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जातक की जन्म कुंडली मे ⬇️ नीच राशि मे भावस्थ ग्रहों से जाने..

जातक कि गत् जन्म कि.. अचूक कि गई गँलतिओ का ब्योरा.. 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ ✅1.यदि जन्मपत्रिका में 🌜चंद्रमा नीच 【८-वृश्चिक】राशि का है, तो जातक पूर्व जन्म में माता या मातृतुल्य किसी महिला को कष्ट देकर आया है एवं किसी का मन मारकर आया है। ✅2.यदि किसी जातक का 🌞सूर्य ⬇️नीच 【७-तुला】 राशि का है तो वह व्यक्ति डत जन्म मे पिता को कष्ट देकर आया है, या अपनी आत्मा को मार कर (आत्महत्या) कर के आया है। ✅3.यदि 🔴मंगल किसी का नीच राशि का है तो व्यक्ति अपने ★पराक्रम का दुरुपयोग करके या ★निर्दोष की हिंसा करके या ★बंधु बांधवों को कष्ट देकर आया है। ✅4.यदि किसी जातकज.कुंडली मे का🟡 गुरू⬇️ नीच राशि【१०-मकर】 का है तो व्यक्ति गुरु तुल्य जन या संतान को कष्ट देकर व महिला जातीका पति का व बच्चों का दिल तोड़ कर आई है। ✅5.यदि किसी जातक का 🟢बुध ⬇️नीच राशि 【१२-मिन】 का है तो जातक व्यापार मे धोखा देकर आया है या स्त्री/मातृपक्ष को कष्ट देकर आया है। ✅6. ⚪शुक्र यदि ⬇️नीच राशि【६-कन्या】 का है तो जातक.. गत् जन्म मे ★धन वैभव का दुरुपयोग करके आया है, या ★किसी स्त्री, या ★अपनी पत्नी को छल कर आया है। ✅7.यदि ज.लग्न कुंडली मे 🔵शनि ⬇️नीच 【१-मेष】राशि का है तो जातक न्याय की जगह अन्याय कर के आया है। ✅8.यदि छाया ग्रह ⬇️नीच राशि【३-मिथुन का केतु/९-धनु मे राहु】 में हो तो व्यक्ति ★किसी श्रमिक या ★भिक्षु या ★संत फकीर को कष्ट देकर या ★उनकी वस्तु का हरण करके आया है। *〰️〰️〰️〰️〰️〰️हरिः ओउम्🔔〰️〰️〰️〰️*

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#कुंडली_अनुसार_बाधक_ग्रह-

कुंडली में बाधक ग्रह वो होते हैं जो किसी भी कार्य को बिना बाधा के पूरा नही होने देते चाहे वह कुंडली अनुसार सुभ ही क्यों न हों । सुभ ग्रह बाधक होने पर सफलता तो मिलती है लेकिन काफी संघर्ष के बाद ,और असुभ् ग्रह साथ में बाधक भी हों तो सफलता में काफी रुकावटें आती हैं। कुंडली अनुसार #चर लग्न में 11भाव का स्वामी , #स्थिर लग्न में 9 भाव का स्वामी, #द्विस्वभाव् लग्न में 7 भाव का स्वामी ग्रह बाधक ग्रह होते हैं कोई भी थोड़ी जानकारी से कुंडली में बाधक ग्रह की पहचान कर सकता है। मेष कर्क तुला और मकर लग्न वालों के लिए 11 घर का स्वामी वृषभ सिंह वऋषिक और कुम्भ लग्न वालों के लिए 9 भाव का स्वामी मिथुन कन्या धनु और मीन लग्न वालों के लिए 7 भाव का स्वामी किसी भी लग्न के लिए जो भाव बाधक होते है यदि वहा भाव के स्वामी के अलावा। कोई दूसरा ग्रह बैठा हो तो वो ही बाधक बनेगा । यदि बाधक भाव खाली है तो उस भाव का स्वामी बाधक होगा । विरोधाभाष ये की वृष्चिक लग्न में भाग्य का स्वामी चंद्र ही बाधक । उपाय मोती पहने ।

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🌻शनिवार, ११ जुलाई २०२०🌻

सूर्योदय: 🌄 ०५:३२ सूर्यास्त: 🌅 ०७:२४ चन्द्रोदय: 🌝 २३:३४ चन्द्रास्त: 🌜१०:५६ अयन 🌕 उत्तरायणे (दक्षिणगोलीय) ऋतु: ⛈️ वर्षा शक सम्वत: 👉 १९४२ (शर्वरी) विक्रम सम्वत: 👉 २०७७ (प्रमादी) मास 👉 श्रावण पक्ष 👉 कृष्ण तिथि: 👉 षष्ठी (१३:३३ तक) नक्षत्र: 👉 पूर्वाभाद्रपद (०५:३३ तक) योग: 👉 शोभन (२०:५९ तक) प्रथम करण: 👉 वणिज (१३:३३ तक) द्वितीय करण: 👉 विष्टि (२६:३८ तक) 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰️〰️ ॥ गोचर ग्रहा: ॥ 🌖🌗🌖🌗 सूर्य 🌟 मिथुन चंद्र 🌟 मीन मंगल 🌟 मीन (उदित, पूर्व) बुध 🌟 मिथुन (अस्त, पश्चिम, वक्री) गुरु 🌟 धनु (अस्त, पश्चिम, वक्री) शुक्र 🌟 वृष (उदित, पूर्व, मार्गी) शनि 🌟 मकर (उदय, पूर्व, वक्री) राहु 🌟 मिथुन केतु 🌟 धनु 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 शुभाशुभ मुहूर्त विचार ⏳⏲⏳⏲⏳⏲⏳ 〰〰〰〰〰〰〰 अभिजित मुहूर्त: 👉 ११:५५ से १२:५० अमृत काल: 👉 २६:५८ से २८:४५ होमाहुति: 👉 गुरु अग्निवास: 👉 आकाश भद्रावास: 👉 मृत्युलोक (१३:३३ से २६:३८) दिशा शूल: 👉 पूर्व नक्षत्र शूल: 👉 ❌❌❌ चन्द्र वास: 👉 उत्तर दुर्मुहूर्त: 👉 ०५:२८ से ०६:२३ राहुकाल: 👉 ०८:५५ से १०:३९ राहु काल वास: 👉 पूर्व यमगण्ड: 👉 १४:०६ से १५:४९ 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ ☄चौघड़िया विचार☄ 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ ॥ दिन का चौघड़िया ॥ १ - काल २ - शुभ ३ - रोग ४ - उद्वेग ५ - चर ६ - लाभ ७ - अमृत ८ - काल ॥रात्रि का चौघड़िया॥ १ - लाभ २ - उद्वेग ३ - शुभ ४ - अमृत ५ - चर ६ - रोग ७ - काल ८ - लाभ नोट-- दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है। प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 शुभ यात्रा दिशा 🚌🚈🚗⛵🛫 उत्तर-पश

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*🚩🔱❄«ॐ»«ॐ»«ॐ»❄🔱🚩*

🌞🛕 *जय रामजी की*🛕🌞 🌺 *जय श्री राधेकृष्णा*🌺 🔔 *बम महाँकाल बाबा*🔔 🏹 *जय माँ जगदम्ब भवानी*🏹 *🐀🐘जय श्री गणेश🐘🐀* ※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※ 10-जुलाई-2020 वार:-शुक्रवार तिथी:-05पंचमी11:38 पक्ष:-कृष्णपक्ष माह:-श्रावण नक्षत्र:-पूर्वाभाद्रपदा29:32 योग:-सौभाग्य20:16 करण:-तैतिल11:38 चन्द्रमा:-कुंभ22:54तक/मीन सुर्योदय:-05:46 सुर्यास्त:-19:32 दिशा शुल.....पश्चिम निवारण उपाय:-जौं का सेवन ऋतु :-वर्षा ऋतु गुलीक काल:-07:30से 09:00 राहू काल:-10:30से12:00 अभीजित....12:15से13:03 विक्रम सम्वंत .........2077 शक सम्वंत ............1942 युगाब्द ..................5122 सम्वंत सर नाम:-प्रमादी 🌞चोघङिया दिन🌞 चंचल:-05:46से07:29तक लाभ:-07:29से09:12तक अमृत:-09:12से10:55तक शुभ:-12:38से14:21तक चंचल:-17:47से19:32तक 🌓चोघङिया रात🌗 लाभ:-22:06से23:23तक शुभ:-00:40से01:57तक अमृत:-01:57से03:14तक चंचल:-03:14से04:31तक  आज के विशेष योग वर्ष का 108वाँ दिन, नाग पंचमी (राजस्थान में), मेला नाग पंचमी व हरदेव पूजा जयपुर (राज. में), पंचक, 🏡वास्तु टिप्स🏢🏡 पूर्वाभिमुख फ्लैट में मुख्य द्वार ईशान की ओर पूर्व दिशा के बीच तीसरे या चौथे भाग में बना शुभ होता है। *🌅सुविचार🌅👏* जब तक निरन्तर भजन नहीं होगा, तब तक कार्यकी सिद्धि नहीं होगी। *💊💉आरोग्य उपाय🌱🌿* 🌷 *सोंठ -Sonth परिचय, गुण धर्म और औषधीय प्रयोग।* 🌷 👉🏻 सोंठ रुचि कारक, आमवातनाशिक, पाचक, चरपरी, हल्की, स्निग्ध, उष्ण, पाक में मधुर, कफ, वात तथा मल के बन्ध को तोड़ने वाली है। वीर्य वर्धक, स्वर को उत्तम करने वाली, बामन, स्वास, शूल

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*आज चंद्रमा धनिष्ठा नक्षत्र में है*

💠💠💠💠💠💠 आठ वसु देवता जो कि प्रकाश ,ऊर्जा ,वायु ,जल ,पृथ्वी, चंद्र ,सूर्य, ध्रुव और आकाश के देवता है तथा जीवन को सभी मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति प्रचुरता और बहुतायत में करते हैं, ये धनिष्ठा नक्षत्र के स्वामी है। यह पृथ्वी तत्व के भी देव है अतः सब कुछ प्रचुरता में स्थायित्व के साथ प्रदान करते हैं सभी भौतिक सुविधाएं और प्रसिद्धि भी। धनिष्ठा नक्षत्र को इनसे ऊर्जा भी बहुतायत में प्राप्त होती है इसलिए धनिष्ठा नक्षत्र के लोग धनी भी होते हैं अर्थात वह अपनी ऊर्जा और शक्तियों को ज्ञान , धन ,शक्ति और प्रसिद्धि प्राप्त करने में लगाते हैं। *धनिष्ठा नक्षत्र, शनि के स्वामित्व की मकर और कुंभ राशि में आता है* और इसका स्वामी मंगल है, अतः इस नक्षत्र में जन्मे लोगो में धैर्य और हिम्मत दोनों बहुतायत में होती है। इस नक्षत्र का चिन्ह है मृदंग, इस नक्षत्र से जुड़े लोगों में संगीत और नृत्य में गहरी रुचि होती है और उसकी समझ भी। शक्ति और ज्ञान का संगम होने की वजह से इस नक्षत्र के जातक खेल के क्षेत्र में भी आगे रहते है या रुचि रखते है। जीवन में सफलता के लिए इस नक्षत्र में जन्मे लोगो ने हमेशा अपने स्वभाव में ज्ञान, शक्ति और संयम का संतुलन रखना चाहिए। मुहूर्त शास्त्र के अनुसार *ये नक्षत्र भूमि, भवन संबंधित कार्य और यात्रा की शुरुआत के लिए उत्तम होता है*, इसके अलावा नृत्य, संगीत या खेल की प्रतिस्पर्धा आयोजित करने के लिए भी उत्तम होता है।इस नक्षत्र के दिन किसी भी प्रकार का धार्मिक आयोजन ,धन का आदान-प्रदान ,ध्यान साधना या व्यायाम ,चिकित्सकीय कार्य , गहने खरीदने का कार्य भी किया जाना चाहिए परन्तु विवाह कार्य और साझेदारी की शुरुआत लिए ये नक्षत्र बिल्कुल उत्तम नहीं

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*प्रकृति के तीन कड़वे नियम, जो सत्य है !!!*

*1. प्रकृति का पहला नियम :* यदि खेत में बीज न डालें जाएं, तो कुदरत उसे *घास-फूस* से भर देती हैं !! ठीक उसी तरह से दिमाग में *सकारात्मक* विचार न भरे जाएँ, तो *नकारात्मक* विचार अपनी जगह बना ही लेती है !! *2. प्रकृति का दूसरा नियम :* जिसके पास जो होता है, *वह वही बांटता है !!* • सुखी *सुख* बांटता है !! • दुःखी *दुःख* बांटता है !! • ज्ञानी *ज्ञान* बांटता है !! • भ्रमित *भ्रम* बांटता है !! • भयभीत *भय* बांटता हैं !! *3. प्रकृति का तिसरा नियम :* आपको जीवन में जो भी मिले, उसे *पचाना* सीखो क्योंकि ; • *भोजन* न पचने पर, रोग बढते है !! • *पैसा* न पचने पर, दिखावा बढता है !! • *बात* न पचने पर, चुगली बढती है !! • *प्रशंसा* न पचने पर, अंहकार बढता है !! • *निंदा* न पचने पर, दुश्मनी बढती है !! • *राज* न पचने पर, खतरा बढता है !! • *दुःख* न पचने पर, निराशा बढती है !! • *सुख* न पचने पर, पाप बढता है !! 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 *बात कड़वी बहुत है, पर सत्य है !!!*

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⚜️💐📜 *अथ् पंचांगम्* 📜💐

*दिनाँक -: 08/07/2020,बुधवार* तृतीया, कृष्ण पक्ष श्रावण तिथि ---------तृतीया 09:18:05 तक पक्ष ---------------------------कृष्ण नक्षत्र --------धनिष्ठा 25:14:07 योग --------------प्रीति 19:59:11 करण ------विष्टि भद्र 09:18:05 करण ------------बव 21:39:49 वार -------------------------बुधवार माह --------------------------श्रावण चन्द्र राशि ---मकर 12:29:57 चन्द्र राशि ------------------कुम्भ सूर्य राशि -------------------मिथुन रितु ----------------------------ग्रीष्म सायन --------------------------वर्षा आयन --------------------उत्तरायण सायन ----------------- दक्षिणायण संवत्सर ----------------------शार्वरी संवत्सर (उत्तर) ------------प्रमादी विक्रम संवत ----------------2077 विक्रम संवत (कर्तक) ----2076 शाका संवत ----------------1942 वाराणसी सूर्योदय -----------------05:31:39 सूर्यास्त -----------------19:16:55 दिन काल ------------- 13:45:16 रात्री काल -------------10:15:10 चंद्रास्त ----------------08:16:25 चंद्रोदय -----------------21:56:55 लग्न ----मिथुन 22°10' , 82°10' सूर्य नक्षत्र -----------------पुनर्वसु चन्द्र नक्षत्र ------------------धनिष्ठा नक्षत्र पाया --------------------रजत *💮🚩💮 ग्रह गोचर 💮🚩💮* ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद ======================== सूर्य=मिथुन 22°22 ' पुनर्वसु, 1 के चन्द्र = मकर 26 °23 ' धनिष्ठा' 1 गा बुध = मिथुन 12 °10 ' आर्द्रा ' 2 घ शुक्र= वृषभ 14°55, रोहिणी ' 2 वा मंगल=मीन 11°30' उo भा o' 3 झ गुरु=धनु 29°22 ' उ oषाo , 1 भे शनि=मकर 05°43' उ oषा o ' 4

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#दूरदर्शिता #का #अभाव#

पंचम भाव का स्वामी अगर अष्टम में बैठ जाये तो जातक की निर्णय क्षमता कमजोर होगी । वो कितनी भी अच्छी प्लानिंग कर ले उसमे त्रुटि होगी और परिणाम गलत मिलेंगे । ऐसा तब भी होगा जब पंचमेश छठे या बारहवे हो ।

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*नव ग्रह बाधाओं को दूर करने के सावन के उपाय*

🪐संपूर्ण समाधान🪐 *always sweet & short* सावन में सूर्य ग्रह के उपाय || जिस भी जातक के जीवन में सूर्य के कारण परेशानी आ रही हो तो सावन के पुरे महीने पास वाले मंदिर में जाकर शिवलिंग पर विधिवत या पंचोपचार करने के बाद लाल आक के पुष्प एवं पत्तों से भगवान शिव जी की पूजा अर्चना करनी चाहिए ! सावन में चंद्रमा ग्रह के उपाय || जिस भी जातक के जीवन में चंद्रमा के कारण परेशानी आ रही हो तो सावन के पुरे महीने पास वाले मंदिर में जाकर शिवलिंग पर गाय का दूध से अभिषेक करना चाहिए व् सावन के सोमवार का विधिपूर्वक उपवास रखना चाहिए ! सावन में मंगल ग्रह के उपाय || जिस भी जातक के जीवन में मंगल के कारण परेशानी आ रही हो तो सावन के पुरे महीने पास वाले मंदिर में जाकर शिवलिंग पर विधिवत गिलोय की जड़ी-बूटी के रस से अभिषेक करना चाहिए ! सावन में बुध ग्रह के उपाय || जिस भी जातक के जीवन में बुध के कारण परेशानी आ रही हो तो सावन के पुरे महीने पास वाले मंदिर में जाकर शिवलिंग पर विधिवत विधारा की जड़ी के रस से अभिषेक करना चाहिए ! सावन में गुरु ग्रह के उपाय || जिस भी जातक के जीवन में गुरु के कारण परेशानी आ रही हो तो सावन के पुरे महीने पास वाले मंदिर में जाकर शिवलिंग पर विधिवत केसर मिश्रित दूध शिवलिंग पर अर्पित करना चाहिए ! सावन में शुक्र ग्रह के उपाय || जिस भी जातक के जीवन में शुक्र के कारण परेशानी आ रही हो तो सावन के पुरे महीने पास वाले मंदिर में जाकर शिवलिंग पर विधिवत पंचामृत एवं घृत से अभिषेक करना चाहिए ! सावन में शनि ग्रह के उपाय || जिस भी जातक के जीवन में शनि के कारण परेशानी आ रही हो तो सावन के पुरे महीने पास वाले मंदिर में जाकर शिवलिंग पर विधिवत गन्ने के र

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*07/07/2020, मंगलवार*

द्वितीया, कृष्ण पक्ष श्रावण तिथि -------- द्वितीया 09:02:01 तक पक्ष ----------------------------कृष्ण नक्षत्र ----------श्रवण 23:54:41 योग ---------विश्कुम्भ 20:31:33 करण --------------गर 09:02:01 करण ---------वणिज 21:05:30 वार -----------------------मंगलवार माह -------------------------- श्रावण चन्द्र राशि ------------------- मकर सूर्य राशि ------------------मिथुन रितु ----------------------------ग्रीष्म सायन ---------------------------वर्षा आयन --------------------उत्तरायण सायन ----------------- दक्षिणायण संवत्सर -----------------------शार्वरी संवत्सर (उत्तर) -------------प्रमादी विक्रम संवत ----------------2077 विक्रम संवत (कर्तक) ----2076 शाका संवत ----------------1942 सूर्योदय ----------------05:31:12 सूर्यास्त -----------------19:17:04 दिन काल ------------13:45:51 रात्री काल -------------10:14:35 चंद्रास्त ----------------07:17:42 चंद्रोदय -----------------21:16:58 लग्न ---- मिथुन 21°13' , 81°13' सूर्य नक्षत्र -----------------पुनर्वसु चन्द्र नक्षत्र -------------------श्रवण नक्षत्र पाया --------------------ताम्र *💮🚩💮 ग्रह गोचर 💮🚩💮* ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद ======================== सूर्य=मिथुन 21°22 ' पुनर्वसु, 1 के चन्द्र = मकर13 °23 ' श्रवण' 2 खू बुध = मिथुन 12 °10 ' आर्द्रा ' 2 घ शुक्र= वृषभ 13°55, रोहिणी ' 1 ओ मंगल=मीन 11°30' उo भा o' 3 झ गुरु=धनु 29°22 ' उ oषाo , 1 भे शनि=मकर 05°43' उ oषा o ' 4 जी राहू=मिथुन 04°10 ' मृगशिरा , 4 की केतु=धनु 04 ° 10 ' मूल , 2

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👾।।हर हर महादेव शम्भो काशी विश्वनाथ वन्दे ।।👾

〰️〰️〰️👾👾👾👾〰️〰️〰️👾👾👾〰️〰️ 👉कुण्डली पहचान करने की विधि -- 〰️〰️〰️〰️👾👾〰️〰️〰️〰️ 👉कुण्डली पुरुष की है या स्त्री की ? 〰️〰️〰️👾👾👾〰️〰️👾〰️ 👉लग्न से सम भाव मे शनि हो तो स्त्री, विषम भाव मे हो तो पुरुष की समझना चाहिये।यदि ऐसा न हो तो समझो कुण्डली मे लग्न अशुद्ध है।यथा --- 👇 लग्नात्समे शनौ स्त्री च विषमे पुरुष: स्मृत:! न चेदेवं तदा ज्ञेज्ञेया खिला सा जन्मपत्रिका ।। |||||| अथवा ----- 👉लग्न, राहु सूर्य मंगल ये जिन जिन राशियों मे हो सबकी संख्या को जोड़कर 3 का भाग देने पर सम शेष बचे तो स्त्री और विषम बचे तो पुरुष की जन्म पत्रिका समझना चाहिये । 👉विशेष --दोनों प्रकार से एक मिले तो सब ठीक समझना चाहिये नहीं तो शनि बलवान हो तोप्रथम प्रकार सेऔर लग्नेश बलवान हो तो द्वितीय प्रकार से आवे सो कहना ।। 👉कुण्डली मृत व्यक्ति की है या जीवित की?-- 〰️〰️〰️〰️👾👾〰️〰️〰️〰️👾〰️ 👉जन्म लग्नऔर लग्न से अष्टम भाव की राशि संख्या में प्रश्न लग्न की राशि संख्या जोडकर अष्टमेजिस राशि मे बैठा हो उस राशि की संख्या से भाग देने से विषम शेष बचे तो जीवित कीऔर सम शेष बचे तो मृत की कुण्डली समझना चाहिये ।। यथा -- प्रश्न लग्नर्क्ष संख्या या जन्म लग्नर्क्ष संख्यया । जन्मलग्नाष्टमर्क्षस्यसंख्यया च समन्विता ।। साष्टमेशाश्रयर्क्षघ्ना लग्नेशाश्रय संख्यया । भाजिता विषमे शेषे जीवितोsथ समे मृत:।। 👾👾👾👾👾👾👾👾👾👾👾👾👾👾👾

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1.शिवजी , गणेशजी और भैरवजी को तुलसी नहीं चढ़ानी चाहिए.

2. तुलसी का पत्ता बिना स्नान किए नहीं तोड़ना चाहिए. 3. तुलसी के पत्तों को 11 दिनों तक बासी नहीं माना जाता है. इसकी पत्तियों पर हर रोज जल छिड़कर पुन: भगवान को अर्पित किया जा सकता है. 4. रविवार, एकादशी, द्वादशी, संक्रान्ति तथा संध्या काल में तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ना चाहिए. 5. सूर्य देव को शंख के जल से अर्घ्य नहीं देना चाहिए. 6. सूर्य, गणेश, दुर्गा, शिव और विष्णु , ये पंचदेव कहलाते हैं, इनकी पूजा सभी कार्यों में अनिवार्य रूप से की जानी चाहिए. प्रतिदिन पूजन करते समय इन पंचदेव का ध्यान करना चाहिए. इससे लक्ष्मी कृपा और समृद्धि प्राप्त होती है. 7. मां दुर्गा को दूर्वा (एक प्रकार की घास) नहीं चढ़ानी चाहिए. यह गणेशजी को विशेष रूप से अर्पित की जाती है. 8. दूर्वा रविवार को नहीं तोडऩी चाहिए. 9. बुधवार और रविवार को पीपल के वृक्ष में जल अर्पित नहीं करना चाहिए. 10. केतकी का फूल शिवलिंग पर अर्पित नहीं करना चाहिए. 11. किसी भी पूजा में मनोकामना की सफलता के लिए दक्षिणा अवश्य चढ़ानी चाहिए. 12. मां लक्ष्मी को विशेष रूप से कमल का फूल अर्पित किया जाता है. इस फूल को पांच दिनों तक जल छिड़क कर पुन: चढ़ा सकते हैं. 13. हमेशा इस बात का ध्यान रखें कि कभी भी दीपक से दीपक नहीं जलाना चाहिए. शास्त्रों के अनुसार जो व्यक्ति दीपक से दीपक जलाते हैं, वे रोगी होते हैं. 14. घर के मंदिर में सुबह एवं शाम को दीपक अवश्य जलाएं. एक दीपक घी का और एक दीपक तेल का जलाना चाहिए.

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