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मोती :-चंद्रमा के प्रकोप से बचने के लिए मोती उपयोगी माना गया है.

मोती अत्म-विश्वास बढ़ाता है. जब आप किसी भी कार्य को आत्म-विश्वास के साथ करते हैं तो आप सफलता की नहीं, सफलता आपका पीछा करती है. मोती धारण करने से आपकी मानसिक शांति बनी रहती है और व्यर्थ की चिंताओं से बचते हैं. इसको हृदय, नेत्र से संबंधित रोगों में भी गुणकारी माना जाता है.

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किस बीमारी में पहनें कौन-सा रत्न, जानिए 20 बेशकीमती रत्नों के बारे में

---‐-----‐-------------‐----------------------‐ 1 पन्ना - अच्छी स्मरण शक्ति के लिए धारण करें। 2 नीलम - गठिया, मिर्गी, हिचकी एवं नपुंसकता को नष्ट करता है। 3 फिरोजा-दैविक आपदाओं से बचाने के लिए फिरोजा धारण करें। 4 मरियम - बवासीर या बहते हुए रक्त को रोकने के लिए। 5 माणिक - रक्त वृद्धि के लिए। 6 मोती - तनाव व स्नायु रोगों के लिए। 7 किडनी स्टोन -किडनी रोग निवारण के लिए। 8 लाड़ली-हृदय रोग, बवासीर एवं नजर रोग के लिए धारण कर सकते हैं। 9 मूंगा, मोती - मुंहासों के लिए धारण करें। 10 पन्ना, नीलम, लाजवर्त-पेप्टीक अल्सर में उपयोगी है। 11 पुखराज,लाजावर्त्त, मूनस्टोन - दांतों के लिए 12 माणिक, मोती, पन्ना - सिरदर्द के लिए। 13 गौमेद या मून स्टोन -गले की खराबी के लिए। 14 माणिक, मूंगा, पुखराज - सर्दी, खांसी, बुखार जिसे बार-बार होता है, वह धारण करें। 15 मूंगा, मोती, पुखराज, फिरोजा- दुर्घटना से बचने के लिए...या बार-बार दुर्घटना होने पर धारण करें। 16 तांबे की चेन - कूकर खांसी के लिए 17 मूंगा, मोती, पन्ना -मूंगा, मोती, पन्ना एक ही अंगूठी में मोतियाबिंद को नष्ट करने के लिए धारण करें। 18 मूंगा, पुखराज- कब्ज मुक्ति के लिए। 19 पन्ना, पुखराज, मूंगा-पन्ना, पुखराज, मूंगा,एक ही अंगूठी में ब्रेन ट्यूमर के लिए धारण करें। 20 मोती, पुखराज - किस बीमारी में पहनें कौन-सा रत्न, जानिए 20 बेशकीमती रत्नों के बारे में ---‐-----‐-------------‐----------------------

किस बीमारी में पहनें कौन-सा रत्न, जानिए 20 बेशकीमती रत्नों के बारे में post imageRead full post

अनुच्छेद-३

आपकी शौक ही आपकी समस्या हो सकती है जाने कैसे ज्योतिष के नजरिऐ से जो कि प्रमाणित है १-अगर आप सामान्यतः झुठ का सहारा लेते हैं और गले में काला धागा है तो निश्चय बदनामी होगी. २-अगर आप गले में लाल धागा पहने है तो आपको सामान्य से अधिक गिस्सा होगा, ३-गले मै सोने की चैन आपको धन लाभ करेगा लेकिन अहम भावना से सतर्क रहें, ४-गले में चांदी पहनने से आपको घर से बाहर रहने के योग बनने लगते है अतः घर के इच्छुक इसपर ध्यान दें, ५-गले में तांबे पहनने से आपको सत्यवादिता मे सहायता मिलती है परन्तु इसके साथ ही झुठ पर काबु रखें नहीं तो एक्सीडेंट हो सकता है, ६-कुछ लोग पैर में काले धागे पहनते है यह ठिक है लेकिन शनि देव की इज्जत करने से ही लाभ होगा अन्यथा पैर से चोट के निसान गायब नहीं होंगे, ७-काले लाल एवं सफेद कपड़े जहां सुन्दरता के पुरक है वहीं यह पहनने वाले के उपर अपना नकरात्मक एवं सकरात्मक प्रभाव भी तुरन्त दिखाते है, ८-गोल्डेन काली एवं सफेद घड़ी हमेसा दिन के अनुसार एवं अपनें ग्रह चाल देख कर ही खरिदें अन्यथा सौक कम और अपमानित ज्यादा करतें है..

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*मत परेशान हो मस्त रहो व्यस्त रहो क्योंकि*

*1. चालीस साल की अवस्था में "उच्च शिक्षित" और "अल्प शिक्षित" एक जैसे ही होते हैं।* *2. पचास साल की अवस्था में "रूप" और "कुरूप" एक जैसे ही होते हैं। (आप कितने ही सुन्दर क्यों न हों झुर्रियां, आँखों के नीचे के डार्क सर्कल छुपाये नहीं छुपते*) *3. साठ साल की अवस्था में "उच्च पद" और "निम्न पद" एक जैसे ही होते हैं।(चपरासी भी अधिकारी के सेवा निवृत्त होने के बाद उनकी तरफ़ देखने से कतराता है)* *4. सत्तर साल की अवस्था में "बड़ा घर" और "छोटा घर" एक जैसे ही होते हैं। (घुटनों का दर्द और हड्डियों का गलना आपको बैठे रहने पर मजबूर कर देता है, आप छोटी जगह में भी गुज़ारा कर सकते हैं)* *5. अस्सी साल की अवस्था में आपके पास धन का "होना" या "ना होना" एक जैसे ही होते हैं। ( अगर आप खर्च करना भी चाहें, तो आपको नहीं पता कि कहाँ खर्च करना है)* *6. नब्बे साल की अवस्था में "सोना" और "जागना" एक जैसे ही होते हैं। (जागने के बावजूद भी आपको नहीं पता कि क्या करना है).* *जीवन को सामान्य रुप में ही लें क्योंकि जीवन में रहस्य नहीं हैं जिन्हें आप सुलझाते फिरें।* *आगे चल कर एक दिन हम सब की यही स्थिति होनी है इसलिए चिंता, टेंशन छोड़ कर मस्त रहें स्वस्थ रहें।* *यही जीवन है और इसकी सच्चाई भी 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🌹🌹

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*(3) शुभ दिन (Lucky Day ) ---*

जो ग्रह दशम या एकादश भाव के सूचक अपने कॉम्बो में देता है वह ग्रह सर्वाधिक शुभ है उस दिन किसी भी तरह का व्यापार या धन से जुड़ा काम या कुछ भी अच्छा काम किया जा सकता है । *वाहन का रंग कोनसा ले ---* जो ग्रह किसी भी तरह से ( 4 & 8 ) , ( 4 , 8 & 12 ) , ( 8 & 12 ) का कॉम्बो दे रहा है उस ग्रह का जो भी रंग हो कभी भी उस रंग का वाहन न लेवे । वाहन में हमेशा शनि के रंग को महत्वता देवे अगर यह बुरा सूचक न दिया हो तो शनि - black/blue/grey *घर का रंग कोनसा हो ---* जो ग्रह 3 , 5 , 7 , 9 & 11 जैसे भाव की जोड़ी बनाकर रखता है उस रंग का चयन घर मे करना चाहिए , घर मे हमेशा शुक्र/गुरु के रंग को प्रथमिकता देवे अगर यह अछे सूचक दे तो--- शुक्र - सफेद गुरु - हल्का ऑरेंज या लाइट yellow 🟨🟧🟩🟨🟧🟩🟨🟧🟩🟨

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*ग्रह कैसे खराब फल देते हैं*

हमारी मुश्किलों के हल निकलते नहीं, क्योंकि माँ के चरण स्पर्श कर घर से निकलते नहीं..... *चन्द्र खराब* काम हमारे बनते नहीं, क्योंकि पिता की बात हम कभी सुनते नहीं..... *सूर्य खराब* यार दोस्त भी काम आता नहीं, सगा भाई हमें फूटी आँख भाता नहीं..... *मंगल खराब* व्यापार में सदा ही होता है घाटा, क्योंकि बुआ बहन से हम रखते नहीं कोई नाता..... *बुध खराब* समाज सोसायटी में हमारी कोई मान मर्यादा नहीं, क्योंकि घर के बड़े बजुर्गों की इज्जत करना हमें आता नहीं..... *गुरु खराब* बरकत हमारे घर में आती नहीं, पराई नार पर नजर रखते हैं, पत्नी हमें सुहाती नहीं..... *शुक्र खराब* मौके पर आकर सब काम बिगड़ जाते हैं, गरीबों का हक हम अक्सर खा जाते हैं..... *शनि खराब* बुरे समय में जब घर में अक्सर झगड़े होने लगते है, अपनों से ज्यादा हमें पराये अच्छे लगते है..... *राहू खराब* दूसरों की सफलता से हम जलते हैं और भगवान को कोसते हुए अपने हाथ मलते है..... *केतु खराब*

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*गायत्री मंत्र कब ज़रूरी है...*

सुबह उठते वक़्त 8 बार, अष्ट कर्मों को जीतने के लिए l भोजन के समय 1 बार अमृत समान भोजन प्राप्त होने के लिए l बाहर जाते समय 3 बार समृद्धि सफलता और सिद्धि के लिए l मन्दिर में 12 बार प्रभु के गुणों को याद करने के लिए l छींक आए तब गायत्री मंत्र उच्चारण 1 बार अमंगल दूर करने के लिए l सोते समय 7 बार सात प्रकार के भय दूर करने के लिए l कृपया सभी बन्धुओं को प्रेषित करें... 🙏🏻 *"ॐ"* ओउम् तीन अक्षरों से बना है... अ+उ+म्.. *"अ"* का अर्थ है उत्पन्न होना, *"उ"* का तात्पर्य है उठना, उड़ना अर्थात् विकास, *"म"* का मतलब है मौन हो जाना अर्थात् "ब्रह्मलीन" हो जाना। ॐ सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति और पूरी सृष्टि का द्योतक है। ॐ का उच्चारण शारीरिक लाभ प्रदान करता है। जानीए.... ॐ कैसे है स्वास्थ्यवर्द्धक और अपनाएं आरोग्य के लिए ॐ के उच्चारण का मार्ग... 1. ॐ और थायराॅयडः ॐ का उच्‍चारण करने से गले में कंपन पैदा होती है जो थायरायड ग्रंथि पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। 2. ॐ और घबराहटः अगर आपको घबराहट या अधीरता होती है तो ॐ के उच्चारण से उत्तम कुछ भी नहीं। 3. ॐ और तनावः यह शरीर के विषैले तत्त्वों को दूर करता है, अर्थात तनाव के कारण पैदा होने वाले द्रव्यों पर नियंत्रण करता है। 4. ॐ और खून का प्रवाहः यह हृदय और ख़ून के प्रवाह को संतुलित रखता है। 5. ॐ और पाचनः ॐ के उच्चारण से पाचन शक्ति तेज़ होती है। 6. ॐ लाए स्फूर्तिः इससे शरीर में फिर से युवावस्था वाली स्फूर्ति का संचार होता है।

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𝗦𝗛𝗔𝗥𝗔𝗗 𝗣𝗨𝗥𝗡𝗜𝗠𝗔 ( 𝟯𝟬𝘁𝗵 𝗢𝗖𝗧 𝟮𝗼𝟮𝗼 )

𝗙𝗢𝗥 𝗗𝗘𝗕𝗧 𝗙𝗥𝗘𝗘 𝗟𝗜𝗙𝗘 Today many people are suffering due to debts on them. So to have Debt free Life kindly do the Following Remedy during Sharad Purnima. ♠️ Go to some PEEPAL tree at night after sunset. Take Milk & Ghee diya with you. First Lit the Diya near the tree & than pour the milk on the tree from all sides while doing Pradikshina. Pray that all your Debts should get cleared out soon.

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*दिवाली की रात में कहां-कहां दीपक लगाने चाहिए।*

*👉🏿1- पीपल के पेड़ के नीचे दीपावली की रात एक दीपक लगाकर घर लौट आएं। दीपक लगाने के बाद पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए। ऐसा करने पर आपकी धन से जुड़ी समस्याएं दूर हो सकती हैं।* *👉🏿2- यदि संभव हो सके तो दिवाली की रात के समय किसी श्मशान में दीपक लगाएं। यदि यह संभव ना हो तो किसी सुनसान इलाके में स्थित मंदिर में दीपक लगा सकते हैं।* *👉🏿3- धन प्राप्ति की कामना करने वाले व्यक्ति को दीपावली की रात मुख्य दरवाजे की चौखट के दोनों ओर दीपक अवश्य लगाना चाहिए।* *👉🏿4- हमारे घर के आसपास वाले चौराहे पर रात के समय दीपक लगाना चाहिए। ऐसा करने पर पैसों से जुड़ी समस्याएं समाप्त हो सकती हैं।* *👉🏿5- घर के पूजन स्थल में दीपक लगाएं, जो पूरी रात बुझना नहीं चाहिए। ऐसा करने पर महालक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।* *👉🏿6- किसी बिल्व पत्र के पेड़ के नीचे दीपावली की शाम दीपक लगाएं। बिल्व पत्र भगवान शिव का प्रिय वृक्ष है। अत: यहां दीपक लगाने पर उनकी कृपा प्राप्त होती है।* *👉🏿7- घर के आसपास जो भी मंदिर हो वहां रात के समय दीपक अवश्य लगाएं। इससे सभी देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त होती है।* *👉🏿8- घर के आंगन में भी दीपक लगाना चाहिए। ध्यान रखें यह दीपक भी रातभर बुझना नहीं चाहिए।* *👉🏿9- घर के पास कोई नदी या तालब हो तो बहा पर रात के समय दीपक अवश्य लगाएं। इस से दोषो से मुक्ति मिलती है !* *👉🏿10- तुलसी जी और के पेड़ और सालिगराम के पास रात के समय दीपक अवश्य लगाएं। ऐसा करने पर महालक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।* *👉🏿11- पित्रो का दीपक गया तीर्थ के नाम से घर के दक्षिण में लगाये ! इस से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।लक्ष्मी प्राप्ति के सूत्र :-*

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*‼️घर मे कुत्ता पालने के विषयमे....‼️*

आवारा कुत्ते को भोजन देने का फल शास्त्रों ने बहुत ही अधिक बताया और साथ ही पालतू कुत्तों के पालन से भी बारह वर्षों तक सब प्रकार के एश्वर्य-प्रगति देखने को मिलता है पर बारहवें वर्ष के पश्चात घर में कलह-अशांति, केश-मुकदमा तथा बीसवें वर्ष 'सर्वस्व' से भी हाथ धोना पड़ सकता है इसलिए घर में कुत्ता पालन न करें। जब युधिष्टिर ने पूछा कि यह कुत्ता मेरे साथ यहां तक चलकर आया तो मै इस कुत्ते को अपने साथ स्वर्ग क्यों नहीं ले जा सकता? *तब इंद्र ने कहा- "हे राजन कुत्ता पालने वाले के लिए स्वर्ग में स्थान नहीं है *कुत्ते से पालित घर मे किये गए यज्ञ, और पुण्य कर्म के फल को क्रोधवश नामक राक्षस उसका हरण कर लेते है। और तो और उस घर के व्यक्ति जो कोई दान, पुण्य, स्वाध्याय, हवन और कुवा-बावड़ी इत्यादि बनाने के जो भी पुण्य फल इकट्ठा होता है वह सब घर में कुत्ते की दृष्टि पड़ने मात्र से निष्फल हो जाता है। इस लिए कुत्ते का घर मे पालना निषिद्ध और वर्जित है। ज्योतिष के अनुसार भी कहा जाता है कि कुत्ता राहु ग्रह का प्रतीक है। अभिप्राय कुते को घर मे रखना राहु को अपने पास रखने के समकक्ष है। और राहु भक्तिभाव से दूर करता है।अगर आप सामर्थ्यवान हैं तो रोज पच्चीस-पचास या कुत्तों को भोजन दें, घर की रोज की अंतिम एक रोटी पे कुत्ते का अधिकार है इस पशु को भूलकर भी प्रताड़ित नही करना चाहिए और दूर से ही इसकी सेवा करनी चाहिए इससे अवधूत भगवान दत्तात्रेय और भैरव बाबा प्रसन्न होते हैं। कुत्तों के लिए घर के बाहर बाडा बनवाएं घर के अंदर नहीं, यह शास्त्र मत है। *अतिथि घर में, गाय आंगन में, और कुत्ता, कौवा, चींटी घर के बाहर ही फलदाई होते है।*

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*उपवास खोलते समय रखें 8 बातों का ध्यान*

व्रत-उपवास करने के सभी के अपने तरीके हैं। कोई निराहार-निर्जल व्रत करता है तो कोई एक समय भोजन करता है। व्रत कोई भी हो, लेकिन इसे समाप्त कर भोजन ग्रहण करते समय आपको कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए, ताकि स्वास्थ संबंधी परेशानी न हो। जानिए 8 जरूरी टिप्स – 1 एक बार में अधिक भोजन करने से बचें। घंटों तक खाली पेट रहने के बाद एकदम से पेट भरकर खाने से न केवल पेट दर्द की समस्या हो सकती है, बल्कि पाचन में भी परेशानी हो सकती है। 2 लंबे समय तक खाली पेट रहने के बाद पहले सिर्फ एक गिलास पानी पीना ही बेहतर होगा, ताकि पेट में ठंडक पहुंचे, और बाद में होने वाली पाचन संबंधी समस्याओं से बचा जा सके। 3 आप चाहें तो नींबू पानी, लस्सी, नारियल पानी य फिर मौसंबी का जूस ले सकते हैं। इससे आपको उर्जा महसूस होगी, और यह आपके पाचन तंत्र की कार्यप्रणाली को भी ठीक करने में सहायक होंगे। 4 व्रत के बाद प्रोटीन से भरपूर आहार लेने का प्रयास करें, आपके शरीर में उर्जा की पूर्ति करने में मदद करेगा। इसके लिए आप कुछ समय रूककर, पनीर व्यंजन या अंकुरित आहार ले सकती हैं। 5 उपवास के बाद तेल मसाले भोजन से बचने की कोशिश करें। मिठाईयों और तले हुए व्यंजनों से दूरी बनाए रखें, ताकि आपके पाचन तंत्र पर अधिक दबाव न पड़े, और स्वास्थ्य भी सही हो। 6 आप अगर चाहें तो मिले जुले आटे की रोटी बना सकते हैं। सब्जियों में लौकी, गिल्की, कद्दू, टमाटर, भिंडी, दाल व दही जैसे पाचक व हल्की चीजें ले सकते हैं। दिनभर उपवास के बाद आपका पाचनतंत्र इसे आसानी से पचा सकेगा। 7 आप चाहें तो दही के साथ फलों का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। इसके अलावा फ्रूट चाट भी एक बेहतरीन विकल्प है, जो आपका पेट भी भरेगा और शरीर को उर्ज

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*माला का जाप करते समय रखें ये सावधानियां!*

💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 *हमारी प्रार्थना करने के विभिन्न तरीके हैं, कभी सरल शब्दों से,कभी कीर्तन से और कभी मन्त्रों से. इनमे मंत्र सबसे ज्यादा प्रभावशाली मानते जाते हैं, क्योंकि ये मन को तुरंत एकाग्र कर देते हैं और शीघ्र प्रभाव देते हैं. हर मंत्र से अलग तरह का प्रभाव और शक्ति उत्पन्न होती है इसलिए मंत्र का जप करने के लिए अलग अलग तरह की मालाओं का प्रयोग किया जाता है. ऐसा करने से अलग अलग मन्त्रों की शक्ति का लाभ मिल सकता है. माला का प्रयोग इसलिए भी किया जाता है ताकि मंत्र जप की संख्या में त्रुटी न हो सके. माला में लगे हुये दानों को मनका कहा जाता है. सामान्यतः माला में १०८ मनके होते हैं परन्तु कभी कभी इसमें २७ अथवा ५४ मनके भी होते हैं.* *⚜️माला के प्रयोग की सावधानियां और नियम क्या हैं?* - माला के मनकों की संख्या कम से कम २७ या १०८ होनी चाहिए. हर मनके के बाद एक गाँठ जरूर लगी होनी चाहिए. - मंत्र जप के समय तर्जनी अंगुली से माला का स्पर्श नहीं होना चाहिए साथ ही सुमेरु का उल्लंघन भी नहीं होना चाहिए. - मंत्र जप के समय माला किसी वस्त्र से ढंकी होनी होनी चाहिए या गोमुखी में होनी चाहिए. - मंत्र जाप करने के पूर्व हाथ में माला लेकर प्रार्थना करनी चाहिए कि माला से किया गया मंत्र जाप सफल हो . - माला हमेशा व्यक्तिगत होनी चाहिए , दूसरे की माला का प्रयोग नहीं करना चाहिए. - जिस माला से मंत्र जाप करते हैं , उसे धारण नहीं करना चाहिए. *⚜️अलग अलग माला के प्रयोग के लाभ क्या हैं और क्या तरीका है?* *🚩- रुद्राक्ष की माला* - सामान्यतः किसी भी मंत्र का जाप रुद्राक्ष की माला से कर सकते हैं - शिव जी और उनके परिवार के लोगों के मन्त्र रुद्राक्ष पर विशेष लाभक

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