*रक्षाबंधन 3 अगस्त में है, 558 साल बाद सावन माह की पूर्णिमा पर गुरु और शनि अपनी-अपनी राशि में रहे…
*रक्षाबंधन 3 अगस्त में है, 558 साल बाद सावन माह की पूर्णिमा पर गुरु और शनि अपनी-अपनी राशि में रहेंगे वक्री* ============================ ✍🏻सोमवार 3 अगस्त को सावन माह की अंतिम तिथि पूर्णिमा है। इसी तिथि पर रक्षाबंधन मनाया जाता है। इस बार सुबह 9:29 बजे तक भद्रा रहेगी। भद्रा के बाद ही बहनों को अपने भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधना चाहिए। 9.29 के बाद पूरे दिन राखी बांध सकते हैं। । रक्षाबंधन पर गुरु अपनी राशि धनु में और शनि मकर में वक्री रहेगा।। ऐसा योग 558 साल पहले 1462 में बना था। उस साल में 22 जुलाई को रक्षाबंधन मनाया गया था। इस बार रक्षाबंधन पर राहु मिथुन राशि में, केतु धनु राशि में है। ✍🏻रक्षाबंधन पर सुबह जल्दी उठ जाना चाहिए। स्नान के बाद देवी-देवताओं की पूजा करें। *सबसे पहले इंद्राणी ने देवराज इंद्र को बांधा था रक्षासूत्र* असुरों ने स्वर्ग पर अधिकार कर लिया। देवराज इंद्र और सभी देवता इस समस्या को दूर करने के लिए देवगुरु बृहस्पति के पास पहुंचे। इंद्र ने देवगुरु से कहा कि मैं स्वर्ग छोड़कर नहीं जा सकता, असुरों ने हमें पराजित कर दिया, हमें फिर से युद्ध करना होगा। 👉🏻इंद्र की ये बातें इंद्राणी ने भी सुनी, तब उसने कहा कि कल सावन माह की पूर्णिमा है। मैं आपके लिए विधि-विधान से रक्षासूत्र तैयार करूंगी, उसे बांधकर आप युद्ध के लिए प्रस्थान करना, आपकी जीत अवश्य होगी। अगले दिन देवराज इंद्र रक्षासूत्र बांधकर असुरों से युद्ध करने गए और उन्होंने असुरों को पराजित कर दिया। तब से ही ये पर्व मनाया जाने लगा। 2:- शास्त्रों के अनुसार माँ लक्ष्मी जी ने राजा बली के लिए यह रक्षा सूत्र बाधा। ओर भगवान विष्णु जी राजा बली के द्वारपाल से मुक्त होकर के बापिस बैकुंठ आये।