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*चंद्र का राहु , केतु व शनि से युक्त व दृष्टि होने पर किये जाने वाले उपाय*

ज्योतिष संबंधित समस्त जानकारी के लिए इस पेज को फॉलो करें अधिक जानक 🚩.सोमवार और प्रदोष का व्रत रखें। 🚩दाढ़ी और चोटी न रखें। 🚩.सोमवार को केसर की खीर खाएं और कन्याओं को खिलाएं। 🚩.सोमवार के दिन श्वेत वस्त्रों का दान करना चाहिए। 🚩शिवजी की पूजा करें और चावल का दान करें। 🚩जय माता दी 🚩 सूर्य का राहु , केतु व शनि से युक्त व दृष्टि होने पर किये जाने वाले उपाय* : 🚩छह नारियल अपने सिर पर से वार कर जल में प्रवाहित करें। 🚩.आदित्यहृदय स्तोत्र का नियमित पाठ करें 🚩सूर्य को जल चढ़ाएं अर्थात अर्घ्य दें। 🚩एकादशी और रविवार का व्रत रखें। 🚩गेहूं, गुड़ व तांबे का दान दें। 🚩जय माता दी 🚩 चन्द्र को मजबूत करने के लिए* पानी में चंद्र की वस्तुएं डाल कर स्नान करें। भगवान शिव का कच्चे दूध से अभिषेक करें। एवम् चंद्रशेखर अस्टक का पाठ करें। चांदी का टुकड़ा गले में धारण करे। और ब्रम्हमुहूर्त में ध्यान योग करें। ॐ सों सोमेश्वराय नमो नमः मंत्र का जाप करे। 🚩जय माता दी 🚩 |#धन_भाव_मे_राहु_फल_किस_तरह_मिलते_है?|| धन भाव मतलब कुंडली का दूसरा भाव।यह भाव जातक के धन, संपत्ति का है राहु एक ऐसा मायावी ग्रह है।जो पल भर में जातक को पलक झपकते ही उचाईयो पर ले जा सकता है तो उचाईयो से नीचे भी लाकर खड़ा कर सकता है।जब राहु शुभ स्थित्ति में कुंडली के दूसरे भाव या दूसरे भाव के स्वामी के साथ शुभ स्थिति में होता है तब असीमित धन-संपदा का स्वामी बना सकता है।जिससे जो जातक व्यापार करते है या कोई ऐसा कार्य करते है जिसमे बड़ा धन लाभ होता है

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*दिनाँक -: 06/07/2020सोमवार*

प्रतिपदा, कृष्ण पक्षश्रावण तिथि --------प्रतिपदा 09:21:29 तक पक्ष ---------------------------कृष्ण नक्षत्र -----उत्तराषाढा 23:10:49 योग -----------वैधृति 21:32:34 करण ---------कौलव 09:21:29 करण -----------तैतुल 21:07:28 वार -------------------------सोमवार माह ---------------------------श्रावण चन्द्र राशि -------------------मकर सूर्य राशि ------------------ मिथुन रितु ----------------------------ग्रीष्म सायन ---------------------------वर्षा आयन --------------------उत्तरायण सायन -------------------दक्षिणायण संवत्सर -----------------------शार्वरी संवत्सर (उत्तर) -------------प्रमादी विक्रम संवत ----------------2077 विक्रम संवत (कर्तक)------2076 शाका संवत ----------------1942 सूर्योदय -----------------05:30:47 सूर्यास्त -----------------19:17:11 दिन काल --------------13:46:24 रात्री काल -------------10:14:01 चंद्रास्त ----------------06:17:59 चंद्रोदय -----------------20:31:23 लग्न ---- मिथुन 20°15' , 80°15' सूर्य नक्षत्र -----------------पुनर्वसु चन्द्र नक्षत्र --------------उत्तराषाढा नक्षत्र पाया --------------------ताम्र *🚩💮🚩 पद, चरण 🚩💮🚩 भो ----उत्तराषाढा 11:01:47 जा ----उत्तराषाढा 17:05:15 जी ----उत्तराषाढा 23:10:49 खी ----श्रवण 29:18:29 *💮🚩💮 ग्रह गोचर 💮🚩💮* ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद ======================== सूर्य=मिथुन 20°22 ' पुनर्वसु, 1 के चन्द्र = मकर16 °23 ' उ०षा०' 2 भो बुध = मिथुन 12 °10 ' आर्द्रा ' 2 घ शुक्र= वृषभ 12°55, रोहिणी ' 1 ओ मंगल=मीन 10°30' उo भा o' 3 झ

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RAMAYANA JYOTISH -- रामायण ज्योतिष सिर्फ ज्योतिष सीखने की कला ही नही अपने आप को जानने का एक बेहतर…

RAMAYANA JYOTISH -- रामायण ज्योतिष सिर्फ ज्योतिष सीखने की कला ही नही अपने आप को जानने का एक बेहतरीन हुनर है आइये रामायण से ज्योतिष का आनंद और अनुभव लेवे.............* *केतु (हनुमान) -* केतु क्या है केतु अलगाव देना , मोक्ष देना , एक सेवा भाव रखना , दुनियादारी से बिल्कुल बाहर , सबसे बड़ा विस्फोटक ग्रह जो किसी के भी साथ रहे उस की ताकत में 4 गुना इजाफा हो जाये केतु के पास कही रहस्य है लेकिन वह रहस्य वही जान पाता है जो दुनियादारी से विछोह कर लेता है किसी तरह का कोई मोह नही भोतिक जीवन से वह सिर्फ अंदर ही अंदर चलता जाए किसी तरह का दिखावा पसन्द नही जिसका विस्तार दुनियादारी से बाहर है जो राहु का बिल्कुल विपरीत है भोतिक जीवन के बाहर एक उच्च स्तरीय विस्तार और जीवन की महत्वपूर्ण सच्चाई पंचतत्व के बाद का रहस्य , *जो भोतिक जीवन समाप्त होने के बाद शुरु होता है वही केतु कहलाता है* वास्तव में केतु के पाया कोई माया नही है माया पति को केतु अपने अन्दर हृदय में रखता है जो समस्त प्रकार की माया का निर्माता है वह केतु के ह्रदय में वास करता है राहु माया का प्रयोग छल बल से करने वाला विद्वान था और केतु मायापति को दिल मे बसाने वाला एक सामान्य जीवन जीने वाला सच्चा हृदय का मासूम एक भक्त कहलाता है जो अपने स्वामी के लिए आग की नदी है , जोश है , विस्फ़ोट है कुछ भी रूप ले सकता है वही केतु की शक्तियां है *जिसको कोई माया मात न दे सके वह ओर कोई भी नही हनुमान है जिनके ह्रदय में सियाराम की जोड़ी बैठी है जो मायापति को दिल मे बसाकर को चल रहे है यह केतु कोई और दूसरा नही है हनुमान का साक्षात स्वरूप है* जो मायापति जिनसे माया बनी है रावण में उस माया को प्राप्त करके अभिमान किया था केतु ने भी ठीक वही किया था

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गुरु पूर्णिमा पर क्या भेंट करें अपने गुरु को, पढ़ें अपनी राशि के

इस वर्ष 5 जुलाई 2020 को गुरु पूर्णिमा मनाई जा रही है। जब गुरु पूर्णिमा पर आप अपने गुरुजी का आशीर्वाद लेने जाएं, तब उनका पूजन करके अपनी राशि अनुसार भेंट दें, तो आपको उनका आशीर्वाद निश्चित रूप से फलेगा। आइए जानें अपनी राशि से गुरु को क्या नजराना दें... मेष : अन्न के साथ मूंगा भेंट करें। वृषभ : चांदी भेंट करें। मिथुन : शॉल भेंट करें। कर्क : चावल भेंट करें। सिंह : पंच धातु से बनी सामग्री भेंट करें। कन्या : डायमंड भेंट करें। तुला : कम्बल भेंट करें। वृश्चिक : माणिक भेंट करें। धनु : स्वर्ण भेंट करें। मकर : पीला वस्त्र भेंट करें। कुंभ : सफेद मोती भेंट करें। मीन : हल्दी के साथ चने की दाल भेंट करें।

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19 साल बाद श्राद्ध पक्ष और नवरात्र में एक माह का अंतर

— आश्विन अधिकमास — श्राद्ध पक्ष 2 सितंबर से 17 सितंबर तक — 17 अक्टूबर से शारदीय नवरात्र होंगे शुरू जयपुर। आषाढ़ शुक्ल एकादशी पर एक जुलाई को देवशयनी एकादशी (Devshayani Ekadashi) होगी। इसके साथ ही देव सोयेंगे और मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा। इसके साथ ही चातुर्मास शुरू होगा। चातुर्मास 26 नवम्बर को कार्तिक शुक्ल एकादशी पर समाप्त होगा। ऐसे में इस बार चातुर्मास करीब पांच माह रहेगा। इस बार श्राद्ध पक्ष (Shraddha Paksha) और शारदीय नवरात्र (Sharadiya Navratri) के बीच एक माह का अंतर रहेगा। श्राद्ध पक्ष 2 सितंबर से 17 सितंबर तक रहेगा, इसके बाद 18 सितंबर से 16 अक्टूबर तक आश्विन अधिकमास (Ashwin Adhikamas) रहेगा, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। इसके ठीक बाद 17 अक्टूबर से शारदीय नवरात्र शुरू हो जाएंगे। ज्योतिषाचार्यों की मानें तो करीब 19 साल बाद आश्विन अधिकमास आ रहा है, यानी 19 साल बाद इस बार श्राद्ध पक्ष और नवरात्र में एक माह का अंतर आ रहा है।

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चंद्र ग्रहण (उपछाया) 5 जुलाई 2020 रविवार आषाढ़ पूर्णिमा को उतराषाढ़ा नक्षत्र धनु राशि में सुबह 8.…

चंद्र ग्रहण (उपछाया) 5 जुलाई 2020 रविवार आषाढ़ पूर्णिमा को उतराषाढ़ा नक्षत्र धनु राशि में सुबह 8.37 से दिन के 11.22 तक रहेगा। इस बार चंद्र ग्रहण पर गुरु पूर्णिमा का विशेष योग बन रहा है। चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई न देने के कारण चंद्र ग्रहण का सूतक काल भी प्रभावी नहीं होगा। चंद्र ग्रहण प्रभाव से धनु राशि के व्यक्ति चंद्रमा कमजोर होने से मन अशांत, नकारात्‍मक विचारों के चलते वे थोड़े समय के लिए अव्‍यवस्थित रहेंगे।

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🚩 *गुरु पर्व(पूर्णिमा) महोत्सव ज्ञान विधान* 🚩

इस वर्ष 5 जुलाई 2020, रविवार को आषाढ़ी पूर्णिमा है, इसी दिन गुरु पूर्णिमा है । जीवन में हर कार्य किसी न किसी के द्वारा सिखाया जाता है। वह 'गुरु' कहलाता है। साधार‍णतया गुरु का महत्व अध्यात्म में सर्वोपरि माना गया है जिसमें दीक्षा किसी न किसी रूप में दी जाकर शिष्य की देखरेख उसके कल्याण की भावना से की जाती है। सभी धर्मों में गुरु का अपनी-अपनी तरह से महत्व है, लेकिन हमारे हिन्दू धर्म में गुरु-मंत्र- देवता-यंत्र में कोई भेद नहीं माना जाता है बल्कि कुंडलिनी जागरण के लिए सर्वोपरि सहस्रार चक्र में गुरुदेव का वास बतलाया गया है, जो सबके आखिर में सिद्ध होता है। वे लोग बड़े सौभाग्यशाली होते हैं जिन्हें किसी सद्गुरु से दीक्षा मिली हो। यहां पर ऐसे लोगों के लिए बतलाया जा रहा है जिन्हें गुरु उपलब्ध नहीं है जिनके जीवन में कोई गुरु दीक्षा नहीं है,या उन्होंने गुरु नहीं बनाया है,और वे साधना करना चाहते हैं तथा जिनका प्रतिशत 99 से भी अधिक है।जीवन में गुरु का स्थान आवश्यक है, वो चाहे हमारा पुरोहित(पंडित) जी हो या कोई देव(भगवान)अत: वे निम्न प्रयोग लेकर लाभान्वित हो सकते हैं। *कैसे करें पूजन* :- * सर्वप्रथम एक चावल की ढेरी श्वेत वस्त्र पर लगाकर उस पर कलश-नारियल रख दें।* उत्तराभिमुख होकर सामने अपने आराध्य,इष्ट कोई भी भगवान हो-विष्णु,शिवजी,रामजी,हनुमान जी किसी का भी चित्र रख दें। * उस पर उन देव को गुरु मानकर निम्न मंत्र पढ़कर श्रीगुरुदेव का आवाहन करें-* 'ॐ वेदादि गुरुदेवाय विद्महे, परम गुरुवे धीमहि, तन्नौ: गुरु: प्रचोदयात्।।'* हे गुरुदेव! मैं आपका आवाहन करता हूं। फिर यथाशक्ति पूजन करें, नैवेद्यादि आरती करें।* तथा 'ॐ गुं गुरुभ्यो नम: मंत्र' की 11,

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चंद्र ग्रहण (उपछाया) 5 जुलाई 2020 रविवार आषाढ़ पूर्णिमा को उतराषाढ़ा नक्षत्र धनु राशि में सुबह 8.…

चंद्र ग्रहण (उपछाया) 5 जुलाई 2020 रविवार आषाढ़ पूर्णिमा को उतराषाढ़ा नक्षत्र धनु राशि में सुबह 8.37 से दिन के 11.22 तक रहेगा। इस बार चंद्र ग्रहण पर गुरु पूर्णिमा का विशेष योग बन रहा है। चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई न देने के कारण चंद्र ग्रहण का सूतक काल भी प्रभावी नहीं होगा। चंद्र ग्रहण प्रभाव से धनु राशि के व्यक्ति चंद्रमा कमजोर होने से मन अशांत, नकारात्‍मक विचारों के चलते वे थोड़े समय के लिए अव्‍यवस्थित रहेंगे।

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⚜️📜 *अथ् पंचांगम्* 📜⚜️

*दिनाँक -: 04/07/2020,शनिवार* चतुर्दशी, शुक्ल पक्ष आषाढ तिथि --------चतुर्दशी 11:33:21 तक पक्ष ----------------------------शुक्ल नक्षत्र -------------मूल 23:21:10 योग --------------ब्रह्म 24:53:54 करण ---------वणिज 11:33:21 करण ------विष्टि भद्र 22:50:12 वार -------------------------शनिवार माह --------------------------आषाढ चन्द्र राशि ---------------------धनु सूर्य राशि ------------------मिथुन रितु ----------------------------ग्रीष्म सायन ---------------------------वर्षा आयन --------------------उत्तरायण सायन ----------------- दक्षिणायण संवत्सर -----------------------शार्वरी संवत्सर (उत्तर) ------------प्रमादी विक्रम संवत ----------------2077 विक्रम संवत (कर्तक) ----2076 शाका संवत ----------------1942 सूर्योदय ----------------05:29:57 सूर्यास्त -----------------19:17:21 दिन काल --------------13:47:24 रात्री काल -------------10:13:00 चंद्रास्त -----------------05:49:09 चंद्रोदय -----------------18:41:42 लग्न ----मिथुन 18°21' , 78°21' सूर्य नक्षत्र --------------------आर्द्रा चन्द्र नक्षत्र ----------------------मूल नक्षत्र पाया --------------------ताम्र *🚩💮🚩 पद, चरण 🚩💮🚩* ये ----मूल 05:53:23 यो ----मूल 11:41:12 भा ----मूल 17:30:26 भी ----मूल 23:21:10 भू ----पूर्वाषाढा 29:13:31 *💮🚩💮 ग्रह गोचर 💮🚩💮* ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद ======================== सूर्य=मिथुन 18°22 ' आर्द्रा, 4 छ चन्द्र = धनु 03 °23 ' मूल' 1 ये बुध = मिथुन 13 °10 ' आर्द्रा ' 3 ङ शुक्र= वृषभ 12°55, रोहिणी '

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*कष्ट निवारण के लिए

हमारे घर में ही कई ऐसी भाग्यवर्धक चीजें होती है, जिनका प्रयोग करने पर हम स्वयं अपने घर-ऑफिस आदि के नकारात्मक ऊर्जा को दूर करके सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि कर सकते हैं। ऐसे आसान उपाय जिससे हम सकारात्मक ऊर्जा का विकास कर अपने भाग्य को बदल सकते हैं, अपना भाग्य जागृत कर सकते हैं। *कर्ज मुक्ति* व्यक्ति को ऋण मुक्त कराने में यह टोटका अवश्य सहायता करेगा : मंगलवार को शिव मन्दिर में जा कर शिवलिंग पर मसूर की दाल “ॐ ऋण मुक्तेश्वर महादेवाय नम:” मंत्र बोलते हुए चढ़ाएं। कार्य सिद्ध होगा। आगे प्रभु इच्छा! उपरोक्त उपाय विशेषज्ञ के निर्देश द्वारा करें, गलती होने पर हानि भी हो सकती ह

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🚩 🌞 *सुप्रभातम्* 🌞🚩 📜««« *आज का पंचांग* »»»📜 कलियुगाब्द.........................5122 विक्रम संवत्.........................2077 शक संवत्............................1942 मास...................................आषाढ़ पक्ष.....................................शुक्ल तिथी...............................त्रयोदशी दोप 01.19 पर्यंत पश्चात चतुर्दशी रवि.................................उत्तरायण सूर्योदय...........प्रातः 05.46.15 पर सूर्यास्त........... संध्या 07.16.51 पर सूर्य राशि.............................मिथुन चन्द्र राशि..........................वृश्चिक गुरु राशि................................धनु नक्षत्र..................................ज्येष्ठा रात्रि 12.03 पर्यंत पश्चात मूल योग...................................शुक्ल रात्रि 03.01 पर्यंत पश्चात ब्रह्मा करण................................तैतिल दोप 01.19 पर्यंत पश्चात गरज ऋतु....................................ग्रीष्म *दिन.............................शुक्रवार* 🇬🇧 *आंग्ल मतानुसार :-* *०३ जुलाई सन २०२० ईस्वी ।* ☸ शुभ अंक.....................3 🔯 शुभ रंग...............आसमानी 📿 *अभिजीत मुहूर्त :-* प्रातः 12.04 से 12.57 तक । 👁‍🗨 *राहुकाल (अशुभ) :-* प्रात: 10.50 से 12.30 तक । 🚦 *दिशाशूल :-* पश्चिमदिशा - यदि आवश्यक हो तो जौ का सेवन कर यात्रा प्रारंभ करें। 🌞 *उदय लग्न मुहूर्त -* *मिथुन* 04:32:36 06:46:18 *कर्क* 06:46:18 09:02:28 *सिंह* 09:02:28 11:14:17 *कन्या* 11:14:17 13:24:57 *तुला* 13:24:57 15:39:34 *वृश्चिक* 15:39:34 17:55:44 *धनु* 17:55:44 20:01:23 *मकर* 20:01:23 21:48:31 *कुम्भ*

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जन्म कुंडली में दूसरे चौथे पांचवें सातवें नौवें दसवें भाव में सूर्य राहु या सूर्य शनि की युति स्थ…

जन्म कुंडली में दूसरे चौथे पांचवें सातवें नौवें दसवें भाव में सूर्य राहु या सूर्य शनि की युति स्थित हो तो यह पितृदोष माना जाता है. सूर्य यदि तुला राशि में स्थित होकर राहु या शनि के साथ युति करें तो अशुभ प्रभावों में और ज्यादा वृद्धि होती है. इन ग्रहों की युति जिस भाव में होगी उस भाव से संबंधित व्यक्ति को कष्ट और परेशानी अधिक होगी तथा हमेशा परेशानी बनी ही रहेगी. लग्नेश यदि छठे आठवें बारहवें भाव में हो और लग्न में राहु हो तो भी पितृदोष बनता है.

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