चौथे भाव में स्थित शुक्र दो पत्नियों की संभावना को मजबूत करता है नहीं होगी तो एक्स्ट्रा मेरिटल अफ…
चौथे भाव में स्थित शुक्र दो पत्नियों की संभावना को मजबूत करता है नहीं होगी तो एक्स्ट्रा मेरिटल अफेयर की संभावना रहती है चौथा शुक्र एक वहम कायम रखता है कि कुछ ना हो तो भी दिखने में लोगो को रईस लगेगा जातक को वैसे धन भी देता है । यदि बृहस्पति दसम भाव में हो और शुक्र चौथे भाव में हो और जातक धार्मिक बनने की कोशिश करेगा तो हर तरफ से प्रतिकूल परिणाम मिलेंगे।कारण कि चौथा घर दसवें को देखता है इसलिये शुक्र बृहस्पति के मेल से शनि बनेगा ओर दसवें शनि वालों को या बृहस्पति वालों को धार्मिक होने के लिये मना करते हैं । यदि जातक ने कुएं के ऊपर छ्त बना रखी है या मकान बना रखा है तो चौथे भाव में बैठा शुक्र पुत्र प्राप्ति की संभावना को कमजोर करता है।कारण कि कुंआ पताल है छठा घर जो केतु का है ओर शुक्र चंद्र वैसे ही केतु नीच करते हैं तो केतु को ज्यादा छेड़ देंगे तो खराब करेगा नर संतान का कारक होने से दिक्कत देगा बुध से संबंधित व्यापार भी नुकशान देय होता है।कारण कि बुध शुक्र का मित्र ह मगर चंद्र का दुश्मन इसलिये बुध की कमाई घर में नुकसान देगी यदि जातक शराब पीता है तो शनि विनाशकारी प्रभाव देगा॥ मंगल से संबंधित व्यापार जातक के लिए फायदेमंद साबित होगा क्योंकि मंगल चंद्रमा का मित्र है ॥ चंद्रमा चलायमान है तो घूमने फिरने वाले काम ज्यादा रास आएंगे ॥ लग्न में गुरु हो ओर चौथे शुक्र हो तो सास बहू में किट किट होती रहेगी ॥