किस ग्रह से किस प्रकार का संन्यास योग
नौ ग्रहों में से राहु-केतु छाया ग्रह है इसलिए इन्हें हटाकर कुल सात ग्रह शेष बचते हैं। यदि व्यक्ति की कुंडली में प्रबल संन्यास योग हो और योग बनाने वाले ग्रहों में से जो ग्रह बलवान होता है उसके अनुसार व्यक्ति संन्यासी होता है। 1. संन्यास योग बनाने वाले ग्रहों में यदि सूर्य सबसे ज्यादा बलवान हो तो जातक पर्वत या नदी के किनारे रहने वाला, सूर्य और शक्ति का उपासक संन्यासी होता है। 2. यदि चंद्रमा बलशाली ग्रह हो तो जातक शैव सम्प्रदाय का संन्यासी बनता है और वह अपने गुरु के पदचिन्हों पर चलकर उच्च कोटि का साधक बनता है। 3. यदि बलशाली ग्रह मंगल हो तो जातक लाल वस्त्रधारी संन्यासी होता है। ऐसा व्यक्ति एकांतप्रिय और भिक्षावृति कर गुजारा करने वाला होता है। 4. बुद्ध बलशाली हो तो जातक विष्णु भक्त होता है, लेकिन वह तांत्रिक क्रियाओं का ज्ञाता होता है। ऐसे जातक को वाक सिद्धि भी प्राप्त हो जाती है। 5. बृहस्पति बलवान हो तो जातक भिक्षु, तपस्वी, धर्मशास्त्रों का ज्ञाता, यज्ञ यादि कर्मकांडों को करने वाला होता है। 6. शुक्र के बलवान होने पर जातक भ्रमण करने वाला, वैष्णव, व्रती होता है। 7. संन्यास योग बनाने वाले ग्रहों में यदि शनि प्रबल होता है तो जातक कठोर तपस्या करने वाला नागा साधु होता है। नोट : कुंडली में कौन-सा ग्रह बलवान है इसकी जानकारी के लिए कुंडली को दिखाकर कंफर्म किया जा सकता है।