot of Karmic Load over our shoulders. We think, he’s cruel and Pressurer but; his ultimate agenda in the face of cruelty & pressure is to remove unwanted & useless things from our life because as we feel load & heaviness we just starts removing which is least important in our life. Finally what is left is real and vital you. Simply what is meant to be deserve.

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