केतु_ग्रह
केतु_ग्रह 💢केतु ग्रह मंगल की तरह कार्य करता है। केतु की जिस भाव मे स्थिति व दृष्टि होती हैं उन को नुकसान करता है।केतु का रत्न लहसुनिया धारण करने से केतु की मारक क्षमता ज्यादा मिलती है। इसलिए लहसुनिया रत्न धारण करने से पहले विद्वान जन से कुंडली की जाँच करवा लेनी चाहिए। 👉कारक ➡ओपरेशन,चोट, एसिडेंट, बम विस्फोट 📍#लग्न मे केतु स्थित हो तो केतु की महादशा हो व अगर सूर्य लग्न, पंचम, नवम भाव मे हो तो माणिक व मूंगा रत्न धारण करना चाहिए। लहसुनिया नही पहने। 📍#द्वितीय भाव मे केतु होने से अगर लहसुनिया धारण करते तो आँखों के ओपरेशन की संभावना बढ़ा देता है। 📍#तृतीय भाव मे केतु होने से पराक्रम व साहस मे वृद्धि ,धनलाभ के लिए लहसुनिया रत्न धारण कर सकते है। 📍 #चतुर्थ भाव मे केतु होने से अचानक गुस्सा बढ़ जाता हैं मोती रत्न धारण करने से जातक का मन शांत रहता हैं। 📍#पंचम भाव मे केतु होने से उच्च शिक्षा व अचानक लाभ के लिए लहसुनिया धारण कर सकते है गर्भवती स्त्री रत्न धारण न करे उनको गर्भपात होने की संभावना बढ़ जाती हैं। 📍#छठे भाव मे केतु होने से धन व कर्म की हानि होती हैं लहसुनिया रत्न सोच विचार कर धारण करना चाहिए। 📍#सप्तम भाव में केतु शुभ ग्रह के साथ हो तो रत्न धारण कर सकते अन्यथा नही। विदेश यात्रा मे वृद्धि होती हैं। 📍#अष्टम भाव मे केतु हो तो लहसुनिया रत्न धारण नही करना चाहिए इससे चोट, एसिडेंट मे व बवासीर की बीमारी होने की संभावना बढ़ जाती हैं। 📍#नवम भाव में केतु शुभ ग्रह के साथ स्थित हो तो लहसुनिया व पुखराज रत्न धारण करने से शुभ फल की प्राप्ति होती हैं। 📍#दशम भाव मे केतु हो तो लहसुनिया रत्न धारण नही करे। धन का नुकसान होता है। 📍#एकादश भाव मे केतु का रत्न धारण किया जा सकता है