Skip to content
Ahmedabad, Gujarat, 380006

Business hours

Astrologer Rajeev patel

Monday
9am-5pm
Tuesday
9am-5pm
Wednesday
9am-5pm
Thursday
9am-5pm
Friday
9am-5pm
Saturday
9am-5pm
Sunday
9am-5pm

You can anytime during the day with your query.

9898745868

Latest Posts & Updates

Fresh stories, announcements and offers about Astrologer, straight from our business.

*कब किस दिन व्रत रहना चाहिए*

मंगलवार- मंगल से पीडित व्यक्ति को मंगलवार का उपवास एवं हनुमान जी की आराधना अवश्य करनी चाहिए। हर कार्य में मंगलकारी परिणाम प्राप्त करने के लिए मंगलवार का उपवास रखना चाहिए। बुधवार- कमजोर मस्तिष्क वाले एवं आत्मिक ज्ञान प्राप्त करने के लिए व्यक्ति को बुधवार के दिन उपवास रखना चाहिए। यह भगवान गणेश का दिन माना गया है और श्रीगणेश बुद्धि के दाता है। बुधवार का दिन बुद्धि प्राप्ति का दिन होता है। गुरुवार- बृहस्पति, देवताओं के गुरु हैं। उथली व छिछली मानसिकता वाले व्यक्ति को बृहस्पतिवार का उपवास अवश्य रखना चाहिए। बृहस्पति सत्व गुणी हैं तथा ज्ञान, अच्छे एवं सकारात्मक विचार और शिक्षण का प्रतिनिधित्व करते हैं। शुक्रवार- शीघ्रपतन, प्रमेह रोग के रोगियों को शुक्रवार के दिन उपवास रखना चाहिए क्योंकि शुक्रवार ओज, तेजस्विता, शौर्य, सौंदर्यवर्धक और शुक्रवर्धक होता है। ज्योतिष के अनुसार शुक्र देव 'शुक्र वार' के स्वामी हैं। वे धन, खुशी, सौंदर्य और प्रजनन का प्रतिनिधित्व करते हैं शनिवार- समस्त दुखों एवं परेशानियों से छुटकारा पाने के लिए शनिवार के दिन उपवास रखना चाहिए। भगवान शनि आपके समस्त परेशानियों को दूर करने में आपकी सहायता करते हैं। रविवार- अच्छा स्वास्थ्य व तेजस्विता पाने के लिए रविवार के दिन उपवास रखना चाहिए। रविवार सूर्य का दिन होता है और सूर्य सभी ग्रहों के मुखिया है। नौकरी पाना चाहते हैं तो यह व्रत आपके लिए उपयोगी है।

Read full post

ज्योतिष के अनुसार व्यक्ति का अपना मकान तब बनता है, जब उन्हें शनि-मंगल की दशा या अंतर्दशा चल रही ह…

ज्योतिष के अनुसार व्यक्ति का अपना मकान तब बनता है, जब उन्हें शनि-मंगल की दशा या अंतर्दशा चल रही हो और शनि-मंगल का आपस में चतुर्थ भाव में कोई संबंध बन रहा हो। इस स्थिति में व्यक्ति को प्रॉपर्टी डीलिंग के बिजनेस में भी जबर्दस्त सफलता मिलती है। 🏘🏠

ज्योतिष के अनुसार व्यक्ति का अपना मकान तब बनता है, जब उन्हें शनि-मंगल की दशा या अंतर्दशा चल रही ह… post imageRead full post

*शुभ कार्य करने के लिये अशुभ योगों का त्याग (भाग 2)*

🌼🍂🌼🍂🌼🍂🌼🍂🌼🍂🌼🍂🌼🍂🌼 शुभाशुभ कर्मो अथवा दैनिक कार्यो में भी मुहूर्त साधना प्राचीन परंपरा रही है इससे मनुष्य भविष्य में होने वाली अशुभ घटनाओं से बच सकता है। कुछ प्रमुख अशुभ योग का विवरण दिया जा रहा है यह आपके लिए अवश्य लाभदायक रहेगा। कुयोग👉 (अशुभ) वार, तिथि एवं नक्षत्रों के संयोग से अथवा केवल नक्षत्र के आधार पर कुछ ऐसे अशुभ योग बनते हैं जिन्हें, कुयोग कहा जा सकता है। इन कुयोगों में कोई शुभ कार्य प्रारंभ किया जाए तो वह सफल नहीं होता अपितु उसमें हानि, कष्ट एवं भारी संकट का सामना करना पड़ता है। कुयोग-सुयोग: यदि किन्हीं कारणों से एक कुयोग तथा एक सुयोग एक ही दिन पड़ जाए तो भी उस दिन को त्याग देना चाहिये । दग्ध नक्षत्र👉 रविवार को भरणी, सोमवार को चित्रा, मंगलवार को उत्तराषाढ़ा, बुधवार को धनिष्ठा, गुरुवार को उत्तरा फाल्गुनी, शुक्रवार को ज्येष्ठा, शनिवार को रेवती नक्षत्र दग्ध नक्षत्र कहलाते हैं। इनमें कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाना चाहिए। मास-शून्य नक्षत्र👉 चैत्र में अश्विनी और रोहिणी, वैशाख में चित्रा और स्वाति, ज्येष्ठ में उत्तराषाढ़ा और पुष्य, आषाढ़ में पूर्वा फाल्गुनी और धनिष्ठा, श्रवण में उत्तराषाढा़ और श्रवण, भाद्रपद में शतभिषा और रेवती, अश्विनी में पूर्वा भाद्रपद, कार्तिक में कृतिका और मघा, मार्गशीर्ष में चित्रा और विशाखा, पौष में आर्द्रा और अश्विनी, माघ में श्रवण और मूल तथा फाल्गुन में भरणी और ज्येष्ठा मास-शून्य नक्षत्र होते हैं। इनमें शुभ कार्य करने से धन नाश होता है।

Read full post

केतु ग्रह = [ KETU PLANET ]

🚩🚩🚩 👉 केतु की बात करे तो ये छाया ग्रह है इसका जन्म भगवान विष्णु के हाथ से हुआ है क्योंकि राहु ने अमृत पान किया था तब केतु धड़ कहलाया , वहीं आकाश मंडल में केतु का प्रभाव वायव्य कोण में माना गया है केतु की कुछ विशेष परिस्थितियों के कारण जातक यश के शिखर तक पहुंच सकता है। - यह आध्यात्मिक ग्रह है वैसे क्रूर ग्रह है यह मंगल के समान ही है जैसे चोट लगनी ,एक्सीडेंट , आदि से कष्ट देता है इसकी महादशा 7 वर्ष की होती है जहां यह हो उस भाव से अलग करने की चेष्ठा करता है हमेसा हर भाव मे केतु क्या फल देगा यह देखते है 👉लग्न = जातक के लग्न में केतु होगा तो स्वभाव में थोड़ी गर्मी होगी , थोड़ा वैवाहिक सुख में भी कमी करेगा 👉 दूसरे = जातक झूठ बोलेगा , खट्टी चीजे अधिक पसन्द होगी , अपनी दशा में गुप्त रोग देगा 👉तीसरे = यह केतु के लिए सबसे अच्छी जगह है जातक बहुत ही साहसी होगा , अपनी दशा अंतर्दशा में केतु राजयोग देगा 👉चतुर्थ = इस भाव माता के सुख में कमी , माँ को स्वास्थ्य सम्बंधित दिक्कत , घर मे प्रेत पीड़ा , जातक का खुद का मन भी शांत नही रहेगा , 👉पंचम = इस भाव मे केतु यदि पंचमेश कमजोर हो गर्भपात करवा देता है बुद्धि में तर्क वितर्क की अच्छी शक्ती होगी , 👉ष्टम = इस भाव मे केतु अपनी दशा मे चोट आदि देता है और रोग की बात करे तो रोग होगा वो शरीर के अंदर कोई भी जख्म हो सकता है 👉 सप्तम = इस भाव मे केतु पत्नी ज्यादा समझदार नही मिलती , वैवाहिक सूख में कमी देगा ,क्योंकि लग्न में राहु भी होगा , 👉 अष्टम = इस भाव मे अपनी दशा आदि में चोट देगा , गुप्त रोग अष्टम केतु वालो को बवासीर एक बार जरूर होती है 👉नवम = इस भाव में केतु भाग्य में अड़चन डालेगा

केतु ग्रह = [ KETU PLANET ] post imageRead full post

*कुंडली के केंद्र भाव*

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 1- सूर्य के केंद्र में होने से व्यक्ति राजा का सेवक, चंद्रमा केंद्र में हो तो व्यापारी, मंगल केंद्र में हो तो व्यक्ति सेना में काम करता है । * 2- मंगल केंद्र में हो तो व्यक्ति सेना की नौकरी करने वाला होता है । 4- बुध के केंद्र में होने से व्यक्ति अध्यापक तथा गुरु के केंद्र में होने से व्यक्ति ज्ञानी होता है । 5- गुरु के केंद्र में होने से व्यक्ति ज्ञानी एवं धर्मकर्म के कार्य करने वाला होता है । 6- शुक्र के केंद्र में होने पर धनवान तथा विद्यावान होता है । 7- शनि के केंद्र में होने से व्यक्ति बुरे लोगों की सेवा करने वाला होता है । 8- यदि केंद्र में उच्च का सूर्य हो तथा गुरु केंद्र में चौथे भाव में बैठा हो तो व्यक्ति सभी सुख और मान-सम्मान प्राप्त करता है । 9- अगर केंद्र में कोई ग्रह न हो तो ऐसी कुंडली को शुभ नहीं माना जाता है और ऐसा व्यक्ति जीवन भर कर्ज से परेशान रहता है । यह उपाय करें जिस किसी कि कुंडली ऐसे योग बने है वे जातक शिवजी की उपासना करें एवं सोमवार का व्रत करें, 51चांदी के नाग नागिन के जोड़े बहते पानी मे बहा देवे भगवान शिव पर चांदी का एक छोटा सा नाग अर्पण करें, एवं 108 बिल्व पत्रों से हवन कुंड में आहूतियां दें, और किसी गरीब को भोजन करावें ।

Read full post

*कौन सा पौधा है आपकी राशि का -*

*राशि अनुसार पौधा* 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 - मेष और वृश्चिक राशि वाले जातक को मंगल देव के लिए लाल फल- फूल वाले पेड़ पौधे लगाना चाहिए। - वृष और तुला राशि के जातकों का राशि स्वामी शुक्र होता है इसलिए उन्हें सफेद फल-फूल वाले बड़े पेड़ पौधे लगाने से लाभ होगा। - कन्या और मिथुन राशि के जातक बुध ग्रह के अनुसार बिना फ ल और बिना फूल वाले छोटे पौधे लगा सकते है। - कर्क राशि वाले लोगों का राशि स्वामी चंद्रमा होता है, इसलिए उन्हें अपने बगीचे में तुलसी या अन्य छोटे-छोटे औषधीय पौधे लगाएं और उसमें प्रतिदिन पानी दें। - सिंह राशि वालों को लाल रंग के फूल वाले बड़े पेड़ या आकड़े का पेड़ लगाने से लाभ होगा। - धनु और मीन राशि बृहस्पति देव की राशि है इसलिए इस राशि के जातकों को पीले फल वाले वज्रदंती या पीपल के पेड़ लगाना चाहिए। - मकर और कुंभ राशि के व्यक्ति अपने राशि स्वामी शनि के अनुसार बिना फल-फूल वाले पेड़ पौधें लगाएं। सभी पेड़-पौधे पूरब दिशा में लगाने चाहिए। ग्रह के बुरे प्रभाव से बचने के लिए वायव्य कोण में यानी पश्चिम और उत्तर दिशा के बीच में भी कुछ बड़े पेड़ लगाए जा सकते हैं।....

Read full post

कुंडली में पीड़ित शुक्र ग्रह की अशुभता दूर करने और शुक्र ग्रह के शुभ फल प्राप्त करने के लिए करे ये…

कुंडली में पीड़ित शुक्र ग्रह की अशुभता दूर करने और शुक्र ग्रह के शुभ फल प्राप्त करने के लिए करे ये उपाय 🌸💌

कुंडली में पीड़ित शुक्र ग्रह की अशुभता दूर करने और शुक्र ग्रह के शुभ फल प्राप्त करने के लिए करे ये… post imageRead full post

🦀 Cancer disease कैंसर रोग गुरु ओर शनि के बिना सम्भव नही पर जब 6th भाव के स्वामी होकर नीच या पाप…

🦀 Cancer disease कैंसर रोग गुरु ओर शनि के बिना सम्भव नही पर जब 6th भाव के स्वामी होकर नीच या पाप प्रभाव में हो तब कौन सा ग्रह कहाँ कैंसर देगा ? सूर्य 👉 पेट का कैंसर ओर हड्डियों में चन्द्रमा 👉 फेफड़ो में ,ब्लड कैंसर छाती में केंसर जो विशेषकर महिलाओं को होता है मंगल 👉 दिमाग में कैंसर , ब्लड कैंसर बुध 👉 खाने की नली में , आंतो का कैंसर गुरु 👉 लिवर कैंसर , शुक्र 👉 जो गुप्त अंगों में होता है वो सभी , प्रकार का कैंसर शनि 👉 पाँव में , शनि वैसे भी और भी असाध्य रोग देता है राहु शनि की तरह केतु मंगल की तरह 🎗श्वेत रक्त कण का सूचक कर्क राशि का स्वामी चंद्र तथा लाल रक्त कण का सूचक मंगल है। कर्क राशि का चिह्न केकड़ा है। केकड़े की प्रकृति होती है कि वह जिस स्थान को अपने पंजों से जकड़ लेता है, उसे अपने साथ लेकर ही छोड़ता है। इसी प्रकार कोशिकाएं मानव शरीर के जिस अंग को अपना स्थान बना लेती है उसे शरीर से अलग करके ही कोशिकाओं को हटाया जाता है। इसलिए ज्योतिष में कैंसर जैसे भयानक रोग के लिए कर्क राशि के स्वामी चंद्र का मंगल ओर राहु का विशेष महत्व है।

🦀 Cancer disease कैंसर रोग गुरु ओर शनि के बिना सम्भव नही पर जब 6th भाव के स्वामी होकर नीच या पाप… post imageRead full post

*साढ़े साती के अनुकूल प्रभाव*

साढ़े साती अशुभ भी हो यह जरूरी नहीं है। यह अपने विभिन्न चरणों में शुभ फल भी प्रदान करती है।विभिन्न राशियों में इस के शुभ प्रभाव इस प्रकार हैँ। 🙏🏻🙏🏻🕉🕉🙏🏻🙏🏻 मेष राशि:- इस राशि में अंतिम ढाई वर्ष शुभ होते हैँ। वृष राशि:- इस राशि में मध्य तथा अंतिम ढाई वर्ष शुभ होते हैँ। जातक को उन्नति व सम्पति प्राप्त होती है। मिथुन राशि:- इस राशि में आरम्भ के ढाई वर्ष अनुकूल होते हैँ। कर्क राशि:- इस राशि में शुरु के ढाई वर्ष शुभ होते हैँ। सिंघ राशि:- अंत के ढाई वर्ष शुभ होते हैँ। कन्या राशि:- अंत के ढाई वर्ष शुभ होते हैँ। तुला राशि:- मध्य के ढाई वर्ष शुभ होते हैँ। वरिश्चिक राशि:- आरम्भ के ढाई वर्ष शुभ होते हैँ। धनु राशि:- मध्य के ढाई वर्ष शुभ होते हैं। मकर राशि: आरम्भ तथा अंत के ढाई वर्ष शुभ होते हैँ। कुम्भ राशि:- मध्य व अंत के ढाई वर्ष सुख शान्ति रहती है। मीन राशि:- इस राशि के मध्य के ढाई वर्ष शुभ होते हैं। साढ़े साती के दौरान हनुमान जी की पूजा करते रहें, शनि मंदिर जाएं व निर्धन और जरूरतमन्द् को दान करते रहें।

Read full post

बुध ग्रह - Mercury's 🌴🌳🌿

बुध की बात करे तो यह विष्णु स्वरूप ही है सत्य सात्विक ग्रह है वैश्य जाती का है और खेल , कूद , हास्य विनोद , तन्त्र मन्त्र आदि में जिसका बुध बलबान हो तो उसकी रुचि होती है यह विद्या बुद्धि आदि का कारक है यह बाल अवस्था का ग्रह है और त्रिदोष से युक्त है और इसकी राशि मिथुन और कन्या है जो कि छाती ,बाजु , श्वास नली की कारक है यह शुभ ग्रह माना गया है पर यह जिस के साथ हो वैसे ही हो जाता है मतलब शुभ के साथ शुभ और अशुभ के साथ हो जाता है अकेला किसी भी राशि मे हो कुछ ना कुछ शुभ होता है चन्द्रमा जैसे हमारी मानसिक स्थित आदि का कारक है वैसे ही बुध हमारी बुद्धि का कारक है यह पीड़ित हो तो पागल पन आदि देता है यह भी राहु केतु की तरह अचानक फल देता है और इसकी जब दशा आये तो यह अपना जो अच्छा या बुरा फल देने है वो दशा लगते ही दे देता है क्योंकि यह कुमार अवस्था का ग्रह है यह शुद्ध सात्विक ग्रह है जब यह विद्या आदि अंगों को प्रभावित करे तो यह सात्विक और धार्मिक विद्या देता है नपुंसक ग्रह है यह जब शनि के साथ 7 स्थान में हो तो यह नपुंसक भी बना देता है सभी ग्रहों की किसी ग्रह विशेष के साथ शत्रुता होती है ऐसे ही इसकी मंगल के साथ शत्रुता है जब मंगल की दृष्टि इसकी राशि आदि पे हो तो हमे समझना चाहिए कि उस भाव सम्बंधित चीजो से हानि होगी , यह प्रथम स्थान में दिग्बली होता है जब बुध की दशा हो तो हमे विद्या की प्राप्ति तो होती है यह बुआ आदि हमारी उनका कारक है और व्यवसाय आदि का कारक यही है जब यह बलबान हो तो व्यक्ति व्यवसाय आदि में विशेष सफलता पाता है

बुध ग्रह - Mercury's 🌴🌳🌿 post imageRead full post