हस्त रेखा और कुंडली के भाव।
जीवन रेखा:जीवन रेखा वृहस्पति पर्वत के पास से निकल कर शुक्र पर्वत के नीचे से होती हुई मणि बन्ध तक जाती है। इसी रेखा के ऊपरी भाग में मंगल पर्वत के निचले भाग मे,लम्बाई से कम,समानांतर मंगल रेखा होती है।इन दोनो रेखाओ से अष्टम भाव यानी उम्र का पता लगता है। सफलता रेखा:यह रेखा सुर्य पर्वत प्र होती है तथा ज्यादातर हृदय रेखा तक जाती है। इससे इम्तिहान में सफलता का बोध होता हैं यानी पंचम स्थान का ज्ञान होता है । भाग्य रेखा: यह रेखा जीवन रेखा से निकलकर उसके निचले भाग से मस्तिष्क तथा उसके निचले भाग को काटती हुई शनि पर्वत पर मध्यमा तक जाती है। यही ज्योतिष मे नवम भाव है । स्वश्थ्य रेखा: यह रेखा बुध पर्वत पर होती है तथा हृदय रेखा तक जाती है। इससे कुंडली मे प्रथम भाव को जानना चाहिए। शादी की रेखा:यह रेखा बुध पर्वत पर और स्वास्थ रेखा से आड़ी,हथेलीके निचले भाग मे है। इससे कुंडली मे सप्तम भाव का पता लगता है । मंगल पर्वत ( नीचे वाले) पर चिन्ह: यह शत्रुओ तथा बिमारियों से होने वाली तकलीफ़ो का घोतक है। यही कुंडली का छठा स्थान है । त्रिकोण:जीवन रेखा,हृदय रेखा तथा मस्तिष्क रेखाओ के बीच मे जो त्रिकोण बनते हैं,उनसे माकानो का पता लगता है । यही कुंडली मे चोथा स्थान है । मच्छ रेखा: यह जीवन रेखा के अन्त मे,ऊपरी तरफ,मनीबंध के करीब से निकलकर,मछली की तरह होती है। इससे धन का पता लगता है। यह दुसरा स्थान है । भाई-बहन की रेखायें: शुक्र पर्वत पर जीवन रेखा के ऊपरी भाग मे जितनी आड़ी रेखाये है,उनसे भाई-बहन का पता चलता है । यह कुंडली का तीसरा स्थान है। सन्तान रेखाएँ: चन्द्र पर्वत के नीचे,हथेली के बाये भाग मे आड़ी रेखाएँ है