विवाह में परेशानी या अधिक प्रयास के बाद विवाह ना होना और कब तक हो जाएगा जाने निश्चिंत समय .....
वैवाहिक जीवन के लिए मुख्य रूप से सप्तम भाव एवं द्वितीय भाव को भी देखा जाता है। विवाह के कारक शुक्र को देखा जाता है ।
इस कुंडली में सप्तम भाव के स्वामी मंगल स्वयं से द्वादश भाव में एवं रोग तथा शत्रु के भाव षष्ठ भाव में विराजमान है। पहला कारण हो गया ।
सप्तम भाव में राहु की दृष्टि है ऐसे योग में विवाह में बहुत ज्यादा विलंब होता है एवं वैवाहिक जीवन में मतभेद बना रहता है। द्वितीय भाव के स्वामी बुध अष्टम भाव में विराजमान है ।
रोजगार के लिए मुख्य रूप से दशम भाव को देखा जाता है और इस कुंडली में शनि राजयोग कारक ग्रह हैं....
शनि यहां अष्टम भाव में और बिल्कुल कमजोर स्थिति में मात्र एक अंश के हैं जिसके कारण रोजगार में पूर्ण रूप से सफलता प्राप्त नहीं हो रही है ।
आमदनी भाव का स्वामी गुरु स्वराशि में विराजमान हैं परंतु अंशबल में कमजोर है। राहु के साथ विराजमान हो कर चांडाल योग का निर्माण कर रहे हैं जिसके कारण आमदनी ठीक से नहीं हो पाती है ..
उपाय - मंगल बुध एवं शनि का मंत्र जाप करें। राहु से संबंधित दान तथा उपाय करें ।