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अगर आपके हाथ में भी है यह निशान तो आपकी हर मनोकामना होगी पूरी ....

हस्तरेखा शास्त्र एक ऐसा ज्ञान का भंडार है जिसके आधार पर हाथ अथवा चेहरा आदि को देख कर किसी भी व्यक्ति के भूत, वर्तमान तथा भविष्य के बारे में जाना जा सकता है। हस्तरेखा शास्त्र एक ऐसा ज्ञान का भंडार है जिसके आधार पर हाथ अथवा चेहरा आदि को देख कर किसी भी व्यक्ति के भूत, वर्तमान तथा भविष्य के बारे में जाना जा सकता है। इसके लिए हमें हाथ में बने कुछ विशेष चिन्ह (निशान) तथा रेखाओं को पहचानना होता है, उसके बाद वो कहां पर हैं, इसे जान कर हम सब कुछ जान सकते हैं। जानिए हाथ के एक ऐसे ही निशान के बारे में आपकी छोटी अंगुली के तीन हिस्से खोलेंगे आपके सारे राज, ऐसे देखें दूसरों का भविष्य हाथ में कहीं भी त्रिशूल का निशान होना बहुत ही भाग्यशाली माना जाता है। ज्योतिषशास्त्रियों के अनुसार जिस व्यक्ति की हथेली पर हृदय रेखा के स‌िरे पर गुरु पर्वत के समीप त्रिशूल का निशान हो वह समाज में गौरव और प्रतिभावान बनता है। यदि सूर्य रेखा पर त्रिशूल का चिन्ह हो तो व्यक्ति को सरकारी क्षेत्र में लाभ और उच्च पद-प्रत‌िष्ठा की प्राप्ति होती है। प्राचीन ज्योतिषशास्त्र के अनुसार यदि किसी व्यक्ति की हथेली में भगवान श‌िव का प्रतीक चिह्न त्रिशूल च‌िन्ह बना हो तो उन रेखाओं का फल कई गुणा बढ़ जाता है। यदि ये चिन्ह भाग्य रेखा पर हो तो वह व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है और उसे सभी सुखों की प्राप्ति होती है। परन्तु त्रिशूल के चिन्ह के साथ अन्य रेखाएं निकलने पर विपरीत परिणाम मिलता है और सभी शुभ फल समाप्त हो जाते हैं। मान्यताओं के अनुसार यदि किसी व्यक्ति के हाथ की दसों उंगल‌ियों में भगवान व‌िष्‍णु के प्रतीक चक्र का चिन्ह हो वह चक्रवर्ती सम्राट

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*क्या भगवान हमारे द्वारा चढ़ाया गया भोग खाते हैं ?*

यदि खाते हैं, तो वह वस्तु समाप्त क्यों नहीं हो जाती ? और यदि नहीं खाते हैं, तो भोग लगाने का क्या लाभ ? *एक लड़के ने पाठ के बीच में अपने गुरु से यह प्रश्न किया....* गुरु ने तत्काल कोई उत्तर नहीं दिया। वे पूर्ववत् पाठ पढ़ाते रहे। उस दिन उन्होंने पाठ के अन्त में एक श्लोक पढ़ाया: पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ॥ पाठ पूरा होने के बाद गुरु ने शिष्यों से कहा कि वे पुस्तक देखकर श्लोक कंठस्थ कर लें। एक घंटे बाद गुरु ने प्रश्न करने वाले शिष्य से पूछा कि उसे श्लोक कंठस्थ हुआ कि नहीं ? उस शिष्य ने पूरा श्लोक शुद्ध-शुद्ध गुरु को सुना दिया। फिर भी गुरु ने सिर 'नहीं' में हिलाया, तो शिष्य ने कहा कि" वे चाहें, तो पुस्तक देख लें; श्लोक बिल्कुल शुद्ध है।” गुरु ने पुस्तक देखते हुए कहा“ श्लोक तो पुस्तक में ही है, तो तुम्हारे दिमाग में कैसे चला गया? शिष्य कुछ भी उत्तर नहीं दे पाया। तब गुरु ने कहा “ पुस्तक में जो श्लोक है, वह स्थूल रूप में है। तुमने जब श्लोक पढ़ा, तो वह सूक्ष्म रूप में तुम्हारे दिमाग में प्रवेश कर गया, उसी सूक्ष्म रूप में वह तुम्हारे मस्तिष्क में रहता है। और जब तुमने इसको पढ़कर कंठस्थ कर लिया, *तब भी पुस्तक के स्थूल रूप के श्लोक में कोई कमी नहीं आई ...* *इसी प्रकार पूरे विश्व में व्याप्त परमात्मा हमारे द्वारा चढ़ाए गए निवेदन को सूक्ष्म रूप में ग्रहण करते हैं, और इससे स्थूल रूप के वस्तु में कोई कमी नहीं होती। उसी को हम प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।* *शिष्य को उसके प्रश्न का उत्तर मिल गया .....*

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*कष्ट निवारण के लिए

हमारे घर में ही कई ऐसी भाग्यवर्धक चीजें होती है, जिनका प्रयोग करने पर हम स्वयं अपने घर-ऑफिस आदि के नकारात्मक ऊर्जा को दूर करके सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि कर सकते हैं। ऐसे आसान उपाय जिससे हम सकारात्मक ऊर्जा का विकास कर अपने भाग्य को बदल सकते हैं, अपना भाग्य जागृत कर *शास्त्रों के अनुसार धन, सुख और शांति के लिए आजमा लें ये सिद्ध उपाय* *व्यापार बढाने के लिए* 1। शुक्ल पक्ष में किसी भी दिन अपनी फैक्ट्री या दुकान के दरवाजे के दोनों तरफ बाहर की ओर थोडा सा गेहूं का आटा रख दें! ध्यान रहे ऐसा करते हुए आपको कोई देखे नही! 2। पूजा घर में अभिमंत्रित श्र्री यंत्र रखें! 3। शुक्र्वार की रात को सवा किलो काले चने भिगो दें! दूसरे दिन शनिवार को उन्हें सरसों के तेल में बना लें! उसके तीन हिस्से कर लें! उसमें से एक हिस्सा घोडे या भैंसे को खिला दें! दूसरा हिस्सा कुष्ठ रोगी को दे दें और तीसरा हिस्सा अपने सिर से घडी की सूई से उल्टे तरफ तीन बार वार कर किसी चौराहे पर रख दें! यह प्रयोग 40 दिन तक करें! कारोबार में लाभ होगा! !! आगे प्रभु इच्छा !!

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|||||| 👉ज्योतिष में गन्धर्वयोग --- 〰️〰️〰️〰️〰️👾👾〰️〰️〰️〰️ 👉1- मंगल अपनी मूल त्रिकोण राशि में स्वगृही या मूल त्रिकोण राशि का होकर यदि रुचक योग बनाता हो तो व्यक्ति बड़ा धनवान और प्रसिद्ध होता है . 👉२- वृहस्पति यदि उच्च राशि का, स्वगृही या मूल त्रिकोण का हो केंद्र में तो हंस योग के कारण वह धनी , प्रसिद्ध और श्रेष्ठ जीवन जीने वाला होता है . 👉3- शुक्र यदि स्वगृही हो, मूल त्रिकोण का हो या उच्च राशि में होकर केंद्र में हो तो मालव्य योग बनता है . ऐसा जातक सुंदर और बहुत धनी होता है . 👉4- शनि यदि उच्च राशि का, स्वगृही या मूल त्रिकोण का हो केंद्र में तो शश योग केकारणवहराजनीतिज्ञ ,धनी , नौकर चाकर युक्त , प्रसिद्ध और राजा के तुल्य श्रेष्ठ जीवन जीने वाला होता है l . 👉5- नवमेश , एकादशेश , द्वितीयेश तीनों में से कोई एक चन्द्रमा से केंद्र में हो और लाभेश बृहस्पति हो अखंड साम्राज्य योग बनता है. ऐसा व्यक्ति गरीब कुल में जन्म लेकर भी महान ऐश्वर्यशाली और विख्यात होता है .l 👉६-सभी शुभ -पाप ग्रह यदि केंद्र में हो तो चतु:सार योग के कारण व्यक्ति महा भाग्यशाली , नेता, दीर्घ जीवी और धनवान बनता है .l 👉7- लग्न से 3-6-10-11- में सभी शुभ ग्रह हों तो वसुमती योग के कारण व्यक्ति खूब धन भोगता है . वह अपने भाग्य का निर्माता होता है l . 👉8- शुक्र का लग्न हो और लग्न से केंद्र में शुक्र और बृहस्पति हों तो गन्धर्व योग बनता है . यह जातक बड़ा प्रसिद्ध होता, विदेश में जाता है और धनी होता है . 👉9-नवमेश और चतुर्थेश परस्पर केंद्र में हो और लग्नेश बली हो या चतुर्थेश दशमेश होकर स्वगृही हो, मूल त्रिकोण या उच्च राशि का हो

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*कुंवारी कन्या के विवाह हेतु*

1। यदि कन्या की शादी में कोई रूकावट आ रही हो तो पूजा वाले 5 नारियल लें! भगवान शिव की मूर्ती या फोटो के आगे रख कर "ऊं श्रीं वर प्रदाय श्री नामः" मंत्र का पांच माला जाप करें फिर वो पांचों नारियल शिव जी के मंदिर में चढा दें! विवाह की बाधायें अपने आप दूर होती जांयगी! 2। प्रत्येक सोमवार को कन्या सुबह नहा-धोकर शिवलिंग पर "ऊं सोमेश्वराय नमः" का जाप करते हुए दूध मिले जल को चढाये और वहीं मंदिर में बैठ कर रूद्राक्ष की माला से इसी मंत्र का एक माला जप करे! विवाह की सम्भावना शीघ्र बनती नज़र आयेगी !! आगे प्रभु इच्छा !!

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विदेश यात्रा

कुंडली में अष्टम भाव नदी या समुद्र स्थान है। नवम भाव समुद्र पार पहुंचाने को प्रकट करता है। बारह भाव , नवम भाव भाव से चौथा होने से समुंदर पार के घरों (नगरों) से संबंधित है। आता नवम तथा द्वादश भाव में चर राशि हो और उनके स्वामी भी चर राशि में हो तो विदेश यात्रा के योग बनते हैं। इसके अलावा अन्य योगों को भी देखा जाना चाहिए। 1 नवमेश एवं लग्नेश अपने-अपने भाव में हो, अर्थात लग्नेश लग्न में तथा नवमेश नवा में ही हो। 2 नवमेश,लग्न में तथा लग्नेश नवम भाव में हो। 3 जिन भावों में नवमेश कथा दशमेश स्थित हो, उन भावों के स्वामी भी चर राशि में हो। 4 चंद्रमा चर राशि में हो तथा नवम एवं द्वादश भाव से संबंधित हो। 5 लग्न एवं लग्नेश चर राशि में हो तथा चर राशि में स्थित ग्रह से दृष्ट हो।

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6👉 जो लोग हस्ताक्षर करते समय नाम का पहला अक्षर थोड़ा बड़ा और पूरा उपनाम लिखते हैं, वे अद्भुत प्रत…

6👉 जो लोग हस्ताक्षर करते समय नाम का पहला अक्षर थोड़ा बड़ा और पूरा उपनाम लिखते हैं, वे अद्भुत प्रतिभा के धनी होते हैं। ऐसे लोग जीवन में सभी सुख-सुविधाएं प्राप्त करते हैं। ईश्वर में आस्था रखने वाले और धार्मिक कार्य करना इनका स्वभाव होता है। ऐसे लोगों का वैवाहिक जीवन भी सुखी होता है। 7👉 जिन लोगों के सिग्नेचर मध्यम आकार के अक्षर वाले, जैसी उनकी लिखावट है, ठीक वैसे ही हस्ताक्षर हो तो व्यक्ति हर काम को बहुत ही अच्छे ढंग से करता है। ये लोग हर काम में संतुलन बनाए रखते हैं। दूसरों के सामने बनावटी स्वभाव नहीं रखते हैं। जैसे ये वास्तव में होते हैं, ठीक वैसा ही खुद को प्रदर्शित करते हैं। 8👉 जो लोग अपने हस्ताक्षर को नीचे से ऊपर की ओर ले जाते हैं, वे आशावादी होते हैं। निराशा का भाव उनके स्वभाव में नहीं होता है। ऐसे लोग भगवान में आस्था रखने वाले होते हैं। इनका उद्देश्य जीवन में ऊपर की ओर बढ़ना होता है। इस प्रकार हस्ताक्षर करने वाले व्यक्ति अन्य लोगों का प्रतिनिधित्व करने की इच्छा रखते हैं। 9👉 जिन लोगों के हस्ताक्षर ऊपर से नीचे की ओर जाते हैं, वे नकारात्मक विचारों वाले हो सकते हैं। ऐस लोग किसी भी काम में असफलता की बात पहले सोचते हैं। 10👉 जिन लोगों के हस्ताक्षर एक जैसे लयबद्ध नहीं दिखाई देते हैं, वे मानसिक रूप से अस्थिर होते होते हैं। इन्हें मानसिक कार्यों में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। साथ ही, इनके विचारों में परिवर्तन होते रहते हैं। ये लोग किसी एक बात पर अडिग नहीं रह सकते हैं। 11👉 जिन लोगों के हस्ताक्षर सामान्य रूप से कटे हुए दिखाई देते हैं, वे नकारात्मक विचारों वाले होते हैं। इन्हें किसी भी कार्य में असफलता पहले नजर आती है। इसी वजह से नए काम करने में इन्हें कई परेश

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*हस्ताक्षर से जानिये आपका व्यक्तित्व*

📝✏📝✏📝✏📝✏📝✏📝✏ 1👉 जो लोग हस्ताक्षर में सिर्फ अपना नाम लिखते हैं, सरनेम नहीं लिखते हैं, वे खुद के सिद्धांतों पर काम करने वाले होते हैं। आमतौर पर ऐसे लोग किसी और की सलाह नहीं मानते हैं, ये लोग सुनते सबकी हैं, लेकिन करते अपने मन की हैं। 2👉 जो लोग जल्दी-जल्दी और अस्पष्ट हस्ताक्षर करते हैं, वे जीवन में कई प्रकार की परेशानियों का सामना करते हैं। ऐसे लोग सुखी जीवन नहीं जी पाते हैं। हालांकि, ऐसे लोगों में कामयाब होने की चाहत बहुत अधिक होती है और इसके लिए वे श्रम भी करते हैं। ये लोग किसी को धोखा भी दे सकते हैं। स्वभाव से चतुर होते हैं, इसी वजह से इन्हें कोई धोखा नहीं दे सकता। 3👉 कुछ लोग हस्ताक्षर तोड़-मरोड़ कर या टुकड़े-टुकड़े या अलग-अलग हिस्सों में करते हैं, हस्ताक्षर के शब्द छोटे-छोटे और अस्पष्ट होते हैं जो आसानी से समझ नहीं आते हैं। सामान्यत: ऐसे लोग बहुत ही चालाक होते हैं। ये लोग अपने काम से जुड़े राज किसी के सामने जाहिर नहीं करते हैं। कभी-कभी ये लोग गलत रास्तों पर भी चल देते हैं और किसी को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। 4👉 जो लोग कलात्मक और आकर्षक हस्ताक्षर करते हैं, वे रचनात्मक स्वभाव के होते हैं। इन्हें किसी भी कार्य को कलात्मक ढंग से करना पसंद होता है। ऐसे लोग किसी न किसी कार्य में हुनरमंद होते हैं। इन लोगों के काम करने का तरीका अन्य लोगों से एकदम अलग होता है। ऐसे हस्ताक्षर वाले लोग पेंटर या कलाकार भी हो सकते हैं। 5👉 कुछ लोग हस्ताक्षर के नीचे दो लाइन खींचते हैं। ऐसे सिग्नेचर करने वाले लोगों में असुरक्षा की भावना अधिक होती है। किसी काम में सफलता मिलेगी या नहीं, इस बात का संदेह सदैव रहता है। पैसा खर्च करने में इन्हें काफी बुरा महसूस

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वास्तु टिप्स

घर पर घर की 🔑 चाबियाँ रखने के लिए यहां कुछ उपयोगी वस्तुएं हैं: मुख्य स्टैंड को सुरक्षित स्थान पर रखा जाना चाहिए, अधिमानतः मास्टर बेडरूम में। *इसे कमरे के उत्तर या पूर्व कोने में रखा जाना चाहिए।* हमेशा एक उचित कुंजी स्टैंड या कुंजी धारक में कुंजियां रखें। इसे खाने-पीने की मेज, कुर्सी या बच्चों के कमरे पर लापरवाही नहीं छोड़ना चाहिए क्योंकि यह नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित कर सकता है। *अवांछित 🗝️कुंजियों को धातु अव्यवस्था के रूप में माना जाता है इससे परिवार में धन की कमी हो सकती है धातु की 🔑चाबी का उपयोग करके धातु की चाबियों की ऊर्जा को संतुलित करने के लिए सिफारिश की जाती है।* जंग लगा या टूटा हुआ 🔓 ताला और 🔐 चाबी घर में नहीं रखनी चाहिए और इसे तुरंत त्याग दिया जाना चाहिए।* ॥संपर्क॥ अमदावाद

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𝗠𝗔𝗛𝗔𝗦𝗛𝗜𝗩𝗥𝗔𝗧𝗥𝗜 ( 𝗠𝗥𝗜𝗧 𝗦𝗔𝗡𝗝𝗘𝗘𝗩𝗔𝗡𝗜 𝗠𝗔𝗡𝗧𝗥𝗔 )

Maha Shivaratri is a festival in Hinduism annually observed in honour of Lord Shiva which also known as 'Padmarajarathri' and 'The Great Night of Shiva'. On this day devotees worship Lord Shiva, observe a strict fast and do various religious activities to please Lord Shiva. But remember only one person in the Entire universe was having the MRIT-SANJEEVANI Vidya & he is none other then SHUKRACHARYA. ♣️ MANTRA -- ऊँ हौं जूं स: ऊँ भूर्भुव: स्व: ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे ऊँ तत्सर्वितुर्वरेण्यं ऊँ सुगन्धिंपुष्टिवर्धनम ऊँ भर्गोदेवस्य धीमहि ऊँ उर्वारूकमिव बंधनान ऊँ धियो योन: प्रचोदयात ऊँ मृत्योर्मुक्षीय मामृतात ऊँ स्व: ऊँ भुव: ऊँ भू: ऊँ स: ऊँ जूं ऊँ हौं ऊँ In Hinduism there are in all 33 Main Devtas.. The above Mantra has the Shakti of all 33 Devtas , that makes it a MRIT-SANJEEVANI Mantra. 8 VASU 11 RUDRA 12 ADITYA 1 PRAJAPATI 1 VASHAT OM So at of MAHASHIVRATRI chant the Above Mantra as much as Possible to get the Blessings of Lord Shiva. You will get freed from all your Major problems. This is my Personal Opinion. Rest God is Great. ( Atleast Chant it for 108 times OR Maximum as per your wish ) BHAGWAN KI LEELA, BHAGWAN HI JAANE .....

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बसंत पंचमी का महत्व व मुहूर्त !!

माघ माह के शुक्लपक्ष के पंचमी तिथि को बसंत पंचमी के रूप में जाना जाता है,इस दिन अज्ञानता के अंधकार को खत्म करने के लिए ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा होती है। विशेष तौर पर इस दिन विद्यार्थी मां आराधना कर विद्या का आर्शीवाद मांगते हैं।इस वर्ष बसंत पंचमी अर्थात सरस्वती पूजा 16 फरबरी 2021 दिन मंगलवार को मनाई जा रही है ।ज्योतिष के लिहाज से बसंत पंचमी के दिन बन रहे शुभ योग, सर्वार्थ सिद्ध योग एवं शुभ रवि योग इस बार की बसंत पंचमी को खास बनाएंगे। मंगलवार का दिन होने के कारण भी इस बार बसंत पंचमी मंगलकारी होगी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना करने के बाद उन्होंने देखा कि पूरे ब्रह्मांड में सन्नाटा पसरा हुआ है और हर जगह खामोशी छाई हुई है तब ब्रह्माजी ने अपने कमंडल से जल छिड़का और इससे एक सुंदर स्त्री चार भुजाओं के साथ प्रकट हुई। उस देवी ने बह्माजी को प्रणाम किया। देवी के हाथ में एक वीणा थी, जिसे ब्रह्माजी ने बजाने के लिए कहा। जब उन्होंने वीणा बजाई तो उसकी आवाज इतनी मधुर थी कि सृष्टि में स्वर आ गया। इससे सभी जीवों को आवाज मिली। सभी प्राणी एक-दूसरे की भावनाओं को समझ पाए। यह देख ब्रह्माजी ने उस देवी को सरस्वती नाम दिया। इसके बाद से ही यह दिन वसंत पंचमी के तौर पर मनाया जाता है। बसंत पंचमी के दिन विशेषकर पीले वस्त्र ही धारण करना शुभ माना जाता है। यह रंग ऊर्जा और ज्ञान का प्रतिनिधित्व करता है। बसंत पंचमी के त्योहार के साथ ही बसंत के मौसम का आगमन शुरू हो जाता है। बसंत पंचमी 2021 तिथि व शुभ मुहूर्त:- इस साल बसंत पंचमी 16 फरवरी दिन मंगलवार को मनाई जाएगी। पंचमी तिथि 16 फरवरी को सुबह 3.36 मिनट से शुरू होकर 17 फरवरी को सुबह 5.46 बजे

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जानिये किन लोगों को शनिदेव बनाते है धनवान....

🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸 शनिदेव की अपने पिता सूर्य से अत्यधिक दूरी के कारण यह प्रकाशहीन हैं। इसी कारण लोग शनिदेव को अंधकारमयी, भावहीन, गुस्सैल, निर्दयी और उत्साहहीन भी मान बैठते हैं परंतु शनि ग्रह ईमानदार लोगों के लिए यश, धन, पद और सम्मान का ग्रह है। शनि संतुलन एवं न्याय के ग्रह हैं। शनि अर्थ, धर्म, कर्म और न्याय का प्रतीक हैं। शनि ही धन-संपत्ति, वैभव और मोक्ष भी देते हैं। कहते हैं शनि देव पापी व्यक्तियों के लिए अत्यंत कष्टकारक हैं। शनि की दशा आने पर जीवन में कई उतार-चढ़ाव आते हैं, जिससे जीवन पूरी तरह से डगमगा सकता है परंतु शनि कुछ लोगों के अत्यंत शुभ और श्रेष्ट फल देता है।आइए जानते हैं शनि किन लोगों को धनी बनाता है। * जो लोग अपने हाथ-पांव के नाखून निरंतर अंतराल पर काटते हैं व नाखुनों में मैल नहीं जमने देते शनि उनका सैदेव कल्याण करते हैं। * जो लोग पौष माह में गरीबों को काले चने, काले तिल, उड़द, काले कपड़े आदि का नि:स्वार्थ दान करते हैं शनि उनसे प्रसन्न रहते हैं। * जो लोग जेष्ठा माह में धूप से बचने के लिए काले छातों का दान करते हैं शनिदेव उन पर अपनी छत्र छाया बनाए रखते हैं। * जो लोग कुत्तों की सेवा करते हैं अथवा कुत्तों को भोजन देते हैं और उन्हें सताते नहीं हैं शनिदेव उन्हें कष्टों से मुक्ति देते है। * जो लोग नेत्रहीनों को राह दिखाकर उनका मार्ग प्रशस्त करते हैं शनिदेव उनके लिए उन्नति के मार्ग खोलते हैं। * जो लोग शनिवार का उपवास रखकर अपने हिस्से का भोजन गरिबों को दान करते हैं शनि उनके भण्डार भरते हैं। * जो लोग मछली का सेवन नहीं करते तथा मछलियों को दाना डालते हैं शनिदेव उनसे सदैव प्रसन्न रहते हैं।

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