श्री हरि ॐ नारायण 🙏🌹
मानव जीवन ही परीक्षाओं से घिरा है। क्योंकि चौरासी लाख योनियों का चक्कर लगाते हुए। जीव जब भी किसी भी योनि में गर्भ धारण करता है । तब प्रभु से यही गुहार लगाता है प्रभु अब की बार मैं आप तक पहुंचकर अपने जीवन का अन्धकार रूपी अज्ञान को अवश्य ही समाप्त कर लूंगा।
पशु योनि में मनुष्य को सदैव ज्ञात रहता है कि उसने क्या क्या कर्म किए जिस कारण वह इस योनि को भोग रहा है। क्योंकि इस योनि में माया रूपी प्रभाव नहीं वो सभी प्रभु के अधीन है और हर वक्त यही प्रार्थना करते हैं कि अब कि जन्म जो मुझे मानव का मिले तो मैं अपनी तरणगति के लिए पूर्ण प्रयास रत रहूंगा।
लेकिन जैसे ही मानव योनि में प्रवेश मिलता है माया रूपी परीक्षा घेर लेती है और मनुष्य जठराग्नि की ज्वलंता से सब कुछ विस्मृत कर वैठता है और माया रूपी जाल में फंस जाता है।
माया जो मनुष्य की हर समय परीक्षा लेती है। जो विकल्पों के माध्यम से कर्म करवाती है इसीलिए सदैव ईश्वर के समीप रहे ताकि अच्छे कर्म करने का चुनाव कर सकें। पुण्य एकत्रित हो और ईश्वर मार्ग दिखाये