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क्या आप बार-बार दुर्घटनाग्रस्त होते हैं..?

〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ शनि 〰️〰️ शनि का प्रभाव प्राय: नसों व हड्‍डियों पर रहता है। शनि की खराब स्थिति में नसों में ऑक्सीजन की कमी व ‍हड्‍डियों में कैल्शियम की कमी होती जाती है अत: वाहन-मशीनरी से चोट लगना व चोट लगने पर हड्‍डियों में फ्रैक्चर होना आम बात है। यदि पैरों में बार-बार चोट लगे व हड्‍डी टूटे तो यह शनि की खराब स्थिति को दर्शाता है। क्या करें :👉 शनि की शांति के उपाय करें। हनुमान चालीसा का पाठ करें। मद्यपान और माँसाहार से पूर्ण परहेज करें। नौकरों-कर्मचारियों से अच्छा व्यवहार करें। शनि न्याय का ग्रह है इसलिए न्याय का रास्ता अपनाएँ, परिवार से विशेषत: स्त्रियों से संबंध मधुर रखें। राहु 〰️〰️ राहु का प्रभाव दिमाग व आँखों पर रहता है। कमर से ऊपरी हिस्से पर ग्रह विशेष प्रभाव रखता है। राहु की प्रतिकूल स्थिति जीवन में आकस्मिकता लाती है। दुर्घटनाएँ, चोट-चपेट अचानक लगती है और इससे मनोविकार, अंधापन, लकवा आदि लगना राहु के लक्षण हैं। पानी, भूत-बाधा, टोना-टोटका आदि राहु के क्षेत्र में हैं। क्या करें :👉 गणेश जी व सरस्वती की आराधना करें। अवसाद से दूर रहें। सामाजिक संबंध बढ़ाएँ। रिस्क न लें। खुश रहें व बातें न छुपाएँ। मंगल 〰️〰️ मंगल हमारे शरीर में रक्त का प्रतिनिधि है। मंगल की अशुभ स्थिति से बार-बार सिर में चोट लगती है। खेलते-दौड़ते समय गिरना आम बात है और इस‍ स्थि‍ति में छोटी से छोटी चोट से भी रक्त स्राव होता जाता है। रक्त संबंधी बीमारियाँ, मासिक धर्म में अत्यधिक रक्त स्राव भी खराब मंगल के लक्षण हैं। अस्त्र-शस्त्रों से दुर्घटना होना, आक्रमण का शिकार होना इससे होता है। क्या करें :👉 मंगलवार का व्रत करें, मसूर की दाल का दान करें।

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आचार्य आनन्द जालान के अनुसार जिस जातिका की जन्म कुंडली के लग्न मे यदि कोई ग्रह बैठा है और वहीं ग्…

आचार्य आनन्द जालान के अनुसार जिस जातिका की जन्म कुंडली के लग्न मे यदि कोई ग्रह बैठा है और वहीं ग्रह पुरुष जातक की जन्म कुंडली के सप्तम भाव मे बैठा है और स्त्री जातिका के नवमांश कुंडली मे कहीं भी शुक्र ग्रह बैठा हो और पुरुष जातक के नवमांश कुंडली मे ठीक सातवे स्थान पर शुक्र ग्रह बैठा हो तो ये सबसे सर्वोत्तम कुंडली मिलान होगा ☺️ अर्थात स्त्री जातिका के नवमांश कुंडली मे कहीं भी शुक्र ग्रह बैठा हो सकता है और जिस पुरुष जातक से उस कन्या का विवाह करवाना हो तो उस पुरुष जातक की नवमांश कुंडली मे ठीक स्त्री जातिका के शुक्र ग्रह से पुरुष जातक अपनी कुंडली के सातवें स्थान पर यदि शुक्र ग्रह बैठा हो तो ये भाग्यशाली पति पत्नी को जोड़ा है ☺️ स्त्री का शुक्र ग्रह यदि दशवें घर मे हो तो पुरुष का शुक्र ग्रह चौथे घर मे होना चाहिए, इन्हे आप इस जोड़ी को लक्ष्मी नारायण व शिव शक्ति की जोड़ी कह सकते है

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पुर्नविवाह और शादी कब तक कहां और किस दिशा में होगा जाने अपने जन्म कुण्डली से योग संयोग ...

पुर्नविवाह मतलब दूसरा विवाह, पहली शादी किसी कारण खरब हो जाने के बाद दूसरी शादी ही पुनर्विवाह कहलाती हैं पुनर्विवाह होने के लिए कुंडली का सातवाँ घर,सातवे घर का स्वामी और लड़की लड़के के अनुसार विवाह सुख का कारक गुरु(लड़कियों के लिए) शुक्र(लड़को के लिए)बलवान होने से दूसरी शादी बहुत आसानी से हो जाती है इसके अलावा सातवे घर पर शुभ प्रभाव हो ग्रहों का तब भी दूसरी शादी हो जाती है, दूसरी शादी जब ही व्यक्ति करता है जब पहली शादी किसी तरह से खंडित हो जाये और शादी खंडित पाप या अशुभ ग्रह ही करते है तो जब अशुभ ग्रहों के प्रभाव सहित शुभ ग्रहों का प्रभाव भी होगा औऱ सातवाँ घर बलवान होगा तब दूसरी शादी भी हो जाती है पहली शादी खंडित होने के बाद, पहली शादी खंडित होने के कई कारण हो सकते है जैसे तलाक, जीवनसाथी की मृत्यु हो जाना, आपसी सहमति से अलग हो जान बिना तलाक आदि।अब कुछ उदाहरणों से बात करते है कब दूसरा विवाह(पुर्नविवाह)हो पाता है? मेष लग्न में जैसे कि सातवे घर का स्वामी शुक्र बनता है अब शुक्र यहाँ पीड़ित हो जैसे कमजोर शुक्र के ऊपर शनि की दृष्टि पड़े, साथ ही सातवे घर पर किसी अन्य क्रूर ग्रह कैसे रह केतु या मंगल की दृष्टि हो तब ऐसी स्थिति में पहली शादी खंडित हो जाएगी, लेकिन अब यही सातवें घर के स्वामी पर भाग्य के स्वामी गुरु साथ बैठा हो, जैसे कि सातवे घर स्वामी शुक्र की युति मेष लग्न में भाग्य के स्वामी गुरु ग्रह से होगी जैसे गुरु शुक्र एक साथ चौथे घर मे बैठ जाये या किसी भी शुभ घर मे और पीड़ित होंगे तब दूसरा विवाह हो जाए

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*🚩🚩2nd house in horoscope🚩🚩*

*🎪 2nd house relates to your sense of stability, how you make money in the world, and also your immediate environment. Your bank balance , fixed deposit, jewellary. It's a very physical and material realm that governs the five senses.* *🎪 2nd house is also associated with values, self-esteem and self-worth, income, and how we begin to feel at home in our bodies and environments.* *🎪 2nd house is also associated with increase in family ( by way of marriage or child birth etc. )* *🎪 2nd house is food one takes . 2nd house, which controls your food intake and impacts your diet the most*

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परमकल्याण के कारक शनिदेव

〰️〰️🌸〰️🌸〰️🌸〰️〰️ शनिदेव परमकल्याण कर्ता न्यायाधीश और जीव का परमहितैषी ग्रह माने जाते हैं। ईश्वर पारायण प्राणी जो जन्म जन्मान्तर तपस्या करते हैं, तपस्या सफ़ल होने के समय अविद्या, माया से सम्मोहित होकर पतित हो जाते हैं, अर्थात तप पूर्ण नही कर पाते हैं, उन तपस्विओं की तपस्या को सफ़ल करने के लिये शनिदेव परम कृपालु होकर भावी जन्मों में पुन: तप करने की प्रेरणा देता है। द्रेष्काण कुन्डली मे जब शनि को चन्द्रमा देखता है, या चन्द्रमा शनि के द्वारा देखा जाता है, तो उच्च कोटि का संत बना देता है। और ऐसा व्यक्ति पारिवारिक मोह से विरक्त होकर कर महान संत बना कर बैराग्य देता है। शनि पूर्व जन्म के तप को पूर्ण करने के लिये प्राणी की समस्त मनोवृत्तियों को परमात्मा में लगाने के लिये मनुष्य को अन्त रहित भाव देकर उच्च स्तरीय महात्मा बना देता है। ताकि वर्तमान जन्म में उसकी तपस्या सफ़ल हो जावे, और वह परमानन्द का आनन्द लेकर प्रभु दर्शन का सौभाग्य प्राप्त कर सके.यह चन्द्रमा और शनि की उपासना से सुलभ हो पाता है। शनि तप करने की प्रेरणा देता है। और शनि उसके मन को परमात्मा में स्थित करता है। कारण शनि ही नवग्रहों में जातक के ज्ञान चक्षु खोलता है।

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जन्मपत्रिका में राहु -केतु द्वारा निर्मित शुभाशुभ योग

〰🌼〰🌼〰🌼〰🌼〰🌼〰🌼〰🌼〰 1 अष्ट लक्ष्मी योग👉 जन्मांग में राहु छठे स्थान में और वृहस्पति केंद्र में हो तो अष्ट लक्ष्मी योग बनता हैं। इस योग के कारण जातक धनवान होता हैं और उसका जीवन सुख शांति के साथ व्यतीत होता हैं। 2 मोक्ष योग👉 जन्मांग में वृहस्पति और केतु का युति दृष्टि सम्बन्ध हो तो मोक्ष योग होता हैं। यदि केतु गुरु की राशी और वृहस्पति उच्च राशी कर्क में हो तो मोक्ष की सम्भावना बढ़ जाती हैं। 3 परिभाषा योग👉 तीसरे छठे, दसवे या ग्यारहवे भाव में राहु शुभ होकर स्थित हो तो परिभाषा योग का निर्माण करता हैं। ऐसा राहु जातक को कई प्रकार की परेशानियों से बचा लेता हैं। इनमे स्थित राहु दुसरे ग्रहों के अशुभ प्रभाव को भी कम करता हैं। 4👉 अरिष्ट भंग योग👉 मेष ,वृष या कर्क लग्न में राहु नवम, दशम या एकादश भाव में स्थित हो तो अरिष्ट भंग योग बनता हैं जो अपने नाम के अनुसार ही कई प्रकार के अरिष्टो का नाश करता हैं। 5 लग्न कारक योग👉 यदि लग्नेश अपनी उच्च राशी या स्वराशी में हो और राहु लग्नेश की राशी में स्थित हो तो लग्न कारक योग बनता हैं। यह योग भी जातक को शुभ फल प्रदान करता हैं। 6 कपट योग👉 जन्मांग में चौथे भाव में शनि और बारहवे भाव में राहु हो तो कपट योग बनता हैं ऐसे जातक पर विश्वास सोच समझकर करना चाहिए। 7 पिशाच योग👉 लग्न में चन्द्र और राहु (मतान्तर से राहु-शनि) स्थित हो तो पिशाच योग बनता हैं। ऐसे जातको को नजर दोष ,तंत्र कर्म ,उपरी बाधा के कारण परेशानी होती हैं इन्हे योग्य ज्योतिषाचार्य का परामर्श अवश्य समय रहते प्राप्त कर लेना चाहिए। 8 काल सर्प योग👉 जब राहु और केतु के मध्य सभी ग्रह आ जाये तो काल सर्प योग बनता हैं।

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सूर्य देव को अर्घ्य वैज्ञानिक एवं ज्योतिषीय लाभ

〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️ सूर्य को जल देना पुरानी परम्परा है, परन्तु किसी ने यह जानने का प्रयास किया की क्यूँ दिया जाता है सूर्य को जल? और क्या प्रभाव होता है इससे मानव शरीर पर? पूरी जानकारी के लिए कृपया अंत तक पढ़े, थोडा समय लग सकता है, परन्तु जानकारी महत्वपूर्ण है। सूर्य देव अलग अलग रंग अलग अलग आवर्तियाँ उत्पन्न करते हैं, अंत में इसका उल्लेख करूँगा, मानव शरीर रासायनिक तत्वों का बना है, रंग एक रासायनिक मिश्रण है। जिस अंग में जिस प्रकार के रंग की अधिकता होती है शरीर का रंग उसी तरह का होता है, जैसे त्वचा का रंग गेहुंआ, केश का रंग काला और नेत्रों के गोलक का रंग सफेद होता है। शरीर में रंग विशेष के घटने-बढने से रोग के लक्षण प्रकट होते हैं, जैसे खून की कमी होना शरीर में लाल रंग की कमी का लक्षण है। सूर्य स्वास्थ्य और जीवन शक्ति का भण्डार है| मनुष्य सूर्य के जितने अधिक सम्पर्क में रहेगा उतना ही अधिक स्वस्थ रहेगा। जो लोग अपने घर को चारों तरफ से खिडकियों से बन्द करके रखते हैं और सूर्य के प्रकाश को घर में घुसने नहीं देते वे लोग सदा रोगी बने रहते हैं। जहां सूर्य की किरणें पहुंचती हैं, वहां रोग के कीटाणु स्वत: मर जाते हैं और रोगों का जन्म ही नहीं हो पाता। सूर्य अपनी किरणों द्वारा अनेक प्रकार के आवश्यक तत्वों की वर्षा करता है और उन तत्वों को शरीर में ग्रहण करने से असाध्य रोग भी दूर हो जाते हैं। सूर्य पृथ्वी पर स्थित रोगाणुओं 'कृमियों' को नष्ट करके प्रतिदिन रश्मियों का सेवन करने वाले व्यक्ति को दीर्घायु भी प्रदान करता है। सूर्य की रोग नाशक शक्ति के बारे में अथर्ववेद के एक मंत्र में स्पष्ट कहा गया है कि सूर्य औषधि बनाता है,

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कुंडली में नीचभंग राजयोग कब बनता है? क्या यह योग नवमांश कुंडली में भी बनता है?

🌹🌹🌹🌹🌹🌹 कुंडली मे कोई ग्रह अपनी नीच राशि मे विराजमान हो तो नीच का ग्रह कहते है यदि ग्रह उसकी नीचता को भंग करता है तो नीचभंग राजयोग कहलाता है नीचता निम्न प्रकार से भंग हो सकती है- 1-यदि कोई ग्रह नीच राशि मे हो ,नीच राशि या उच्च राशि का स्वामी चन्द्र से केंद्र मे हो अर्थात 1,4,7,10 स्थान मे हो नीचभंग राजयोग वनता है 2- आचार्य आनन्द जालान के अनुसार यदि ग्रह नीच राशि मे हो उस राशि के स्वामी की युति या दृष्टी होने पर नीचभंग हो जाता है। 3- यदि ग्रह नीच राशि मे हो उस ग्रह नीच राशि -उच्च राशि का स्वामी दोनो मे से एक भी चन्द्र से केंद्र मे हो तो नीचभंग हो जाता है 4-यदि ग्रह नीच राशि का हो उच्च +नीच राशि का स्वामी परस्पर केन्द्र मे हो तो नीच भंग हो जाता है । 5- यदि कोई ग्रह नीच राशि मे हो नीच+उच्च राशि के स्वामी दोनो या एक लग्न से केंद्र मे हो तो नीचभंग हो जाता है राजयोग का निर्माण होता है । 6 - कुंडली में नीच राशि मे विद्यमान हो वह नवांश मे उच्च राशि मे विद्यमान होने पर नीचभंग हो जाता है राजयोग के फल प्रदान करता है। नीचभंग राजयोग जन्म कुंडली से ही विचारणीय होता है अन्य वर्ग कुंडली का उपयोग गहराई से अध्ययन के लिए किया जाता है जिसका आधार जन्म कुंडली ही होती है अतः योगो के लिए जन्म कुंडली को ही देखा जाना तर्क संगत है । नीचभंग राजयोग के फलस्वरूप प्रारंभ काल मे संघर्ष के बाद उत्तम सफलता प्राप्त होती है राजयोग का फल प्राप्त होता है।

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मिठाई की दुकान कौन कर सकते है?

🌹🌹🌹🌹🌹🌹 आज बात करते है अगर मिठाई की दुकान खोलने या करना चाहते है तो कौन लोग कर सकते है और किनके भाग्य में लिखी है मिठाई दुकान करना और मिठाई की दुकान करने से किनका होगा भाग्योदय और अच्छा धनलाभ आदि जन्मकुंडली/दशमांश कुंडली का दसवाँ भाव रोजगार/व्यापार का है तो दूसरा भाव खाने पीने बोलने मतलब मुहँ का होने से मिठाई का है तो 7वा भाव दुकानदारी का है तो बृहस्पति मिठाई का कारक ग्रह है तो बुध व्यापार का कारक ग्रह है साथ ही व्यापार में धन लाभ के लिए दूसरा और ग्यारहवा भाव है इसी कारण दूसरे और ग्यारहवे भाव और इनके स्वामियो का बलवान होना जरूरी है जिससे धन लाभ अच्छा हो और आमदनी भी अच्छी हो।। #अब जन्मकुंडली या दशमांश कुंडली मे दसवें भाव स्वामी या दसवे भाव या सम्बन्ध बलवान दूसरे भाव या बलवान दूसरे भाव स्वामी से बन रहा है और कही न कही इस दूसरे+दसवें भाव के सम्बंध में मिठास और मिठाई के कारक बृहस्पति का सम्बन्ध भी बन रहा हैव्यापार कारक बुध बहुत बलवान स्थिति में है तब मिठाई की दुकान कर सकते है अब इनकम भाव/ग्यारहवा भाव और ग्यारहवें भाव स्वामी बलवान स्थिति में है तब अच्छी आमदनी मिठाई की दुकान से होगी।। आचार्य आनन्द जालान के अनुसार इसके अलावा 7वे भाव स्वामी बलवान होकर दूसरे भाव या दूसरे भाव स्वामी सहित ग्यारहवे भाव स्वामी /ग्यारहवें भाव से सम्बंध किये हुए है साथ ही इस सम्बन्ध में बृहस्पति का भी सम्बन्ध है साथ ही व्यापार का कारक ग्रह मतलब व्यापार कराने वाला ग्रह

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When to planet in first house.

Sun and moon: many sons will not be happy in regard to parents, subject to mental worries. Sun and Mars: unhappy about his father ,wicked, always wonder from place to place, mean. Sun and mercury: conveyances,wicked, ill reputed history , commits info act,forsaken by friends and relatives. Sun and Jupiter: little intelligence, looks ugly,a dance, ungreatful, thief and Julius. Sun and Venus: hates scholars, will not have many children, cruel, angrily,disposed, troubles others, fierce and dejected. Sun and Saturn: a simpleton,sick, given up by his relatives and no good qualities.

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🚩🚩 Aries 🚩🚩-

love, sex, & relationships 🎪 Aries natives need to feel the heat in the bedroom with any potential or long-term partner. 🎪 Aries, passionate sex, native is a form of creative expression. 🎪 Lord of Aries sign is Mars. It is about heat, drama, and intensity. This means that the Aries energy craves excitement over romance, passion over harmony. 🎪 Aries natives are so independent, they usually need a partner who will allow them to be their boldest, most fiery selves. 🎪Aries/Mars energy is also fiercely protective of loved ones and is all about advocating for those they care about. 🎪 Aries is welcome in everyone's life as a friend or a partner 🚩🚩 Jai Hanuman ji 🚩🚩

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कॉस्मेटिक दुकान काम कौन कर सकते है?

🌹🌹🌹🌹🌹🌹 कॉस्मेटिक शॉप मतलब सुंदरता से संबंधित प्रोड्क्टक समान।कॉस्मेटिक शॉप बड़े स्तर पर खोलने मे ही फायदा है आज कॉस्मेटिक शॉप खोलने से किनका अच्छा फायदा होगा इसी बारे में बात करते है?? शुक्र ग्रह कॉस्मेटिक वस्तुओं का कारक ग्रह है तो कुंडली का 5वा भाव कॉस्मेटिक चीजो का है तो 7वा भाव दुकानदारी का तो दसवाँ भाव रोजगार में बड़ी सफलता का है मतलब रोजगार का ही है 7वे भाव की तरह तो बुध निरंतर की तरह बिजनेस का कारक है इसी कारण इसका बलवान होना जरूरी है।। आचार्य आनन्द जालान के अनुसार, कुंडली के 10वे भाव स्वामी(रोजगार भाव)और 7वे भाव(रोज को बिक्री और दुकानदारी भाव) स्वामी रोजगार/व्यापार के है तो शुक्र ग्रह कॉस्मेटिक शॉप, कॉस्मेटिक काम का कारक ग्रह है।अब जन्मकुंडली का दसवे भाव स्वामी बलवान होकर शुक्र सहित 5वे भाव से या 5वे भाव स्वामी से सबन्ध बनाकर बैठा है और व्यापार का कारक बुध साथ ही धनलाभ भाव(दूसरे/ग्यारहवें भाव और इनके स्वामी)बलवान हैं लाभ देने की स्थिति में है तब कॉस्मेटिक दुकान खोल सकते है उसके अलावा या फिर जन्मकुंडली/नवमांश कुंडली या दशमांश कुंडली मे 7वे भाव स्वामी का सम्बन्ध बलवान कॉस्मेटिक समान के कारक बलवान शुक्र सहित दूसरे-ग्यारहवें भाव स्वामी से कुण्डली में बन रहा है और बुध बहुत शक्तिशाली है साथ ही कुंडली के दूसरे/ग्यारहवें भाव और इनके स्वामी भी बहुत शक्तिशाली हैं लाभ देने की स्थिति में है तब कॉस्मेटिक की शॉप कर सकते है अच्छा लाभ देगी,

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